Guru Gobind Singh Quotes In Hindi गुरु गोबिंद सिंह के उपदेश

Last updated on April 29th, 2024 at 07:28 am

गुरु गोबिंद सिंह (Guru Gobind Singh Quotes) सिखों के 10 वें गुरु थे। इनके पिता का नाम तेगबहादुर था। गुरु गोबिंद सिंह महान योद्धा, कवि, आध्यात्मिक नेता भी थे। गुरू गोबिंद सिंह के जीवन से सभी को शिक्षा मिलती हैं। इनके बताए रास्ते पर चलकर व्यक्ति जीवन जीने कि कला के साथ साथ सफ़लता का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता हैं।

पुरा नाम- गुरू गोबिंद सिंह

जन्म तिथि- 22 दिसम्बर 1666.

मृत्यू तिथि- 7 अक्टूबर1708.

Guru Gobind Singh Quotes In Hindi

Guru Gobind Singh Quotes या गुरू गोबिंद सिंह उपदेश थे उनको इस आर्टिकल के माध्यम से हम (Guru Gobind Singh Quotes In Hindi) में पढ़ेंगे।

1 सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज लड़ाऊं, तबैं  गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊ।

2 शांतिपूर्ण जीवन यापन करने के लिए अपने अन्दर के अहंकार का अंत करना पड़ेगा।

3 कोई भी व्यक्ति स्व-स्वार्थ को त्याग कर ही अपने अन्दर शांति और आराम कि अनुभूति कर सकता हैं।

4 सत्कर्म करने वाले को सच्चा गुरु मिलेगा। गुरु की कृपा से ही परमात्मा मिलेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा।

5  तंबाकू और ऐसे नशीले पदार्थों का सेवन कभी नहीं करें, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हो।

6 दिव्यांग व्यक्ति, जरूरतमंद व्यक्ति, परदेश से आए हुए व्यक्ति और दुखी व्यक्तियों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहें।

7 किसी भी इंसान की पीठ पीछे बुराई या निंदा ना करें, ईर्ष्या का भाव त्याग कर कर्म प्रधान बने।

8 दुश्मन को परास्त करने के लिए सबसे पहले साम, दाम, दंड और भेद का सहारा ले। अंत में जब कुछ भी चारा न बचे तब युद्ध को चुने।

9 धर्म, जाति और यौवन को लेकर कभी भी घमंड नहीं करें।

10 छोटे से छोटे काम में भी लापरवाही ना करें, सभी कार्यों को लगन और मेहनत के साथ अंजाम दें।

11 गुरुबाणी (गुरूबानी) को जीवन में उतारे।

12 अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान देकर अपना कर्तव्य निभाए।

14 सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले लोगों को गुरु गोबिंद सिंह का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

15 ईश्वर ने हमें अच्छे कार्य करने और बुराई को खत्म करने के लिए जन्म दिया है।

16 समस्त मानव समाज से प्रेम ही ईश्वर की सच्ची भक्ति मानी जाती है।

17 ईश्वर को प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म करने होंगे और अच्छे कर्म करने वालों की ईश्वर निश्चित मदद करेगा।

18 गुरु गोबिंद सिंह ने कहा था कि जो कोई व्यक्ति मुझे ईश्वर मानता है वह नरक में चला जाए।

19 गुरु गोबिंद सिंह ने कहा था कि मुझे ईश्वर का सेवक मानो और इसमें नाम मात्र का भी संदेह मत करो।

20 खुद की रक्षा करने और शांति स्थापित करने के जब सभी रास्ते बंद हो जाए तो हाथ में तलवार उठाना ही अंतिम विकल्प है।

21 असहाय लोगों पर अत्याचार नहीं करें वरना ईश्वर आपको कभी माफ नहीं करेगा।

22 ईश्वर ने हमेशा अपने अनुयायियों को आराम और शांति दी है,साथ ही मुश्किल घड़ी में उनका सहारा भी बना है।

30 ईश्वर से बड़ा दयालु कोई नहीं।

31 भगवान् को पाने के लिए गुरू ही मार्गदर्शन कर सकता हैं।

32 भगवान के उपदेशों का पाठ करने वाले गुरू के लिए मैं पूरी तरह न्योछावर हूं।

33 स्वार्थ से अशुभ संकल्प पैदा होते हैं।

34 भीतर के स्वार्थ को ख़त्म करने में ही स्थाई शांति और महान सुख की अनुभूति प्राप्त होती हैं।

35 सदैव दूसरों से प्रेम करने वाले लोग ईश्वर की मौजूदगी को महसूस कर सकते हैं।

36 अज्ञानी व्यक्ति में इतना अंधकार होता हैं कि वह किसी के मूल्य को नहीं जान पाता है बस चकाचौंध का बखान करता है।

37 सच्चाई पर विश्वास रखने वाले लोगों के चरणों कि मैं वन्दना करता हूं।

38 जिन गुरुजनों ने हमें ईश्वर का नाम स्मरण करना सिखाया वो कोटि-कोटि प्रणाम करने के योग्य हैं।

39 किसी भी व्यक्ति में स्वार्थवश ही बुरे कर्मों का जन्म होता हैं।

40 भगवान में पुरा यकीन करने वाले लोगों की कदम-कदम पर भगवान् सहायता करते हैं।

41 जुबान पर कुछ और मन में कुछ और रखने वाले व्यक्ति जीवन में अकेले पड़ जाते हैं।

42 अगर हम लोगों के प्रति दया, सहानुभूति और करुणा का भाव रखते हैं और सच्चाई के मार्ग पर निरंतर चलते रहते हैं तो अन्य लोग भी हमारे प्रति प्रेम भाव रखते हैं।

43 आप स्वयं ब्रह्माण्ड के रचनाकार हैं और आप ही ने सुख-दुःख का सृजन किया है।

44 मौत के बाज़ार में, उन्हें बांधकर पीटा जाता हैं और कोई अन्य उनकी प्रार्थना तक नहीं सुनता है।

45 भगवान् स्वयं क्षमाकर्ता हैं।

46 बिना नाम के वास्तविक शांति की कल्पना तक नहीं की का सकती हैं।

47 सेवा करने वाले नानक भगवान् के दास हैं, अपनी कृपा से ईश्वर उनके सम्मान की सुरक्षा करते हैं।

48 अशुभ संकल्प स्वार्थवश पैदा होते हैं।

49 मुझे भगवान कहने वाले नरक में चले जाए।

50 हे ईश्वर मुझे इतनी शक्ति दें कि मैं कभी अच्छे कर्म करने में संकोच ना करू।

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