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पुष्पक विमान (Pushpak Viman)- सम्पूर्ण इतिहास.

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पुष्पक विमान (Pushpak Viman)- पुष्पक विमान का नाम सुनते ही रावण की याद आ जाती है. रामायण काल में पुष्पक विमान लंकापति रावण के पास था. रावण से पहले यह विमान कुबेर के पास था लेकिन कालांतर में रावण ने पुष्पक विमान कुबेर से छीन लिया. पुष्पक विमान के रचियता विश्वकर्मा थे.

कुबेर रावण के बड़े भाई थे. रावण ने कुबेर से ही स्वर्ण की लंका और पुष्पक विमान छीना था. रावण ने माता सीता का हरण किया और पुष्पक विमान में बैठकर लंका पहुंचा. इतना ही नहीं रावण की मृत्यु के पश्चात भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और विभीषण जी के साथ साथ अन्य साथी पुष्पक विमान में बैठकर लंका से अयोध्या पहुंचे थे.

इस लेख में हम पुष्पक विमान (Pushpak Viman) के संबंध में विस्तृत रूप से जानेंगे.

पुष्पक विमान का इतिहास और निर्माण (Pushpak Viman history)

पुष्पक विमान का इतिहास अति प्राचीन है. इसके निर्माण की तिथि के संबंध में विशेष प्रमाण मौजूद नहीं है. ऋग्वेद में पुष्पक विमान के साथ-साथ 200 से अधिक विमानों का बारे में जानकारी दी गई है. इन विमानों में तीन पहिए वाले विमान, त्रिभुजाकार के विमान और तीन मंजिल वाले विमानों का विशेष उल्लेख मिलता है.

उल्लेखित विमानों में से अधिकतर विमानों का के निर्माण का श्रेय वैज्ञानिक दर्जा प्राप्त, दो सगे जुड़वा भाइयों अश्विनी कुमारों को जाता है. इन विमानों का निर्माण सोना, चांदी और लोहे का प्रयोग कर किया जाता था. प्राचीन समय में केवल पुष्पक विमान ही एकमात्र विमान नहीं था. पुष्पक विमान के अलावा भी उस समय हवाई यात्रा के लिए कई विमान मौजूद थे. हां यह हो सकता है कि सभी का काल अलग-अलग रहा हो.

अग्निहोत्र नामक विमान में दो इंजन का इस्तेमाल होता था, वहीं हस्ति नामक विमान में दो या दो से अधिक इंजनों का प्रयोग होता था. “त्रिताला” नामक विमान में तीन मंजिलें थी तो दुसरी ओर जलयान भी हुआ करते थे जो जल में तैरने के साथ-साथ हवा में भी उड़ते थे. “त्रिताला” नामक विमान की तरह ही “कारा” नामक एक विमान और था जो हवा में उड़ने के साथ-साथ पानी में तैर भी सकता था.

इन विमानों का रंग और डिजाइन इस तरह का होता था कि यह हवा में आसानी के साथ उड़ने के साथ-साथ पानी में आसानी के साथ तैर सके. “त्रिचक्र” नामक एक रथ था जो जमीन पर चलता था और आकाश में उड़ भी सकता था. उस समय संभवतया इन्हें उर्जा वायु और वाष्प से मिलती थी जो इन्हें हवा में उड़ने में मदद करती थी.

समरांगणसूत्रधार नामक ग्रंथ में उपरोक्त वर्णित सभी विमानों के संबंध में ऐतिहासिक और विशिष्ट जानकारी मिलती है. इस ग्रंथ के 225 से भी ज्यादा पदों में विमानों के निर्माण, विमानों की गति, उड़ान की विधि तथा पक्षियों द्वारा होने वाली विभिन्न दुर्घटनाओं के बारे में विस्तृत रूप से लिखा गया है. लेकिन क्योंकि हमारा टॉपिक पुष्पक विमान है इसलिए इस लेख में हम पुष्पक विमान (Pushpak Viman) के बारे में ही चर्चा करेंगे.

पुष्पक विमान किसने बनाया या पुष्पक विमान के रचियता (Pushpak Viman made by)

वाल्मीकि रामायण के अनुसार पुष्पक विमान शिल्पाचार्य विश्वकर्मा ने बनाया था. प्रारंभ में विश्वकर्मा ने पुष्पक विमान का निर्माण ब्रह्मा जी के लिए किया था. देवताओं के सभी विमानों का निर्माण और अस्त्र शस्त्र विश्वकर्मा जी ने ही बनाए थे. पुष्पक विमान के रचियता विश्वकर्मा जी थे.

पुष्पक विमान के प्रारूप और निर्माण विधि का श्रेय महर्षि अंगिरा को जाता है जबकि निर्माण एवं साज-सज्जा विश्वकर्मा के द्वारा की गई थी. पुष्पक विमान के रचियता विश्वकर्मा के पिता का नाम प्रभास तथा माता का नाम योगसिद्ध देवी था.

