जीवाजीराव सिंधिया इतिहास (History Of Jivajirao Scindia)

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महाराजा जीवाजीराव सिंधिया सिंधिया राजवंश के अंतिम मराठा शासक थे। महाराजा जीवाजीराव सिंधिया ने मेहमानों के लिए भोजन, मदिरा और चटनी परोसने के लिए ग्वालियर के जय विलास पैलेस में खाने की टेबल पर चांदी की एक टॉय ट्रेन रखी।

पूरा नामजॉर्ज जीवाजी राव सिंधिया
जन्म दिनांक26 जून 1916
मृत्यु दिनांक16 जुलाई 1961
पिता का नाममाधो राव सिंधिया
माता का नामगजराबाई राजे साहिब सिंधिया
पत्नी का नाम विजयाराजे सिंधिया (लेखा दिव्येश्वरी देवी)
संतानेपदमा राजे (पुत्री), उषा राजे (पुत्री), वसुंधरा राजे (पुत्री), यशोधरा राजे (पुत्री), माधवराव सिंधिया (पुत्र).पूर्ववर्ती महाराजा माधो राव सिंधिया
History Of Jivajirao Scindia

जीवाजीराव सिंधिया (Jivajirao Scindia) सिंधिया परिवार का वंशज था, जिसकी स्थापना मराठा जनरल रानोजी राव सिंधिया द्वारा की गई थी। 18वीं शताब्दी के प्रारंभ में मालवा में मराठा सेनाओं के मुखिया के रूप में रानोजी राव सिंधिया थेे। इस समय मराठा साम्राज्य का विस्तार मुगल साम्राज्य की तुलना में अधिक तेज गति से हो रहा था।

दौलत राव सिंधिया ने राजधानी को उज्जैन से लश्कर (Lashkar) स्थानांतरित कर दिया जो कि ऐतिहासिक दुर्ग के पास था। सिंधियाओं ने 1818 ईस्वी में तीसरे आंग्ल मराठा युद्ध में हार के बाद उनसे मिलने वाले लाभों के आधार पर ब्रिटिश सुजेरेंटी को स्वीकार कर लिया। 68291 वर्ग किलोमीटर पर फैला ग्वालियर मध्य भारत का सबसे बड़ा राज्य था, जो कि भारत की सबसे बड़ी 5 रियासतों में शामिल था।

5 जून 1925 को जीवाजीराव सिंधिया (Jivajirao Scindia) महाराजा बन गए। 21 फरवरी 1941 को उन्होंने लेखा दिव्येश्वरि देवी से शादी की जिनको बाद में विजयाराजे सिंधिया के नाम से जाना जाने लगा। लेखा दिव्येश्वरि देवी नेपाल के शक्तिशाली राणा वंश की थी। जीवाजीराव सिंधिया (Jivajirao Scindia) की वंशावली की बात की जाए तो उनके चार बेटियां और एक बेटा के पिता थे। सबसे बड़ी पुत्री का नाम पदमाराजे था जिनकी शादी त्रिपुरा के एचएच महाराजा किरीट देव बर्मन से हुई थी और 1965 में कोलकाता में उनकी मृत्यु हो गई।

दूसरी पुत्री का नाम उषा राजे था जिनका विवाह नेपाल के मंत्री पशुपति शमशेर जंग बहादुर राणा के साथ हुआ था। शमशेर नेपाल के काठमांडू के रहने वाले थे। माधवराव सिंधिया भारत सरकार में पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, संसद सदस्य और ग्वालियर के राजा रह चुके हैं। वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी है। यशोधरा राजे भारतीय जनता पार्टी की नेता है और मध्य प्रदेश में विधायक है।

15 अगस्त 1947 के दिन भारत पूर्ण रूप से ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्त हो गया। 15 अगस्त 1947 खूब भारत की आजादी के कुछ समय बाद तक जीवाजीराव ने ग्वालियर राज्य पर पूर्ण सम्राट और एक ब्रिटिश जागीर के रूप में शासन किया।

भारत के स्वतंत्रता अधिनियम 1947 द्वारा बनाए गए दो प्रभुत्व जिसमें भारत और पाकिस्तान थे में से किसी एक में शामिल होने की बात की गई। जीवाजीराव सिंधिया (Jivajirao Scindia) ने समीपवर्ती रियासतों के शासकों से बात की और उसमें सभी ने निर्णय लिया कि वह एकजुट होकर भारत गणराज्य में शामिल हो गए। 15 जून 1948 के दिन भारत सरकार के साथ शामिल होने के लिए उन्होंने एक पत्र पर हस्ताक्षर किए और हमेशा के लिए स्वतंत्र भारत का हिस्सा बन गए।

28 मई 1948 के दिन जीवाजी राव सिंधिया को मध्य प्रदेश के राज्य प्रमुख या राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने 31 अक्टूबर 1956 तक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है।

महज 45 वर्ष की आयु में 16 जुलाई 1961 में जीवाजीराव सिंधिया (Jivajirao Scindia) ने दम तोड़ दिया।
इनकी मृत्यु के पश्चात इनका परिवार भारतीय राजनीति में सक्रिय रहा। 1962 में उनकी विधवा राजमाता विजयाराजे सिंधिया लोकसभा में निर्वाचित हुए और चुनावी राजनीति में सिंधिया परिवार के कैरियर की शुरुआत हुई।

विजयाराजे सिंधिया प्रारंभ में कांग्रेस पार्टी की सदस्य थी लेकिन 1967 में जनसंघ नामक पार्टी बनी और वह उसमें शामिल हो गई। बाद में जनसंघ भारतीय जनता पार्टी के रूप में बदल गया, जिसकी वह एक बहुत ही प्रभावशाली सदस्य थी।

इनका पुत्र माधवराव सिंधिया 1971 में जनसंघ का प्रतिनिधित्व करते हुए लोकसभा के लिए चुने गए। बाद में सन 1980 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। 2001 में उनकी मृत्यु तक वह कांग्रेस में शामिल रहे। माधवराव के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी के सदस्य रहे और 2002 में उनके पिता की पूर्व सीट पर निर्वाचित हुए।

10 मार्च 2020 को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। जीवाजीराव सिंधिया की बेटी वसुंधरा राजे सिंधिया भी भारतीय राजनीति में एक जाना माना चेहरा है। वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई है और राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी।