भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं है?

भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं है:- उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का भव्य और प्राचीन मंदिर बना हुआ हैं. इस मंदिर के कई रहस्य हैं, जो अभी तक अनसुलझे हैं. एक और बात जो हम आपको इस लेख के द्वारा बताने जा रहे हैं की भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं है? जगन्नाथ पूरी मंदिर में तीन मूर्तियाँ हैं जिनमें एक भगवान जगन्नाथ जी की, उनके भाई बलभद्र जी और उनकी बहिन सुभद्रा जी की हैं, लेकिन तीनों ही मूर्तियों के हाथ नहीं हैं.

क्या आप जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं है? अगर नहीं तो इस लेख को पूरा पढ़ें।

भगवान जगन्नाथ जी के हाथ क्यों नहीं है: पढ़ें कहानी

भगवान जगन्नाथ जी की मूर्ति के हाथ नहीं हैं इसके पीछे एक पौराणिक कहानी हैं. यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता हैं लेकिन एकदम सत्य भी हैं की भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहिन सुभद्रा जी की मूर्तियों में किसी के भी हाथ,पैर और पंजे नहीं हैं. प्राचीनकाल में जब विश्वकर्मा इन मूर्तियों का निर्माण कर रहे थे तो उन्होंने एक शर्त रखी जब तक मूर्ति का काम पूरा नहीं हो जाता कोई अंदर नहीं आएगा।

कुछ दिन तक तो मंदिर के अंदर से मूर्ति निर्माण की आवाजें आती रही लेकिन जब आवाज आना बंद हो गई तो राजा को लगा की मूर्ति निर्माण का काम पूरा हो गया होगा। तब कुछ समय का इन्तजार करने के बाद राजा अंदर गए. जैसे ही वो अंदर गए विश्वकर्मा जी ने काम रोक दिया। जब उन्होंने काम रोका उस समय करीब-करीब मूर्तिनिर्माण हो चूका था बस हाथ,पैर और पंजे बनाने बाकि थे.

राजा के प्रवेश के बाद काम जहाँ था वहीँ रोक दिया गया, यही वजह हैं की भगवान जगन्नाथ जी के हाथ नहीं है.

रथ यात्रा

प्रतिवर्ष बड़ी धूम-धाम के साथ जगन्नाथ जी, उनके भाई बलभद्र और बहिन सुभद्रा जी को रथ में बैठाकर पूरी नगर में यात्रा निकाली जाती हैं, यह भगवान के भ्रमण का समय होता हैं. रथ-यात्रा का आयोजन प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता हैं. इस यात्रा में देश भर से लाखों की तादाद में भीड़ आती हैं.

रथ यात्रा के पीछे की कहानी.

भगवान जगन्नाथ मंदिर परिचय

परिचय बिंदु परिचय
मंदिर कहाँ हैं-पुरी (उड़ीसा).
मूर्ति निर्माता-विश्वकर्मा जी.
जगन्नाथ जी-भगवान श्री कृष्ण.
बलभद्र-श्री कृष्ण का भाई (बलराम).
सुभद्रा-श्री कृष्ण की बहिन.

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