Top 30 Quotes on maharana pratap महाराणा प्रताप कोट्स जो आपका जीवन बदल देंगे

Last updated on April 19th, 2024 at 09:42 am

महाराणा प्रताप के प्रेरणात्मक कथन (Quotes on maharana pratap in hindi)-

महाराणा प्रताप के प्रेरणात्मक कथन  (Quotes on maharana pratap in hindi) और महाराणा प्रताप के प्रेरणात्मक कथन- व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह से बदल सकते हैं। जो व्यक्ति या मनुष्य महाराणा प्रताप के प्रेरणादायक विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर लेता है, उसका जीवन सफल हो जाता है।

1. “मनुष्य को अपने गौरव और आत्मसम्मान की हमेशा रक्षा करनी चाहिए क्योंकि यह मनुष्य की सबसे बड़ी कमाई होती है। अपने आत्मसम्मान की रक्षा नहीं कर सकने वाले व्यक्ति का जीवन व्यर्थ होता है।”

2. “एक अच्छा व्यक्तित्व वह है जो अपनी मातृभूमि और माता को एक समान मानता है। दोनों में अंतर करने वाले व्यक्ति को मूर्खों की श्रेणी में रखा जाता है।”

3. “आदरहीन व्यक्ति को जिंदा लाश के समान माना गया हैं, इसलिए जहां पर सम्मान ना मिले वहां नहीं जाना चाहिए।”

4. “कर्म ही धर्म है इसलिए निरंतर कर्म करते रहो। यह संसार का नियम है कि जो व्यक्ति कर्म के मार्ग पर लगातार चलता रहता है वह पूजनीय होता है।”

5. “इस संसार में समय से ज्यादा बलवान कोई भी नहीं है। जब महाराणा प्रताप जैसे शूरवीर राजा को घास की रोटी खानी पड़ सकती है, तो आम इंसान क्या चीज हैं।”

6. ‘महाराणा प्रताप ने कहा था कि हल्दीघाटी के युद्ध ने मेरा बहुत कुछ छीन लिया लेकिन आन, बान, शान और गौरव को बढ़ा दिया।”

7. “व्यक्ति का स्वभाव चंचल प्रवृत्ति का होता है। कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो सुख के समय बहुत अधिक प्रसन्न या अति उत्साहित हो जाते हैं। लेकिन जब विपदा आती हैं तो डर के हार मान लेते हैं। ऐसे व्यक्तियों को ना ही सम्मान मिलता है और ना ही इतिहास में जगह मिलती है।”

8. “जिस रास्ते पर आप चल रहे हैं उस पर अडिग रहें। जो व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता है और विपरीत परिस्थितियों में तनिक भी पीछे नहीं हटता है, एक ना एक दिन समय उसको इसका पुरस्कार जरूर देता है।”

9. “बुरा वक्त वह माना जाता है जब कठिन समय में आपके साथ कोई नहीं होता है। इसलिए अच्छे समय में अपने कर्म से इतने विश्वास पात्र बना लो, कि यही लोग बुरे वक्त की छाया तक आप पर नहीं पड़ने दे।”

10. “जो व्यक्ति कठिन, कठोर और विकट परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते हैं ऐसे व्यक्ति हार कर भी जीत जाते हैं।”

11.  “दोस्ती और साथ अच्छे लोगों का होना चाहिए क्योंकि सांप से कितना ही प्रेम रखो और उसको दूध पिलाओ अंततः वह आपको डसेगा ही। क्योंकि यह सांप की प्रवृत्ति होती हैं।”

12. “अगर आपका कोई शत्रु नहीं है तो आप कायर है। क्योंकि जो व्यक्ति सफल और सूर्यवान होते हैं उनके शत्रु जरूर होते हैं।”

13. “एक राजा का पहला और मुख्य कर्तव्य अपने राज्य का गौरव बढ़ाने और सम्मान बचाने का होता है। फिर चाहे परिस्थिति कोई भी हो।”

