हवाई जहाज का इतिहास- हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया और हवाई जहाज कैसे उड़ता हैं?

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मनुष्यों की सबसे अद्भुद खोज माना जाता हैं, हवाई जहाज का आविष्कार। वैसे तो हवाई जहाज का इतिहास बहुत पुराना है। आप रामायण काल में रावण के पुष्पक विमान के बारे में जानते होंगे। हम बात करेंगे आधुनिक हवाई जहाज के आविष्कार, इतिहास और इससे जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्यों के बारे में। हवाई जहाज एक वायुयान हैं जो हवा में उड़ता हैं (hawai jahaj kaise udta hain)। यह कई आकार, वजन और छोटा – बड़ा हो सकता हैं। पंखों द्वारा गति प्रदान किए जाने के पश्चात् यह उड़ान भरता हैं।

आज से लगभग 118 वर्षों पूर्व राइट ब्रदर्स द्वारा इसका निर्माण किया गया था। राइट ब्रदर्स ( राइट बंधुओं) आधुनिक हवाई जहाज आविष्कारक हैं, जिन्होंने 1903 ईस्वी में हवाई जहाज का आविष्कार किया था।

हवाई जहाज कैसे उड़ता हैं।
हवाई जहाज का इतिहास और उड़ान पद्धति।

हवाई जहाज का आविष्कार और इतिहास ( aeroplane history in hindi )

  • अन्य नाम – वायुयान और एरोप्लेन।
  • आविष्कार कब हुआ – 1903 ईस्वी में।
  • आविष्कार किसने किया – औरविल राईट और विल्बर राइट ( राइट ब्रदर्स).
  • कहां हुआ – अमेरिका में।
  • यह पुरी तरह नियंत्रित था? – नहीं।

मनुष्य शुरू से ही पक्षियों की भाँति आसमान में उड़ान की लालसा रखता रहा है। यूनान में एक बहुत प्राचीन कहानी प्रचलित है जिसके अनुसार डिडेलस नामक व्यक्ति और उसका पुत्र आइकेरस को हवाई यात्रा बहुत पसंद थी। इस कहानी के अनुसार ये दोनों बाप-बेटा मोम के पंख बनाकर समुद्र के ऊपर उड़ान भरने थे।

आईकेरस क्योंकि युवा था तो उसकी उड़ने की ललक बहुत अधिक थी, एक दिन वह उड़ता हुआ सूर्य के समीप पहुंचा गया। जिससे उसके मोम के पंख पिघल गए। वह धड़ाम से नीचे आ गिरा और उसकी मृत्यु हो गई।

अब बात करते हैं जर्मनी की जहां पर लिलिएंथल नामक एक व्यक्ति ने कई दिनों तक उड़ने के नियमों पर शोध किया। उन्होंने पंख के आकार की एक मशीन बनाई और उसके सहारे उड़ने की कोशिश की। पंखों के आकार की उस मशीन को  स्वयं के बांध लेता और ऊपरी स्थान पर जाकर वहां से छलांग लगाता हालांकि वह कुछ सेकंड उड़ पाता। लेकिन इससे उसका आत्मविश्वास और उड़ने की चाह लगातार बढ़ती जा रही थी।

धीरे-धीरे वह सही दिशा में आगे बढ़ रहा था। तभी एक दिन जमीन से 50-60  फीट ऊपर की दूरी पर उड़ रहा था और अचानक से जमीन पर आ गिरा जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

लेकिन इसके बाद भी प्रयास लगातार चलते रहें। अमेरिका के एक अन्य प्रोफ़ेसर लैंग्ली भी जवाई जहाज का आविष्कार करने का प्रयास कर रहे थे। इन्होंने एक गतिशील मशीन का आविष्कार जो कि 100 मीटर तक उड़ान भर सकती थी।

इनके प्रयोग और विधि ने वैज्ञानिकों को बहुत प्राभावित किया। कई वैज्ञानिक इनके प्रयोगों पर विचार करना शुरु कर दिया। साथ ही यह उम्मीद भी जागी कि शायद बड़ी सफलता हाथ लग जाए।

विश्व भर में वायुयान पर काम जारी था लेकिन मन चाहत सफलता हाथ नहीं लगी। किसी ने सोचा तक नहीं था कि जो व्यक्ति सिर्फ हाई स्कूल तक पढ़े लिखे हैं, वह इस क्षेत्र में सफलता हासिल करेंगे।

हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया और कैसे किया (hawai jahaj kaise udta hain)

अब तक आप इतना जान पाए हैं कि हवाई जहाज का आविष्कार करने के लिए वर्षों से प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। तो दूसरा प्रश्न मन में उठना लाजमी है की हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया। औरविल राईट और विल्बर राइट नामक दो भाई थे,जो एक गरीब परिवार से थे। उनके पास वायुयान निर्माण के लिए पैसे नहीं थे। बीना किसी तकनीकी शिक्षा और कौशलता के बावजूद इन्होंने हार नहीं मानी।

कहते हैं कि हौसले बुलंद हो तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का सामना किया जा सकता है और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है।

