मकर संक्रांति:- मनाने का कारण, इतिहास और 10 महत्त्व.

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मकर संक्रांति मनाने का कारण और महत्त्व:- मकर सक्रांति मुख्य हिंदू त्यौहार है, जो हर साल सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता हैं. मकर सक्रांति का त्योहार ज्यादातर 14 जनवरी को ही मनाया जाता है लेकिन कभी-कभी तिथि के अनुसार इसमें एक आध दिन ऊपर नीचे हो सकता है.

हिंदू शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य दक्षिणायन में होता है तब देवताओं के लिए रात्रि का समय होता है जोकि नकारात्मकता का प्रतीक है. दूसरी ओर जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है तो इसे बहुत शुभ माना जाता है. यही मकर संक्रांति मनाने का मुख्य कारण है.

मकर संक्रांति क्या है? ( What is makar sankranti)

मकर सक्रांति भगवान सूर्य को समर्पित एक हिंदू त्यौहार हैं जो प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है. देश के विभिन्न राज्यों में इसे भिन्न-भिन्न नाम से जाना जाता है. मकर सक्रांति के दिन से ही सर्दी का मौसम जाने की शुरुआत हो जाती है और गर्मी का मौसम आने लगता है.

मकर सक्रांति के दिन भगवान सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश कर जाने की वजह से धीरे-धीरे दिन बड़े होने लगते हैं और रात छोटी होने लगती है. यही मकर संक्रांति हैं.

मकर संक्रांति कब मनाया जाता हैं?

मकर सक्रांति का पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन कभी-कभी तिथि में टूट-भाग होने की वजह से इसमें 1 दिन आगे या पीछे हो सकता है. वर्ष 2022 में मकर सक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया गया था जबकि वर्ष 2023 में यह 14 जनवरी को मनाया गया.

मकर संक्रांति मनाने का कारण क्या हैं?

पौष माह में जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तब मकर सक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के कारण ही इसे मकर सक्रांति नाम से जाना जाता है. हिन्दू धर्म में हर माह को दो भागों कृष्णा पक्ष और शुल्क पक्ष में बांटा जाता हैं ठीक उसी तरह साल को भी दो भागों दक्षिणायन एवं उत्तरायण में बांटा जाता हैं.

मकर संक्रांति मनाने के कारण निम्नलिखित हैं-

[1] मकर संक्रांति मनाने का मुख्य कारण भगवान सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करना है.

[2] इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, यह भी मकर संक्रांति मनाने का एक कारण है.

[3] मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य उनके पुत्र और मकर राशि के स्वामी शनि से मिलने स्वयं जाते हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता हैं.

[4] मकर संक्रांति का दिन (उत्तरायण) देवताओं का दिन होता हैं जो सकारात्मकता का प्रतीक हैं.

[5] मकर संक्रांति मनाने के कारणों में एक यह भी है कि इसी दिन भागीरथ पवित्र गंगा नदी को धरती पर लेकर आए थे.

[6] महाभारत में भीष्म पितामह ने भगवान सूर्यदेव के उत्तरायण में प्रवेश करने के बाद ही अपनी इच्छा से मृत्यु को प्राप्त हुए.

[7] भगवान श्री कृष्ण के अनुसार उत्तरायण के समय में शरीर छोड़ने वाले लोगों का पुनर्जन्म नहीं होता हैं.

[8] मकर संक्रांति का पर्व गुजरात और महाराष्ट्र में बड़ी ही धुमधाम से मनाया जाता हैं.

[9] हिन्दू धर्म के अनुसार मकर संक्रांति के दिन “स्वर्ग के द्वार” खुल जाते हैं. जो दान पुण्य हम करते हैं वह बहुत ही फलदायी माना जाता हैं.

[10] मकर संक्रांति के दिन से ही सर्दी का असर कम होने लगता हैं और दिन धीरे-धीरे बड़ा होने लगता हैं.

[11] इस दिन भगवान शिव ने भगवान विष्णु को आत्मज्ञान का दान दिया था.

मकर संक्रांति पर्व मुख्य हिन्दू त्यौंहार हैं. उपरोक्त कारणों की वजह से ही मकर संक्रांति मनाई जाती हैं.

मकर संक्रांति का महत्त्व

मकर संक्रांति धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों में बहुत महत्त्वपूर्ण है.

[1] मकर संक्रांति को दान पुण्य का दिन माना जाता हैं, इस दिन किया गया दान अन्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य प्रदान करता हैं.

[2] मकर संक्रांति का पर्व भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना का विशेष दिन होता हैं.

[3] मकर संक्रांति के दिन विभिन्न तीर्थ स्थलों और गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है.

[4] मकर संक्रांति को देवताओं का दिन भी माना गया है, ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी देवता धरती पर भ्रमण करने आते हैं.

[5] मकर संक्रांति के दिन तिलों से बने व्यंजनों का विशेष महत्व है. तिलों का सेवन और दान करना इस दिन शुभ माना जाता हैं.

