रायबा मालुसरे का इतिहास जीवन परिचय.

Last updated on April 19th, 2024 at 09:48 am

रायबा मालुसरे का इतिहास (Rayba Malusare History In Hindi)– रायबा मालुसरे तानाजी मालुसरे के पुत्र थे. इनके विवाह को बीच में छोड़कर तानाजी लड़ने गए और वीरगति को प्राप्त हुए. बाद में उनके विवाह को छत्रपति शिवाजी महाराज ने संपन्न करवाया था.

इस लेख में हम तानाजी मालुसरे के पुत्र रायबा मालुसरे का इतिहास और जीवन परिचय कि चर्चा करेंगे.

रायबा मालुसरे का इतिहास ( Rayba Malusare History In Hindi)

परिचय बिंदुपरिचय
पूरा नामरायबा मालुसरे माहिती (Rayba Malusare).
पिता का नामतान्हाजी मालुसरे या तानाजी.
माता का नामसावित्री मालुसरे.
(रायबा मालुसरे का जीवन परिचय)

भारत का इतिहास कई वीर और वीरांगनाओं की गाथाओं से भरा पड़ा है, लेकिन ज्ञान के अभाव की वजह से ज्यों का त्यों लोगों तक नहीं पहुंच पाया है. छत्रपति शिवाजी महाराज के मुख्य सेनापति तान्हाजी मालुसरे के पुत्र रायबा मालुसरे, उनकी तरह वीर और युद्ध विद्या में निपुण थे.

इस समय छत्रपति शिवाजी महाराज कोंढाणा किले पर चढ़ाई की योजना बना रहे थे। तान्हाजी मालुसरे अपने पुत्र की शादी का निमंत्रण लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज के पास पहुंचे. छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके साथ पूरी मराठा सेना योजनाबद्ध तरीके से कोंढाणा किले पर चढ़ाई की तैयारी कर रही थी.

इस बात की खबर पहले तान्हाजी मालुसरे को नहीं थी, तानाजी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए और उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज से पूछा कि आखिर मुझे इस युद्ध की सूचना क्यों नहीं दी गई.

तान्हाजी मालुसरे ने मन बना लिया था कि वह इस युद्ध में छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ शामिल होंगे. पुत्र रायबा मालुसरे की शादी को छोड़कर तान्हाजी अब कोंढाणा क़िले ( सिंहगढ़ किला) पर विजय प्राप्त करने का मन बना चुके थे.

धर्मपत्नी सावित्री बाई के दम पर तानाजी मालुसरे का बड़ा कदम

कौन थी सावित्री बाई मालुसरे? सावित्री मालुसरे तान्हाजी मालुसरे की धर्मपत्नी थी और अपनी पत्नी के सहारे तान्हाजी अपने पुत्र रायबा मालुसरे की शादी बीच में ही छोड़कर युद्ध के लिए तैयार हो गए.

एक कहावत सुनी होगी हर सफल व्यक्ति के पीछे एक औरत का हाथ होता है, कुछ ऐसा ही सहयोग तान्हाजी मालुसरे के जीवन में सावित्री बाई का था.

सावित्रीबाई ने अपने पति को कोंढाणा किले पर विजय प्राप्त करने के लिए भेजा और अपने पुत्र रायबा मालुसरे की शादी की परवाह नहीं की, इसी त्याग की वजह से तान्हाजी मालुसरे विश्व इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए.

सावित्रीबाई साहसी और देशभक्त महिला थी। इनको अपने पति पर बहुत विश्वास था और इन्हीं के सहयोग से तान्हाजी ने यह बड़ा कदम उठाया था. मराठा इतिहास की एक ऐसी महिला वीरांगना थी जो हर समय हर कदम पर अपने पति के साथ चट्टान की तरह खड़ी रही.

सावित्रीबाई भली-भांति जानती थी कि अगर उनके पति तान्हाजी मालुसरे इस युद्ध में शामिल होते हैं तो उनके जीवित रहने के संभावना कम हो जाएंगी.

क्योंकि कोंढाना किले को जीतना आसान नहीं होगा और उदयभान सिंह भी कमजोर नहीं था. जहां एक और सावित्रीबाई और तानाजी मालुसरे के इकलौते पुत्र रायबा की शादी थी वहीं दूसरी तरफ उनका पति मौत की परवाह किए बिना युद्ध मैदान में चल पड़ा. इतना साहस कोई वीरांगना ही दिखा सकती है.

तान्हाजी मालुसरे की मृत्यु के बाद रायबा मालुसरे का क्या हुआ?

कोंढाना का किला (सिंह गढ़ किला) जीतने के लिए तान्हाजी को हिंदू राजपूत राजा उदयभान सिंह से लोहा लेना था, जो कि मुगलों की तरफ से लड़ रहा था. इस भयंकर युद्ध में छत्रपति शिवाजी महाराज के अजीज मित्र और सेनापति तान्हाजी मालुसरे ने उदयभान सिंह को मौत के घाट उतार दिया.

कई वर्षों बाद कोंढाणा पर फिर से मराठों का एकाधिकार हो गया लेकिन दुखद बात यह थी कि इस युद्ध के अंत में तान्हाजी मालुसरे ने मातृभूमि की रक्षा के लिए, वीरता के साथ लड़ते हुए मराठों को विजय दिलाई और हुए वीरगति को प्राप्त हुए.

तान्हाजी मालुसरे के पुत्र रायबा मालुसरे के विवाह की जिम्मेदारी स्वयं छत्रपति शिवाजी महाराज ने उठाई और अपनी देखरेख में रायबा का विवाह संपन्न करवाया. जहां तान्हाजी ने अपने दायित्व को निभाया वही छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी अपने दायित्व का निर्वाह करते हुए रायबा मालुसरे का विवाह करवाया और उनकी माता सावित्री बाई का सहयोग किया.

तान्हाजी मालुसरे के चले जाने के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज चाहते थे कि उनका पुत्र रायबा मालुसरे भी उनकी तरह वीर योद्धा बने. शिवाजी महाराज रायबा को कई वीर गाथाएं सुनाते थे साथ ही उनके पिता की वीर गाथाएं भी सुनाते ताकि उनके अंदर भी देश भक्ति जागे.

छत्रपति महाराज की दिल्ली तमन्ना थी कि आगे चलकर रायबा मालुसरे भी अपने पिता तान्हाजी मालुसरे के तरह तन-मन और धन से मातृभूमि की रक्षा करने वाला वीर बने.

तान्हाजी के चले जाने के बाद भी उनकी पत्नी सावित्री बाई और पुत्र रायबा मालुसरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज की छत्र-छाया में अपना जीवन यापन किया.

यह भी पढ़ें-

भारत का पहला प्राचीन नाम क्या था?
मीराबाई चानू का जीवन परिचय.

दोस्तों उम्मीद करते हैं रायबा मालुसरे का इतिहास (Rayba Malusare History In Hindi) पढ़कर आपको प्रेरणा जरूर मिली होगी, धन्यवाद।