Naro Shankaraji Gandekar नारो शंकरजी गांडेकर का इतिहास।

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Naro Shankaraji Gandekar (नारो शंकरजी गांडेकर) शंकरजी नारायण गांडेकर( shankaraji Narayan Gendekar) के पुत्र थे। 1707 ईस्वी में इनके पिता कि मृत्यु के पश्चात मराठा साम्राज्य के सचिव पद पर इन्हें आसीन किया गया। यह परिवार कई पीढ़ियों से मराठा साम्राज्य की सेवा करता आ रहा था।

Naro Shankaraji Gandekar का इतिहास और जीवन परिचय-

  • पुरा नाम Full name– श्रीमंत नरो शंकरजी गांडेकर पंत सचिव।
  • अन्य नाम– सचिव नारो शंकरजी गांडेकर या नारो शंकरजी।
  • जन्म Date of Birth– 1684 ईस्वी।
  • जन्म स्थान Birth place– भोर, सतारा (महाराष्ट्र).
  • मृत्यु died-1737 ईस्वी।
  • मृत्यु स्थान death place– भोर, सतारा (महाराष्ट्र).
  • दादा का नाम Grandfather’s Name– नरो मुकुंद।
  • भाई-बहन brothers and sisters– इनके 2 भाई थे जिनका नाम अबाजी शंकरजी (Abaji Shankaraji), लक्ष्मण शंकरजी ( Lakshman Shankaraji) और इनके बहिन नहीं थी।
  • धर्म religion– हिंदू, सनातन।
  • साम्राज्य Empire– मराठा साम्राज्य।

श्रीमंत नरो शंकरजी गांडेकर पंत सचिव (नरो शंकर के नाम से भी जाने जाते हैं) मराठा साम्राज्य के सरदार थे।

अपने पिता की तरह वीर, साहसी, प्रतिभाशाली और युद्ध विद्या में पुरी तरह से निपुर्ण थे। राजकर्या में बेहतरीन अनुभव था क्योंकि इनसे पहले इनके पिता श्रीमंत शंकरजी नारायण मराठा साम्राज्य के सचिव थे, इसलिए बचपन से ही इनमें ये गुण कुटकुट कर भरे हुए थे।

नरो शंकर छत्रपति शाहू प्रथम के शासनकाल में वंशानुगत पंत सचिव (मुख्य सचिव) थे। 1707 में अपने पिता शंकरजी नारायण सचदेव की मृत्यु के बाद, नरो शंकर ने मराठा साम्राज्य की रक्षा में कई लड़ाई लड़कर शाहू का विश्वास जीता था।

मराठा साम्राज्य पर आने वाली कई विपत्तियों का सामना इन्होंने डटकर किया था। इतना ही नहीं छत्रपति शाहूजी महाराज का विश्वास जीतकर इन्होंने सचिव का पद आने वाली कई पीढ़ियों के लिए सुरक्षित कर लिया।

1707 में शाहू ने अपने बेटे के सामने नरो शंकर और वंशानुगत उपाधि पंत सचिव के पद पर शंकरजी नारायण सचदेव की जागीर की पुष्टि करते हुए इन्हें पद सौंपा।

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मराठा साम्राज्य के मुख्य सचिव और सरदार के रूप में इनके पिताजी बहुत विख्यात थे। इतना ही नहीं इनके पिता शंकरजी नारायण गांडेकर भोर रियासत के प्रथम शासक थे।
इनके पिता की मृत्यु के पश्चात इन्हें सचिव पद पर आसीन किया गया क्योंकि इन्होंने अपने शौर्य और चातुर्यता के दम पर छत्रपति साहूजी महाराज का विश्वास जीत लिया था।

Naro Shankaraji Gandekar ने अपने शासनकाल (1707-1737) के दौरान “भोर की रियासत” के दुसरे शासक के रूप में हमेशा याद किया जाता रहेगा।
Naro Shankaraji Gandekar की 1737 ईस्वी में मृत्यु हो गई लेकिन वंशानुगत रूप से सचिव पद इनके परिवार को मिलता रहा।

नरो शंकरजी (Naro Shankaraji Gandekar) के अतुल्य योगदान, मराठा साम्राज्य के विस्तार हेतु अभूतपूर्व योगदान, छत्रपति शाहूजी महाराज की छाया की तरह साथ देने और सचिव पद पर विराजमान होकर इस पद की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले नरो शंकरजी को मराठा साम्राज्य के इतिहास में हमेशा उच्च स्थान प्राप्त रहेगा।

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