मकर संक्रांति का इतिहास

मकर संक्रांति का इतिहास बहुत प्राचीन है. पौराणिक कथाओं के अनुसार संक्रांति नामक एक देवता थे, उनके नाम पर ही इस त्यौंहार का नाम पड़ा. संक्रांति नामक देवता ने संकरासुर नामक दानव को मौत के घाट उतारा था. मकर संक्रांति का अगला दिन किंक्रांत या कारिदिन के नाम से जाना जाता हैं. यही वह दिन था जब देवी ने किंकारासुर नामक दानव का वध किया था. यह था मकर संक्रांति का इतिहास.

मकर संक्रांति से सम्बन्धित रीति-रिवाज और परंपराएं

भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है. भारत में हर राज्य में अलग-अलग तरह की भाषा बोली जाती है और प्रत्येक त्योहार को मनाने के रीति रिवाज भी अलग अलग है.

पंजाब और हरियाणा में मकर सक्रांति के 1 दिन पूर्व लोहड़ी के रूप में इस त्यौहार को मनाया जाता है त्योहार को मनाए जाने का तरीका यह है कि इस दिन सब लोग शाम के आग पर मुरमुरे फेंकते हैं. साथ ही इस दिन एक दूसरे के लिए समृद्धि, सुख, विकास और स्वास्थ्य की कामना के लिए पूजा की जाती.

मकर सक्रांति के दिन देशभर में आसमान में पतंग उड़ाया जाता है लेकिन इसकी जड़ गुजरात हैं. यूपी में मकर सक्रांति को दान और खिचड़ी का त्यौहार माना जाता है. मकर सक्रांति के अवसर पर उत्तर प्रदेश में गंगा यमुना और सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर एक माह तक माघ मेला का आयोजन किया जाता है. मकर सक्रांति के दिन गोरखपुर के गोरखधाम में खिचड़ी मेले का आयोजन भी होता है.

वही हम बंगाल की बात करें तो इस दिन पवित्र नदियों और जलाशयों में डुबकी लगाई जाती है और तिल का दान किया जाता है. गंगासागर में हर वर्ष बड़े मेले का आयोजन होता है.

तमिलनाडु में मकर सक्रांति से शुरू होकर 4 दिन तक चलने वाले त्योहार को पोंगल के नाम से जाना जाता है. बिहार में मकर सक्रांति के पर्व को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है.

मकर सक्रांति के दिन महाराष्ट्र में अलग ही विविधता देखने को मिलती हैं. इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली मकर सक्रांति पर अन्य सुहागन महिलाओं को तेल, रूई और नमक का दान करना शुभ मानती है.

यही वजह है कि भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है. लेकिन अनेकता में एकता इस देश की मुख्य विशेषता है. मकर सक्रांति को भारत के अलग-अलग भागों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है लेकिन फिर भी एक समानता देखने को मिलती है वह है तिल और तिल के लड्डू.

मकर सक्रांति से संबंधित प्रश्न और उत्तर

(1). मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है वैज्ञानिक कारण बताइए?

उत्तर- मकर संक्रांति मनाए जाने के पीछे वैज्ञानिक कारण यह हैं कि इस दिन भगवान सुर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं जिसके कारण हमारे शरीर पर सुर्य की किरणें पड़ती हैं तो विभिन्न बिमारियों का खात्मा करती हैं.

(2). मकर संक्रांति कहां मनाया जाता है?

उत्तर- मकर संक्रांति सम्पूर्ण भारत और नेपाल में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं. हालाँकि अलग-अलग जगह ऐसे अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं. अब तो मकर संक्रांति को विदेशों में भी जहाँ भारतीय मूल के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं मनाया जाता हैं.

(3). मकर सक्रांति का क्या अर्थ है?

उत्तर- मकर संक्रांति का अर्थ हैं सूर्य का धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश।

(4). मकर संक्रांति कब मनाई जाती है?

उत्तर- मकर संक्रांति प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता हैं लेकिन कभी-कभी यह 15 जनवरी को मनाया जाता हैं जो इस बात पर निर्भर हैं कि सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में कब प्रवेश करता हैं.

(5). मकर संक्रांति किसकी याद में मनाया जाता है?

उत्तर- मकर संक्रांति भगवान सूर्य द्वारा उनके पुत्र शनि से मिलने की याद में भी मनाया जाता हैं.

(6). मकर संक्रांति के दिन किसकी पूजा की जाती हैं?

उत्तर- मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्यदेव की पूजा की जाती हैं.

(7). मकर संक्रांति के दिन किसका भोग लगता हैं?

उत्तर- मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का भोग लगाया जाता हैं.

(8). मकर संक्रांति को महाराष्ट्र में किस नाम से जाना जाता हैं?

उत्तर- महाराष्ट्र में भी इसको मकर संक्रांति के नाम से ही जाना जाता हैं.


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