बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी और इतिहास

Last updated on April 19th, 2024 at 09:46 am

बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी इतिहास में हमेशा अमर रहेगी। मस्तानी बहुत सुंदर और तेज स्वभाव वाली थी। इनके पिता बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल थे जो कि एक हिंदू राजा थे जबकि इनकी माता मुस्लिम महिला थी जिसका नाम रूहानी था।

इनकी प्रेम कहानी में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। बाजीराव पेशवा इनको अपनी पत्नी मानते थे लेकिन परिवार और समाज की ओर से इन्हें कभी पत्नी का दर्जा नहीं मिल पाया।

बाजीराव मस्तानी का इतिहास (Bajirao Mastani History In Hindi)

ये बुंदेलखंड के सम्राट छत्रसाल की बेटी थी। इनकी माता का नाम रूहानी था। इनकी माता नृत्य करने वाले परिवार से संबंध रखती थी जोकि मूलतया अफगान मुल्क की थी।

गुजरात में प्रचलित लोक नृत्य में आज भी मस्तानी का जिक्र देखने को मिलता है। गुजरात के पारंपरिक नृत्य में इन्हें “यवन कांचनी” के नाम से भी जाना जाता है। मस्तानी अपने समय में अद्वितीय सुंदरता की धनी के साथ-साथ संगीत प्रेमी थी। घुड़सवारी और धनुष विद्या में इन्होंने विशेष शिक्षा प्राप्त कर रखी थी। इसके अलावा मस्तानी की अन्य विशेषताओं की बात की जाए तो वह सुंदरता के साथ साथ वह चतुर और बुद्धिमान भी थी।

इनका ज्यादातर जीवन इनकी माता रूहानी के पास ही बिता। उनकी माता मुस्लिम धर्म से संबंध रखती थी, इसलिए मस्तानी ने भी मुस्लिम धर्म को ही माना। ज्यादातर लोगों का मानना है कि बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल की दूसरी पत्नी रूहानी उनकी रखैल थी। जबकि यह सही नहीं है, उन्होंने रूहानी से शादी की थी। रूहानी को कभी भी रखेल बनाकर नहीं रखा उनका बहुत आदर और सम्मान किया करते थे।

बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी (Bajirao Mastani love story)

Bajirao Mastani की प्रेम कहानी इतिहास की उन मुख्य प्रेम कहानियों में से एक है। लेकिन इतिहासकारों ने इसको शुरू से ही दबा दिया जिसकी वजह से यह आम लोगों तक नहीं पहुंच सकी।

ढोला-मारू, रोमियो और जूलियट, हीर और रांझा, सलीम-अनारकली के प्रेम से भी बढ़कर था बाजीराव मस्तानी का प्रेम। Bajirao Mastani की प्रेम कहानी में मुख्य बात यह है कि बाजीराव पेशवा और मस्तानी एक दूसरे को पहले से नहीं जानते थे। सन 1728 ईस्वी की बात है बुंदेलखंड पर अचानक मुगलों ने आक्रमण कर दिया।

छत्रसाल के पास बड़ी संख्या में सेना नहीं थी। छत्रसाल को यह लगा कि कहीं उनका राज्य उनसे छीन ना लिया जाए। मुगलों के आक्रमण के डर से उन्होंने उस समय के महान मराठा बाजीराव पेशवा प्रथम के पास मदद के लिए संदेश भेजा। कहते हैं कि यह संदेश लेकर मस्तानी खुद गई थी, और यहीं पर बाजीराव पेशवा और मस्तानी की पहली मुलाकात हुई थी। बाजीराव पेशवा प्रथम ने Mastani को मदद का पूरा आश्वासन दिया और उनके साथ बुंदेलखंड की ओर चल पड़े।

इससे पहले की मुगल बुंदेलखंड पर आक्रमण करते और राजा छत्रसाल को पराजित करते, बाजीराव पेशवा की सेना उन पर बिजली की तरह टूट पड़ी और मुगलों का सफाया कर दिया। राजा छत्रसाल बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने कई तरह के उपहार बाजीराव पेशवा को दिए जिनमें कई छोटे छोटे कस्बे भी शामिल थे। बाजीराव पेशवा को मस्तानी बहुत पसंद आई और मस्तानी भी बाजीराव पेशवा को पसंद करने लगी।

जब इसकी थोड़ी सी भनक बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल को पड़ी तो उन्होंने तुरंत मस्तानी का हाथ बाजीराव के हाथ में दे दिया। यह बाजीराव पेशवा की दूसरी शादी थी। इससे पहले उन्होंने काशीबाई नामक महिला से शादी की थी। बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती गई और दोनों एक दूसरे से इतना प्रेम करने लगे कि वह एक पल के लिए भी एक दूसरे से अलग नहीं होना चाहते थे। जब बाजीराव युद्ध करने के लिए महल से निकलते तो मस्तानी का घोड़ा भी उनके साथ साथ चलता था। दोनों के जिस्म 2 थे लेकिन जान एक थी।

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इनके प्रेम के दुश्मन

बाजीराव की दूसरी शादी के पश्चात मराठों के साथ-साथ ब्राह्मण समुदाय के लोग भी उनसे नाराज रहने लगे। ऐसा भी कहा जाता है कि बाजी राव पेशवा मस्तानी से इतना प्रेम करते थे कि उनके लिए धीरे-धीरे उनका ध्यान अपनी प्रजा और साम्राज्य से हटने लगा।

