History Of Raghuji Bhosale रघुजी भोंसले का इतिहास

Last updated on April 29th, 2024 at 06:45 am

Raghuji bhosale (Raghoji Bhonsale First) मराठा साम्राज्य में सेनापति थे। छत्रपति शाहूजी महाराज के समय पूर्वी- मध्य भारत में स्थित नागपुर राज्य पर कब्ज़ा कर लिया। इनके बाद अंग्रेजों के आगमन तक इनके उत्तराधिकारियों ने इस पर राज किया।

रघुजी भोंसले (Raghuji Bhosale) इतिहास

  • पूरा नाम Raghuji Bhonsle Full Name– सेना साहिब सुबह रघुजी भोंसले।
  • अन्य नाम Other Name– राघोजी भोंसले, रघुजी भोसले।
  • जन्म तिथि Raghuji Bhonsale Date of Birth– 1695 .
  • मृत्यु तिथि Raghuji Bhonsale Died – 14 फ़रवरी 1755 .
  • पिता का नाम Raghuji Bhosale Father’s name–अज्ञात।
  • माता का नाम Raghuji Bhosale Mother’s name-अज्ञात।
  • संताने Raghuji Bhonsle sons/ raghuji bhosale family tree – जानोंजी भोंसले और मुधोजी भोसले।

नागपुर में वर्षों तक भोंसले वंश का शासन रहा। भोंसले वर्ष के शासकों में प्रथम शासक के रूप में रघुजी भोसले ने राज किया था। मराठी ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले Raghuji bhosale छत्रपति शाहूजी महाराज के संबंधी भी थे। रघुजी बहुत ही तेज-तर्रार मराठी सेनापति थे। रघुजी भोसले ने मराठा साम्राज्य के विस्तार के लिए काम किया, साथ ही अपनी महत्वकांक्षी को पूरी करने के लिए उन्होंने पड़ोसी राज्यों के राजनीतिक संकट का फायदा उठाया। उनकी सेना ने 2 बार बंगाल पर आक्रमण किया साथ ही कटक को अपने कब्जे में लिया।

1745 से लेकर 1755 के मध्य में उन्होंने चांदा, संबलपुर और छत्तीसगढ़ पर कब्ज़ा कर लिया। कर्नाटक युद्ध में एक सफ़ल अभियान के बाद मराठों ने बंगाल को अपने साम्राज्य में मिलान के लिए बड़े स्तर पर एक अभियान की शुरुआत की।

इसका मुखिया रघुजी भोंसले (Raghuji bhosale) को बनाया गया। 1727 ईस्वी में मुर्शीद खान कि मौत के बाद पूरे क्षेत्र में अराजकता फ़ैल गई और यही समय था मराठों के लिए जिसमें उन्होंने बंगाल को अपने साम्राज्य में मिला लिया।

Battle of Damalcherry

दोस्त अली खान ने चंदा साहिब को तिरुशिवपुरम के राजा के ख़िलाफ़ मार्च करने का आदेश दिया। 1740 ईस्वी में Damalcherry की लड़ाई हुई जो कि मुग़ल साम्राज्य के नवाब दोस्त अली खान और मराठा साम्राज्य के नायक Raghuji bhosale के बीच लड़ा गया।

रघुजी भोंसले ने इस युद्ध में अद्वितीय साहस और शक्ति का परिचय देते हुए मुग़ल सेनापति दोस्त अली खान , उनके पुत्र और कई साथियों को मौत के घाट उतार दिया गया। इस युद्ध के परिणाम स्वरुप कर्नाटक में लगातार 3 वर्षों तक मराठों का राज रहा।

Raghuji bhosale Nagpur Kingdom

नागपुर गोंडवाना साम्राज्य की राजधानी था, जिस पर देवगढ़ के गोंड राजा का शासन था। नागपुर की स्थापना 1702 ईस्वी में छिंदवाड़ा जिले के देवगढ़ के गोंड राजा बख्त बुलंद शाह ने की थी। “बख्त बुलंद शाह” की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राजा चंद सुल्तान देवगढ़ की गद्दी पर बैठा। 1706 ईस्वी में चंद सुल्तान देवगढ़ छोड़कर राजधानी नागपुर में चला गया और वही बस गया।

1739 ईस्वी में गोंड के राजा “चंद सुल्तान” की मृत्यु हो गई। गोंड की मृत्यु के बाद नागपुर साम्राज्य में उत्तराधिकारी को लेकर घमासान पैदा हो गया। राजा गोंड की विधवा पत्नी ने इस विवाद को सुलझाने के लिए रघुजी भोसले (Raghuji bhosale) से सहायता मांगी। इस समय सेनापति रघुजी भोसले मराठों की ओर से बरार पर राज कर रहे थे।

रघुजी भोसले ने सूझबूझ दिखाते हुए और मामले में मध्यस्थता करते हुए उन्होंने राजा गोंड के दो पुत्रों को सिंहासन पर बिठाया। इन दोनों पुत्रों को पहले राज्य से निकाल दिया गया था जो बरार में रह रहे थे। लेकिन 1746 ईस्वी में फिर से दोनों भाइयों में झगड़ा शुरू हो गया। बड़े भाई ने फिर से रघुजी भोंसले को इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा, बड़े भाई का साथ देते हुए Raghuji bhosale ने इस विद्रोह को दबा दिया।

ऐसी स्थिति में रघुजी भोसले की महत्वकांक्षी जागी और उन्होंने नागपुर साम्राज्य को अपने कब्जे में लेने का ठान लिया।”गोंड के राजा बुरहान शान” को उन्होंने सिर्फ राजनीतिक कठपुतली बनाकर रख दिया और संपूर्ण नागपुर साम्राज्य को अपने कब्जे में ले लिया।

रघुजी भोसले की मृत्यु कैसे हुई (how Raghuji bhosale died)

14 फरवरी 1755 के दिन नागपुर के सम्राट रघु जी भोसले का निधन हो गया। रघु जी भोसले की मृत्यु के बाद उनका पुत्र “जानोंजी भोंसले” नागपुर का सम्राट बना।

26 जनवरी 1774 में Raghuji bhosale के दोनों पुत्रों जानोंजी भोंसले और मुधोजी भोंसले के बीच युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में जानोंजी भोंसले को मुधोजी भोसले ने मौत के घाट उतार दिया। मुधोजी भोसले ने उनके पुत्र “रघुजी द्वितीय” को नागपुर के सिंहासन पर बिठाया।

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