Ginnorgarh Fort

गिन्नौरगढ़ का किला (Ginnorgarh Fort )- 800 वर्ष पुराना है इतिहास.

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गिन्नौरगढ का किला (Ginnorgarh Fort) मध्य प्रदेश में स्थित हैं जो कि रायसेन जिले के रातापानी बाघ अभ्यारण में हैं. यह एक बहुत ही सुन्दर पहाड़ी पर यह लगभग 700 मीटर की ऊंचाई पर है.गिन्नौरगढ का किला (Ginnorgarh Fort) पूर्ण रूप से प्राकृतिक हैं जिसमें जलाशय और महल देखने योग्य हैं.

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित Ginnorgarh Fort परमार वंश और गोंड शाह शासन के इतिहास को बयां करता आज भी सीना तान कर खड़ा हैं. यहां पर ना सिर्फ गोंड शासक बल्की मुग़ल और पठानों ने भी सालों तक शासन किया. इस दुर्ग की स्थापत्य कला और शैली बहुत ही आकर्षक है जो ऐतिहासिक स्थानों पर भ्रमण के शौकीन और एडवेंचर में रूचि रखने वालों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं.

इस लेख में हम गिन्नौरगढ़ किला का इतिहास (Ginnorgarh Fort history in hindi), इसका निर्माण और शासनकर्ता के बारे में जानकारी हासिल करेंगे.

गिन्नौरगढ किला इतिहास (Ginnorgarh Fort history in hindi)-

निर्माणकर्ता- महाराज उदयवर्धन.
पुनर्निर्माणकर्ता- निजाम शाह.
निर्माण- 13वीं सदी में. (लगभग 800 वर्ष पूर्व).
अन्तिम शासिका- रानी कमलापति.

विंध्यचल की पहाड़ियों के मध्य स्थित प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण गिन्नौरगढ का किला (Ginnorgarh Fort) इसके स्वर्णिम इतिहास की गवाही दे रहा हैं. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 1975 फीट है. अपनी अद्भुद संरचना के लिए प्रसिद्ध गिन्नौरगढ का किला 3696 फीट लंबा और 874 फीट चौड़ा है. सर्वप्रथम परमार वंश के राजाओं ने इस किले का निर्माण करवाया था लेकिन बाद में निजाम शाह ने Ginnorgarh Fort पुनर्निर्माण किया.

इस किले की दीवार 20 फीट चौड़ा और 82 फीट ऊंची हैं.

आज भी कई लोग यह मानते हैं कि इसका निर्माण निजाम शाह ने किया था जबकि सच्चाई यह है कि निजाम शाह ने पुनर्निर्माण करवाया ना कि निर्माण. इसको नया स्वरूप प्रदान करने के बाद निजाम शाह ने इसको अपनी राजधानी बनाया. अधिक ऊंचाई पर होने के बाद भी यहां पानी की कमी नहीं है.

गिन्नौरगढ का किला (Ginnorgarh Fort) के आसपास पानी प्रचुर मात्रा में होने की मुख्य वजह इसके आसपास स्थित 25 कुएं और छोटी छोटी बावड़ियां है यहां पर 4 पोखर भी बने हुए हैं. गिन्नौरगढ का किला हरे और काले रंग के पत्थरों से बना हुआ हैं, इस पहाड़ी पर इन पत्थरों की प्रचुरता है.

गिन्नौरगढ की भव्यता

गिन्नौरगढ के किले (Ginnorgarh Fort) में सुंदर बावड़ी, इत्रदान और बादल महल नामक भव्य इमारतें हैं. इतिहासकार बताते हैं कि इस किले के नीचे एक गुफ़ा हैं और इसी गुफा में ठंडे पानी का एक जलाशय है जो गर्मी के दिनों में भी ठंडक रहती हैं.

गिन्नौरगढ का किला (Ginnorgarh Fort) को यदि हम तीन भागों में बांटकर देखें तो प्रथम भाग 3 मील दूर तक का हैं जो घेराबंदी के नाम से जाना जाता हैं. दूसरा भाग 2 मील दूर है जहां सदियों पूर्व आबादी क्षेत्र था और तीसरा भाग स्वयं गिन्नौरगढ का किला हैं. इस क़िले मुख्य द्वार के समीप एक बहुत ही भव्य महल बना हुआ हैं जिसे रानी महल के नाम से जाना जाता हैं. ऐसा कहा जाता हैं कि रानी महल का निर्माण निजाम शाह ने उसकी रानियों के लिए बनाया था.

निजाम शाह की मृत्यु के बाद

निज़ाम शाह को उनके भतीजे ने ज़हर देकर मौत के घाट उतार दिया. उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी रानी कमलापति अपने पुत्र के साथ इस किले में रही. 1723 ईस्वी में रानी कमलापति की मृत्यु हो गई. उनकी मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र नवल शाह के हाथ में किले की कमान आ गई. लेकिन निजाम शाह के मित्र मुहम्मद खान ने किले को अपने कब्जे में ले लिया. गिन्नौरगढ का किला (Ginnorgarh Fort) में भोपाल के शासकों की उपस्थिति को प्रमाणित करता एक फारसी शिलालेख 1725-26 में प्राप्त हुआ है.

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दोस्तों उम्मीद करते हैं कि “गिन्नौरगढ का किला” (Ginnorgarh Fort histoy in hindi) पर आधारित यह लेख आपको अच्छा लगा होगा. इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, धन्यवाद.


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