14. “अधूरा काम कभी नहीं करें। अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ परिश्रम करते रहना चाहिए। कई व्यक्ति जीत के बेहद करीब पहुंच कर प्रयास बंद कर देते हैं और उन्हें हार नसीब होती है।”

15. “राष्ट्र सेवा सर्वोपरि है। इसलिए महाराणा प्रताप ने कहा था कि अपने जीवन को सुख भोग में व्यर्थ ना गवाएं।”

महाराणा प्रताप के प्रेरणात्मक कथन (Quotes on maharana pratap in hindi)

16. “जब तक मनुष्य को अपने जीवन में कठिन समय और कष्टों का सामना नहीं करना पड़ेगा, तब तक वह अपने नाम को इस दुनिया में कभी भी अमर नहीं कर सकता है।”

17. “अपने और अपने परिवार से पहले जो व्यक्ति अपने राष्ट्र के हित में सोचें वही सच्चा व्यक्तित्व माना जाता हैं।”

18. “सुदृढ़, नेक और मजबूत इरादे वाले व्यक्तियों की जीत निश्चित होती है, इन्हें कोई भी पराजित नहीं कर सकता है। महाराणा प्रताप कहते हैं ऐसे व्यक्तियों की सफलता में देर हो सकती है लेकिन अंधेर नहीं।”

19. “विपरीत परिस्थितियां, कठिन समय, कष्ट और विपत्तियां कर्म करने वाले व्यक्तियों के जीवन में ही आती है। यह सभी जीवन को मजबूत और अनुभवी बनाती है। इनसे डरने के बजाय प्रसन्नता पूर्वक इनका सामना किया जाना चाहिए।”

20. “सत्य की हमेशा जीत होती है, परिश्रम करने वाला व्यक्ति सफल जरूर होता है और संतोष ही सुख की अनुभूति देता है। लेकिन जब भी कहीं अन्याय हो तो उसका प्रतिकार जरूर करना चाहिए।”

21. “उन व्यक्तियों के लिए सफलता मिलना बहुत आसान और सरल होता है जो निरंतर अपने लक्ष्य, परिश्रम और आत्मशक्ति पर चिंतन-मनन करते रहते हैं।”

22. “जीवन आत्मसम्मान, मान, मर्यादा और पौरुषवान से ज्यादा कीमती नहीं है। यह सभी गुण हर व्यक्ति में होने चाहिए।”

23. “अपने से बड़े और आदरणीय पुरुषों के सामने झुक कर , पूरे संसार को झुकाया जा सकता है।”

24. “अन्याय और अधर्म का सर्वनाश करना सिर्फ एक राजा का कर्तव्य नहीं है। विश्व के समस्त प्राणी मात्र को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और जड़ मूल समेत इसका नाश किया जाना चाहिए।”

25. “कर्तव्य पथ पर चलने वाले व्यक्ति और विश्व कल्याण के बारे में चिंतन करने वाले व्यक्ति को युगों-युगों तक याद रखा जाता है।”

26. “सीमित साधन होने के बाद भी हार नहीं माननी चाहिए। मनुष्य की हार उसके पास मौजूद साधनों से नहीं बल्कि उसके संकल्प पर निर्भर है। इसलिए कहते हैं मन के हारे हार है और मन के जीते जीत।”

27. “ऊंच-नीच और भेदभाव नहीं करना चाहिए क्योंकि महाराणा प्रताप की सेना में वीर भील समाज के सैनिक थे जिनके दम पर महाराणा प्रताप ने अकबर को धूल चटाई।”

28. “किसी भी परिस्थिति में अपनों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।”

29. “अपनी ताकत और गुणों का बखान नहीं करना चाहिए, जब भी मौका मिले इनका प्रदर्शन करना चाहिए।”

30. “जो काम ताकत नहीं कर सकती वह काम एक अच्छी रणनीति कर सकती है, इसलिए किसी भी काम को करने से पहले अच्छी रणनीति का निर्माण किया जाना जरूरी होता है।”

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