पुष्पक विमान वास्तव में किसका था?

ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि पुष्पक विमान (Pushpak Viman) रावण का था लेकिन यह सत्य नहीं है, रावण ने भी बलपूर्वक इसे किसी से हासिल किया था.

पुष्पक विमान को भगवान विश्वकर्मा ने ब्रह्मा जी के लिए बनाया था. ब्रह्मा जी ने पुष्पक विमान को कुबेर को भेंट कर दिया. जब इस अद्भुत विमान के बारे में लंकापति को खबर लगी तो उसने ताकत के दम रावण ने पुष्पक विमान कुबेर से छीन लिया. पुष्पक विमान वास्तव में ब्रह्मा जी का था, जो क्रमशः कुबेर जी और लंकापति रावण के पास पहुंच गया. रावण ने पुष्पक विमान कुबेर जी से छीना था.

पुष्पक विमान की डिजाइन या विशेषता (Pushpak Viman design)

पुष्पक विमान की डिजाइन मोर (Peacock) की भांति थी. पुष्पक विमान की डिजाइन इस तरह थी कि इसे आवश्यकतानुसार छोटा या बड़ा किया जा सकता था. पुष्पक विमान अपनी विशिष्ट डिजाइन की वजह से हर तरह के मौसम में उड़ान भरने योग्य था.

इस विमान के अंदर नीलम से बना हुआ एक सिंहासन था जिस पर विशिष्ट व्यक्ति बैठता था. पुष्पक विमान अपनी डिजाइन के कारण ना सिर्फ पृथ्वी पर एक जगह से दूसरी जगह पर जाने में सक्षम था, बल्कि एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर भी Pushpak Viman को आसानी के साथ ले जाया जा सकता था.

पुष्पक विमान (Pushpak Viman) की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है-

1. पुष्पक विमान (Pushpak Viman) का आकार मोर की आकृति जैसा था.

2. पुष्पक विमान मंत्रों द्वारा सिद्ध किया हुआ था.

3. पुष्पक विमान एक लड़ाकू विमान था, जिसके संबंध में जानकारी सुंदरकांड (रामायण) के सातवें अध्याय में मिलती है.

4. पुष्पक विमान वायु और अग्नि की उर्जा से उड़ान भरता था.

5. अपनी विशिष्ट डिजाइन के चलते पुष्पक विमान के आकार को छोटा और बड़ा किया जा सकता था.

6. तरह-तरह के सुंदर पुष्पों से सुसज्जित, दुर्लभ रत्न जड़ित और सोने से बना हुआ पुष्पक विमान देखने में अद्भुत लगता था.

7. पुष्पक विमान के निर्माण में रंग बिरंगे फूलों का प्रयोग किया गया था जिसकी वजह से यह रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित पर्वत की तरह दिखाई पड़ता.

8. उस काल में कई अन्य विमान भी मौजूद थे लेकिन पुष्पक विमान सर्वाधिक सम्माननीय था.

9. विश्वकर्मा द्वारा निर्मित इस विमान में विभिन्न रत्नों से विभिन्न प्रकार के पक्षियों, सांपों एवं घोड़ों की आकृतियां बनाई गई थी.

10. पुष्पक विमान को दिव्य विमान माना जाता है क्योंकि यहां मन की गति से चलने वाला तथा सोचने मात्र से उसी स्थान पर पहुंचने वाला विमान था.

11. माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी लंका पहुंचे तब उन्होंने सबसे पहले Pushpak Viman को देखा था.

12. विश्वकर्मा द्वारा Pushpak Viman का निर्माण करने की वजह से देवताओं के लिए विभिन्न प्रकार विमानों का निर्माण करने की वजह से उन्हें “देवशिल्पी” कहा जाता है.

वाल्मीकि रामायण में वर्णन

वाल्मीकि रामायण में पुष्पक विमान (Pushpak Viman) के संबंध में विशेष जानकारी मिलती है. रामायण के सुंदरकांड के सातवें अध्याय में पुष्पक विमान के संबंध में जो उल्लेख मिलता है वह निम्नलिखित है-

पुष्पक विमान (Pushpak Viman) बादलों के समान ऊंचा, सोने के समान चमकता हुआ ऐसा प्रतीत होता था जैसे जमीन पर सोना बिखरा पड़ा है. पुष्पक विमान कई रत्नों से जड़ीत और रंग-बिरंगे फूलों से भरे हुए पर्वत के समान दिखाई देता था.

