महाराणा मोकल का इतिहास || History Of Maharana Mokal

Last updated on June 1st, 2024 at 09:22 am

जब भी मेवाड़ के इतिहास की बात की जाती है, महाराणा मोकल का नाम दृष्टि पटल पर जरूर आता है। राणा मोकल के पिता का नाम राणा लाखा तथा राणा मोकल की माता का नाम रानी हँसाबाई था। अल्पायु में ही इनके पिता का देहांत (1421ईस्वी) हो गया। राणा लाखा की मृत्यु के पश्चात रानी हँसाबाई और उनके भाई राव रणमल ने मेवाड़ के सिहासन को संभाला।

मात्र 12 वर्ष की आयु में राणा मोकल मेवाड़ के राजा बने। राणा चुंडा को महाराणा मोकल का संरक्षक बनाया गया।

राणा मोकल का इतिहास और जीवन परिचय (History Of Maharana Mokal)

  • पूरा नाम- महाराणा मोकल सिंह जी।
  • कहां के शासक थे- मेवाड़।
  • राजधानी – चितौड़गढ़ दुर्ग।
  • जन्मवर्ष- 1397 ईस्वी।
  • मृत्युवर्ष- 1433 ईस्वी।
  • पिता का नाम- राणा लाखा (लक्ष्य सिंह).
  • माता का नाम- हँसाबाई।
  • पत्नि का नाम – आबु की परमार राजकुमारी सौभाग्यदेवी।
  • भाई- राणा चुंडा।
  • मामा – राव रणमल।
  • दरबारी विद्वान – योगेश्वर भट्ट और विष्णु भट्ट।
  • मुख्य शिल्पकार – पन्ना, फना और मना।
  • शासनकाल- 1421-1433 ईस्वी।

महाराणा मोकल को बचपन से ही कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इनके पिता राणा लाखा की मृत्यु के पश्चात इनके मामा राव रणमल और इनकी माता हँसाबाई के सानिध्य में इनका पालन-पोषण हुआ, लेकिन इनके संरक्षक के तौर पर इनके बड़े भाई राणा चुंडा मेवाड़ का कामकाज देख रहे थे।

माता हँसाबाई को ऐसा लगता था कि राणा चुंडा ज्यादा ही हस्तक्षेप कर रहा है, इस वजह से उन्हें यह डर सताने लगा कि आने वाले समय में कहीं राणा चुंडा महाराणा मोकल की हत्या ना कर दे।

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राणा मोकल राजा कैसे बने?

प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार राणा लाखा जब बूढ़े हो गए तब उनके पुत्र के लिए शादी का प्रस्ताव मारवाड़ के राजा रणमल द्वारा भेजा गया। जो कि उनके पुत्र राव चुंडा के लिए था।उस समय दरबार में राणा चुंडा उपस्थित नहीं थे। जब राव चुंडा दरबार में आए तो उनके पिता राणा लाखा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि मेरे जैसे बूढ़े व्यक्ति के लिए इस तरह के रिश्ते की कल्पना नहीं की जा सकती है।

यह बात राणा चुंडा ने सुन ली और उन्होंने कहा कि चाहे मेरे पिता ने यह मजाक में कही लेकिन इस बात को मैं गंभीरता से लेता हूं। मैं इस रिश्ते को अस्वीकार करता हूं। अब राणा लाखा धर्म संकट में फंस चुके थे यदि वह इस रिश्ते को अस्वीकार करते तो राणा रणमल का अपमान होता। उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार करने से पहले राणा चुंडा के सामने एक शर्त रखी।

अगर मैं यह शादी करता हूं तो मेवाड़ का आने वाला राजा इस रानी से उत्पन्न होने वाली संतान होगी। इस शर्त को राणा चुंडा ने हंसते-हंसते मान लिया और वादा किया कि आपकी मृत्यु के पश्चात निश्चित रूप से वही राजा बनेगा जो आप चाहते हैं। मलेछा से होने वाले युद्ध में जाने से पहले राणा लाखा ने अपने 5 वर्षीय पुत्र राणा मोकल को तिलक लगाकर युवराज घोषित कर दिया।

राणा चुंडा मेवाड़ छोड़कर क्यों चले गए?