1896 ईस्वी कि बात है ओहियो के डेटन नगर में रहने वाले राइट बंधुओं ने लिलिएंथल के प्रयोगों और किताबों से प्रभावित होकर हवाई जहाज का आविष्कार करने का निश्चय किया। इससे पहले यह अपने गृह नगर में एक छोटी सी साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाते थे।

इनके पास धन नहीं था लेकिन हौसला था। हवाई जहाज के इतिहास में अब तक उड़ने वाली जितनी भी मशीनें बनी उन सब का इन्होंने गहराई के साथ अध्ययन किया। साथ ही उड़ने वाले पक्षियों का भी इन्होंने बराबर ध्यान रखा और उस सिद्धांत को पता लगाने की कोशिश की जिस सिद्धांत पर पक्षी हवा में उड़ते हैं।

बहुत प्रयास के बाद इन्होंने एक ग्लाइडर बनाया। जो पतंग के समान उड़ता था। यह लिवरों की मदद से रसिया बांधकर नियंत्रित किए जाते थे। उड़ान के सिद्धांत धीरे-धीरे इनके दिमाग में आ गए और उन्होंने इतना सीख लिया कि किस तरह एक उड़ने वाली वस्तु को हवा में चलायमान रखा जा सकता है।

पहले ग्लाइडर उसके बाद मानवयुक्त ग्लाइडर का आविष्कार हुआ जो कि लिलिएंथल की तरह पहाड़ी से कुदकर उड़ाया गया।यह ग्लाइडर हवा में आसानी के साथ उड़ सकता था लेकिन इसको नियंत्रित करना बहुत मुश्किल था साथ ही इसकी दूरी बहुत कम थी।

सन 1900 की बात है, पथरीले पहाड़ों से बचने के लिए यह रेतीले इलाकों में चले गए। नॉर्थ कैरोलाइना में लगभग 2 वर्षों तक उड़ान भरने की कोशिश करते रहे। अब तक यह लगभग 2000 बार उड़ान भर चुके थे इनकी सबसे बड़ी उड़ान 600 मीटर की रही। जैसे-जैसे समय बीतता गया इनका हौसला बढ़ता गया और ऐसा लगने लगा कि सफलता ज्यादा दूर नहीं है।

सन 1903,राइट बंधुओं ने इंधन से चलने वाली एक मशीन बनाई जिसकी सहायता से ग्लाइडर को हवा में उड़ाया जा सके। यह प्रयोग भी नॉर्थ कैरोलाइना में हुआ। दोनों भाइयों को यकीन था कि यह प्रयोग काम करेगा और वायुयान बनाने के क्षेत्र में इन्हें बड़ी कामयाबी हासिल होगी।

इंधन वाली मशीन से राइट बंधुओं द्वारा पहला ग्लाइडर उड़ाया गया जो कि लगभग 12 सेकंड तक हवा में रहा और नीचे आ गया लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें ग्लाइडर को कोई भी नुकसान नहीं हुआ।दिनभर प्रयास चलता रहा, हवा की दिशा में 835 फीट की दूरी अंत में इस ग्लाइडर ने की साथ ही 59 सेकंड तक हवा में रहा।इस सफलता ने राइट बंधुओं के लिए ऑक्सीजन का काम किया।

लगभग 2 वर्षों के पश्चात अर्थात 1905 में यह अपने प्रयोगों में बहुत अधिक निपुण हो गए। इसी वर्ष इन्होंने 35 मील प्रति घंटे की रफ्तार से 24 मील की दूरी तय की। यह बात आपकी तरह लोगों में फैल गई। लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि अब तक किसी भी समाचार पत्र या टीवी पर इस बारे में कोई खबर नहीं दिखाई गई। यहां तक कि बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी थी कि ऐसी मशीन का आविष्कार भी हो चुका है, जो 24 मील तक की दूरी तय कर सकती है।

सन 1908,विल्बर राइट एक मशीन लेकर फ्रांस चले गए। जब फ्रांस के पत्रकारों को इस बारे में सूचना मिली तो उन्होंने विल्बर राइट की इस मशीन का खूब मजाक उड़ाया। लंबी गर्दन के पक्षी के समान दिखने वाली इस मशीन को भद्दी सी शक्ल कहकर समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया।

लेकिन हौसला नहीं टूटा। इस दिन विल्बर राइट नेपो कारनामा कर दिखाया जिसके बारे में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था जिस ग्लाइडर को भद्दी सी शक्ल वाली मशीन कहकर मजाक उड़ाया गया, उसने 52 मील की दूरी तय की और विल्बर राइट लगभग 90 मिनट तक हवा में रहे।
यह कारनामा देखकर फ्रांस की सरकार बहुत खुश हुई और उन्होंने विल्बर राइट को 30 इंजन बनाने का आदेश दिया साथ ही 2 लाख फ्रैंक का नगद पुरस्कार दिया।

दूसरी तरफ विल्बर राइट के भाई औरविल अपने साथ एक व्यक्ति को और लेकर 1 घंटे से भी अधिक की यात्राएं करने लगे।