जब यह आकाश में उड़ता तो ऐसा लगता जैसे इसे हंस खींच रहे हो. बहुत ही सुंदर तरीके से निर्मित पुष्पक विमान में विभिन्न प्रकार की धातुओं का प्रयोग किया गया था. पुष्पक विमान पर सुंदर सरोवर के चित्र बनाए गए थे. साथ ही विभिन्न रत्नों की चमक से प्रकाश मान यह विमान कहीं भी उड़ सकता था.

पुष्पक विमान (Pushpak Viman) में तरह-तरह के रंगों के सांपों के चित्र और सुन्दर घोड़े के चित्र बनाए गए. इस विमान पर बहुत सुंदर मुख और पंख वाले अनेक चित्र बने हुए थे, जो कामदेव के समान लगते थे. इस पर फूलों और स्वर्णों से निर्मित हाथी के चित्र थे. इस विमान पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा बनी हुई थी, जिनका हाथियों द्वारा अभिषेक हो रहा हैं ऐसा लगता था.

पुष्पक विमान कैसे उड़ता था?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पुष्पक विमान (Pushpak Viman) एक सिद्ध विमान था जो मंत्रोच्चारण के साथ काम करता था, जैसे कि किसी रिमोट द्वारा संचालित हो रहा हो.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह विमान वाष्प और वायु से उर्जा प्राप्त करके उड़ान भरता था. साथ ही इसकी आकृति मोर के सामान की जो हवा को चीरने का काम करती और पुष्पक विमान की उड़ान में सहायक थी. पुष्पक विमान गति के नियम पर उड़ान भरता था. यह आधुनिक विमानों के समान ही था, लेकिन इसका निर्माण और बनावट अद्भुत थी जिसकी कल्पना करना भी आज के समय में संभव नहीं है.

पुष्पक विमान की गति (Pushpak Viman Speed)

पुष्पक विमान की गति के संबंध में आधुनिक मानकों पर आधारित गति से संबंधित प्रमाण नहीं मिलते हैं. पुष्पक विमान की गति की बात की जाए तो यह मन की गति से उड़ता था अर्थात जिस स्थान के बारे में सोचा जाता तब तक यह उस स्थान पर पहुंच जाता.

रामायण काल में पुष्पक विमान अपनी गति की वजह से अधिक चर्चा में था. रावण का वध करने के बाद जब भगवान श्री राम को पुनः अयोध्या लौटना था, तब उनके पास समय बहुत कम था. अगर वह समय पर नहीं पहुंचते तो उनका इंतजार कर रहा भाई भरत अपने प्राण त्याग देता. अतः प्रभु श्री राम ने पुष्पक विमान का सहारा लिया और इसमें बैठकर यथाशीघ्र अयोध्या पहुंच गए.

फतेह सारांश रूप में यह कहा जा सकता हैं कि पुष्पक विमान की गति मन की गति के समान थी.

राम ने पुष्पक विमान कहां भेजा और क्यों?

प्रभु श्री राम ने लंकापति रावण का वध करने के बाद पुष्पक विमान की पूजा की और इसे पुनः कुबेर जी को सौंप दिया.

कुबेर जी ने बड़ी ही विनम्रता के साथ भगवान श्री राम से कहा कि प्रभु आपको अयोध्या पहुंचने में देरी हो रही है, आप इस विमान को अपने साथ ले जाइए. इस प्रकार कुबेर ने पुष्पक विमान को भेंट के रूप में श्री राम को सौंप दिया. राम ने पुष्पक विमान कुबेर जी के पास भेजा था जो पुनः प्रभू राम जी पास लौट आया.

पुष्पक विमान कहां है?

पुष्पक विमान अभी कहां है, इसके संबंध में कोई प्रमाण मौजूद नहीं है. लेकिन हाल ही में अफगानिस्तान में एक 5000 साल पुराना विमान का अवशेष मिला है, जिसके संबंध में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यही रामायणकालीन पुष्पक विमान (Pushpak Viman) हो सकता है.

पुष्पक विमान के संबंध में प्रमाणदोस्तों

प्राचीन भारत के संबंध में रामायण और महाभारत काल पर पूरे विभिन्न अध्ययन और शौधों से पता चला है कि लंका में पुष्पक विमान के अलावा भी कई विमान थे, जो आवागमन में सहायक थे. श्रीलंका में आज भी इन विमानों के आवागमन के स्थानों के संबंध में साक्ष्य मिलते हैं जो निम्नलिखित हैं-

1. वेरागन्टोटा (महीयांगना).

2. थोटूपोला (होटोन प्लेंस).

3. दंडू मोनारा विमान अर्थात् मोर की तरह उड़ने वाला.

4. वारियापोला (मेतेले).

5. गुरुलोपोथा (महीयांगना).

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दोस्तों उम्मीद करते हैं Pushpak Viman history पर आधारित यह लेख आपको अच्छा लगा होगा, धन्यवाद.


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