वह अपना ज्यादातर समय मस्तानी के साथ व्यतीत करने लगे। उनकी पहली पत्नी काशीबाई को मस्तानी से कोई दुश्मनी नहीं थी और वह दोनों को पति पत्नी के रूप में स्वीकार कर चुकी थी। चिमाजी अप्पा जोकि बाजी राव पेशवा के छोटे भाई थे और उनके साथ बाजीराव पेशवा के जेष्ठ पुत्र बालाजी बाजी राव उर्फ नानासाहब ने कभी भी मस्तानी को स्वीकार नहीं किया।

चिमाजी अप्पा और नाना साहेब शुरू से चाहते थे कि बाजीराव मस्तानी अलग हो जाए लेकिन बाजी राव पेशवा प्रथम के खिलाफ वह बोल नहीं सकते थे। मस्तानी एक मुस्लिम लड़की थी जिसकी वजह से उसको परिवार का कोई भी सदस्य स्वीकार नहीं कर रहा था। बाजीराव पेशवा की पहली पत्नी काशीबाई भी इस बात से दुखी थी लेकिन बाजीराव की खुशी के लिए वह चाहती थी कि बाजीराव मस्तानी हमेशा साथ रहे।

काशीबाई पर उनकी सास और बाजी राव पेशवा की मां राधाबाई का दबाव था कि कैसे भी करके मस्तानी को बाजी राव से अलग किया जाए। लेकिन काशीबाई बाजी राव की खुशी के लिए ऐसा कुछ भी करने के पक्ष में नहीं थी इसलिए कई बार काशीबाई को भी सताया जाता था। सन 1740 ईसवी में मस्तानी ने एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम कृष्ण राव रखा गया। कालांतर में इसका नाम बदलकर शमशेर बहादुर रख दिया गया

बाजीराव मस्तानी अलग कैसे हुए?

सन 1740 के प्रारंभ में बाजीराव पेशवा मध्य-प्रदेश के खरगोन नामक स्थान पर जो कि इंदौर के पास हैं वहां किसी राजनीतिक कारण के चलते गए थे। यहां पर बाजीराव पेशवा की तबीयत खराब हो गई और उन्हें आराम करना पड़ा। उनकी पहली पत्नी काशीबाई चाहती थी कि मस्तानी को बाजीराव के पास ले जाया जाए , जिससे उनको खुशी मिलेगी।

बाजीराव पेशवा ने संदेश भिजवाया कि कैसे भी करके मस्तानी को उनके तक पहुंचा दिया जाए। यह बात नाना साहेब और चिमाजी अप्पा को पसंद नहीं आई और उन्होंने मस्तानी को महल में कैद कर दिया। मस्तानी को कैद करने के बाद उसे नजरबंद भी रखा गय ताकि किसी भी तरह वह बाजीराव तक नहीं पहुंच सके। चिमाजी अप्पा और नाना साहेब ने काशीबाई को बाजीराव के पास भेज दिया।मस्तानी को अपने पास नहीं पाकर बाजीराव बहुत दुखी हुए और खरगोन में ही अपने प्राण त्याग दिए।

मस्तानी की मृत्यु कैसे हुई (How Mastani Died)

बाजीराव पेशवा की मृत्यु के पश्चात मस्तानी अपनी सुध बुध भूल गई क्योंकि वह बाजीराव से अथाह प्रेम करती थी और इस प्रेम की कोई सीमा नहीं थी। समाज, देवर और सांस के साथ-साथ कई लोगों के द्वारा मस्तानी को स्वीकार नहीं करने के बाद भी मस्तानी और बाजीराव के बीच में जो प्रेम था वह अद्वितीय था। जैसे ही मस्तानी को बाजीराव पेशवा की मृत्यु का संदेश प्राप्त हुआ वह चित्त होकर धड़ाम से गिर पड़ी। कुछ समय बाद मस्तानी का भी देहांत हो गया।

बाजीराव और मस्तानी की मृत्यु हो जाने के पश्चात उनके पुत्र शमशेर को काशीबाई ने ही बड़ा किया था। इतना ही नहीं शमशेर बहादुर आगे चलकर मराठा साम्राज्य के लिए लड़ा। बाजीराव ने मस्तानी के लिए पुणे में “मस्तानी महल” बनवाया था। यह आज भी इन दोनों के प्रेम की गवाही दे रहा है। प्रेम एक शब्द नहीं है प्रेम एक जीने की कला है जो इसे समझ जाता है वह इसमें डूब जाता है। बाजीराव मस्तानी पर आधारित मराठी सीरियल “राव” 1990 में बनाया गया था।

संजय लीला भंसाली ने रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा को लेकर बाजीराव मस्तानी फिल्म बना चुका है। बाजीराव मस्तानी फिल्म में रणवीर सिंह ने बाजीराव का किरदार निभाया था जबकि दीपिका पादुकोण ने मस्तानी का किरदार निभाया और प्रियंका चोपड़ा को उनकी पहली पत्नी काशीबाई का अहम रोल मिला।

दोनों की याद में समाधी भी बनी हुई हैं और जब से इनके ऊपर फिल्म बनाई गई हैं तब लोगों ने इनके बारे में जाना हैं। बाकि यह प्रेम कहानी इतिहास के पन्नों से हमेशा के लिए गायब हो गई होती।

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