हवाई जहाज आविष्कार में क्रान्ति

1909 की बात है।  नाम के एक फ्रांसीसी ने इंग्लिश चैनल पार कर सबको चौंका दिया। फिर क्या था जेपेलिन नामक एक गुब्बारे ने जोकि इंजनयुक्त था 220 मील की दूरी तय करके रिकॉर्ड बना दिया।दुसरी तरफ औरविल राईट ने वर्जीनिया से लेकर नॉर्थ कैरोलिना तक हवाई जहाज को उड़ानें लगे।

सन 1919 में NC-4 नामक एक अमेरिकी विमान ने अटलांटिक महासागर को पार कर लिया। R-34 नामक एक अंग्रेज़ी विमान ने भी यह कारनामा कर दिखाया।

इस तरह हवाई जहाज या एरोप्लेन का आविष्कार हुआ। राइट बंधुओं के इस ऐतिहासिक आविष्कार को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। इन दोनों भाइयों ने अपना पूरा जीवन हवाई जहाज के निर्माण में लगा दिया, इन्होंने अपनी जान तक की परवाह नहीं की।

आधुनिक युग में जो हवाई जहाज उड़ रहे हैं और जिस तरह की सुविधाओं का आनंद हम ले रहे हैं, उसका पूरा क्रेडिट दोनों राइट बंधुओं को जाता है। हवाई जहाज का आविष्कार करने वाले राइट बंधुओं का नाम इतिहास में हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

हवाई जहाज कैसे उड़ता है (hawai jahaj kaise udta hain)

जब भी हवाई जहाज को आसमान में उड़ता हुआ देखते हैं तो मन में यह विचार आता है कि आखिर हवाई जहाज कैसे उड़ता है? (hawai jahaj kaise udta hain) या फिर यूं कहें कि किस सिद्धांत पर हवाई जहाज उड़ान भरता है।

कुछ समय पहले तक मेरे मन में भी यह विचार था कि हवाई जहाज कैसे उड़ता है लेकिन जब इसके बारे में जानकारी प्राप्त हुई तो आप तक पहुंचा रहा हूं।

हवाई जहाज उड़ान भरते समय टेक ऑफ और फोर्स को जीरो रखने के सिद्धांत पर कार्य करता है। राइट बंधुओं ने एयरफॉयल पद्धति का प्रयोग किया था। एयरफॉयल पद्धति से एयरविंग्स तैयार किए गए, जोकि न्यूटन के तीसरे नियम पर आधारित है। इस तकनीक का उपयोग करके इन दोनों भाइयों ने वक्ररूपी विंग्स बनाए जिनकी सहायता से टेकऑफ और लैंडिंग में बहुत मदद मिलती हैं। वक्र एयरविंग वायुमंडल में बहती हवा को नीचे की तरफ धकेलता है जो कि न्यूटन के तीसरे नियम पर आधारित है।

न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर होती है। इसके परिणाम स्वरूप हवाई जहाज के नीचे की हवा उसे ऊपर की ओर उठाती है। लिफ्ट फोर्स की वजह से गुरुत्वाकर्षण बल कम हो जाता है। परिणाम स्वरूप हवाई जहाज पर कुल फॉर्स शून्य हो जाता है।
हवाई जहाज के हवा में उठने के बाद एक विशेष बल के द्वारा उसे आगे की तरफ धकेला जाता है यानी कि हवाई जहाज को हवा में तेज गति से उड़ने के लिए जिस विशेष बल की आवश्यकता होती है वह प्रोपेलर से प्राप्त होता हैं।

प्रोपेलर एक पंखे के समान होता है जो बहुत तेज गति के साथ घूमता है और यही वजह है कि हवाई जहाज आगे की तरफ बहुत तेज गति से बढ़ता है। उड़ान भरते समय हवाई जहाज में नेविगशन के लिए कई विंग्स होते हैं जिनकी सहायता से इसे कंट्रोल किया जाता है।मुख्य विंग हैं एस्पोइलर, रडर, एलेरोन और एलिवेटर।

एलीवेटर का मुख्य कार्य हवाई जहाज को ऊपर ले जाना और नीचे लाने का कार्य करता हैं। एलेरोन का प्रयोग उड़ते हुए हवाई जहाज की दिशा परिवर्तन के लिए किया जाता है।

सड़क पर चलने वाले वाहनों को जिस दिशा में जाना है उसी दिशा में हैंडल को मोड़ा जाता है लेकिन हवाई जहाज में इसके विपरीत होता है। हवाई जहाज को जिस भी दिशा में जाना होता है उसकी विपरीत दिशा में रडर पर दबाव डाला जाता है।एलेरोन की सहायता से भी यह कार्य किया जाता है जो कि सबसे अधिक सुरक्षित होता है। जब हवाई जहाज को लैंडिंग करना होता है उसके लिए एस्पोइलर का प्रयोग होता है। यह सब से सावधानीपूर्ण कार्य होता है।

तो दोस्तों आप जान चुके हैं की हवाई जहाज का इतिहास क्या हैं, हवाई जहाज कैसे उड़ान भरता (hawai jahaj kaise udta hain) है, हवाई जहाज कैसे उड़ता है, हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया आदि।

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