हँसाबाई को यह बात बिल्कुल भी गले नहीं उतर रही थी कि उनके पुत्र की उपेक्षा कर सभी निर्णय राणा चुंडा द्वारा लिए जा रहे थे। जब यह बात राणा चुंडा के कानों में पड़ी तो उन्हें बहुत बुरा लगा क्योंकि उनके मन में महाराणा मोकल के प्रति कुछ भी गलत भावना नहीं थी।

बहुत कोशिश की गई लेकिन हँसाबाई और राणा चुंडा के बीच गलतफहमी दूर नहीं हुई। इस बात से राणा चुंडा को गहरा धक्का लगा और उन्होंने मेवाड़ छोड़ने का मन बना लिया। आखिर वह दिन आ ही गया जब हँसाबाई के व्यवहार से आहत होकर राणा चुंडा मेवाड़ छोड़कर मांडू (मध्य प्रदेश) चले गए। अब उनकी जिम्मेदारी संभालने का काम उनके भाई राघव देव पर आ गया।

राव रणमल का हस्तक्षेप

राणा चुंडा के चले जाने के पश्चात महाराणा मोकल के मामा राव रणमल के लिए मेवाड़ की राजनीति का रास्ता साफ हो गया। रानी हँसाबाई को अपने भाई का रवैया कुछ अच्छा नहीं लग रहा था।

उसे ऐसा लगने लगा कि आने वाले समय में राव रणमल राणा मोकल को भी अपने रास्ते से हटा सकता है। अब रानी हँसाबाई को अपने किए पर पछतावा हो रहा था, वह चाहती थी कि राणा चुंडा पुनः चित्तौड़ लौट आए।

जब राणा चुंडा को यह सूचना मिली तो वह पुनः लौट आए लेकिन द्वारपालों ने राणा चुंडा को दुर्ग में प्रवेश करने से रोक दिया जहां पर भयंकर युद्ध हुआ और इसी युद्ध में राणा चुंडा की मृत्यु हो गई।

महाराणा मोकल की मृत्यु कैसे हुई?

महाराणा मोकल मेवाड़ राज्य के विस्तार हेतु गुजरात पर आक्रमण करने के लिए निकलते हैं। तभी रास्ते में झीलवाड़ा नामक स्थान आता है। लंबी दूरी तय करके गुजरात के राजनीतिक महत्व के स्थान पर (अहमद शाह के विरुद्ध युद्ध करने) पहुंच रही मेवाड़ी शाही सेना एक विशाल वृक्ष देखकर वहां पर आराम करने लग जाती है।

वहां पर राणा क्षेत्र सिंह की दासी खातून के 2 पुत्र चाचा और मेरा नामक पहले ही मौजुद थे और उन्हें यह जानकारी थी कि महाराणा मोकल यहां विश्राम कर रहे हैं। तभी चाचा और मेरा के सहयोगी मेहपा पंवार के कहने पर पीछे से राणा मोकल के ऊपर हमला कर देते हैं और इस हमले में घायल महाराणा मोकल मौके पर ही दम तोड़ देते हैं।

महाराणा मोकल के कितने पुत्र थे?

महाराणा मोकल के 7 पुत्र थे –

1. महाराणा कुंभा।

2. कुंवर क्षेमकरण।

3. कुंवर शिवा।

4. कुंवर सत्ता।

5. कुमार नाथू सिंह 

6. कुंवर वीरमदेव।

7. कुंवर राजधर।

महाराणा मोकल से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. महाराणा मोकल के पिता राणा लाखा ने बुढ़ापे में शादी इस शर्त पर की उनकी दुसरी पत्नि से होने वाला उनका पुत्र की मेवाड़ का राजा बनेगा। इसी वजह से राणा चुंडा के होते हुए भी महाराणा मोकल को मेवाड़ का राजा बनाया गया।

2. विवाह के 13 माह पश्चात महाराणा लाखा एवं हँसाबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम मोकल था।

3. महाराणा मोकल महाराणा लाखा के आठवें पुत्र थे।

4. 1406-07  में महाराणा लाखा का देहांत हुआ।

5. राणा चुंडा ने अपने छोटे भाई राणा मोकल को मेवाड़ की राजगद्दी पर बिठाकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की थी।

6. महाराणा मोकल की हत्या चाचा वह मेरा द्वारा की गई थी जो कि महाराणा क्षेत्र सिंह की दासी खातून के पुत्र थे।

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