राजा दशरथ की कहानी कथा और जीवन परिचय

Last updated on June 15th, 2023 at 09:06 am

राजा दशरथ की कहानी, कथा, जीवन परिचय- राजा दशरथ की कहानी (Raja Dashrath Story In Hindi) की शुरुआत अयोध्या से होती हैं. इक्ष्वाकु वंश में जन्म लेने वाले राजा दशरथ प्रजाप्रिय,न्यायप्रिय और अपने वचनों के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित थे.

राजा दशरथ की कथा के अनुसार वो एक आदर्श महाराजा और पुत्रों को अतिप्रेम करने वाले राजा के रूप में विश्व विख्यात हुए. राजा को जब पुत्र प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होंने अश्वमेध यज्ञ और पुत्रकामेष्ठि यज्ञ करवाया, जिसके परिणाम स्वरूप उनके 4 पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ था.

राजा दशरथ का जीवन एक समर्पित राजा के रूप में रहा, यह समर्पण चाहे पत्नियों के लिए हो, पुत्रों के लिए हो या आम प्रजा के लिए हो. ऐसे महान क्षत्रिय राजा दशरथ का जीवन परिचय इस लेख में पढ़ेंगे.

राजा दशरथ की कहानी कथा और जीवन परिचय

राजा दशरथ की कहानी कथा और जीवन परिचय (Raja Dashrath Story-Katha-Biography) प्रेम,करुणा और वचन के प्रति कठोर थे. दशरथ का जीवन परिचय और कथा पिता-पुत्र के प्रेम की मिशाल के तौर पर देखा जाता हैं.

परिचय बिंदुपरिचय
राजा दशरथ का असली नामनेमी (बचपन का नाम).
पिता का नामअज.
माता का नामइंदुमती.
भाईराजा दशरथ का कोई भाई नही था.
पत्नियाँकौशल्या, कैकेई और सुमित्रा (मुख्य).
पुत्र-पुत्रीश्रीराम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघन (पुत्र), शांता (पुत्री).
वंशइक्ष्वाकु वंश.
(Raja Dashrath Story-Katha-Biography)

इक्ष्वाकु वंश में जन्में दशरथ अयोध्या के राजा थे. प्रजा के बिच राजा दशरथ बहुत प्रिय थे. उनके राज्य में प्रजा बहुत खुश थी, चारों तरफ हरे-भरे खेत और खुशहाल जीवन था. धर्म-कर्म, दान-पुण्य, यज्ञ-हवन इनके राज्य में निरन्तर चलता रहता था. देवता भी राजा दशरथ से सहायता लेते थे.

इनको स्वयंभुव मनु का अवतार माना जाता हैं. अपने पिछले जन्म में कठोर तपस्या करके इन्होंने भगवान् राम को अपने पुत्र स्वरुप प्राप्त करने का वरदान पाया था. इनकी सेना बहुत विशाल थी, जनता को पुत्रों की भाँति प्रेम करते थे, सभी वेदों के ज्ञाता थे और परम सत्यवादी होने के साथ-साथ कठोर तपस्वी भी थे.

सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन राजा दशरथ के कोई पुत्र नहीं होने की वजह से वह बहुत चिंतित रहते थे.

राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति कैसे हुई?

राजा की तीन पत्नियाँ थी कौशल्या, सुमित्रा और कैकई लेकिन पुत्र की लालसा से राजा दशरथ बहुत चिंतित और परेशान रहने लगे. तीनों पत्नियों से एक भी बच्चा भी बच्चा नहीं था. उन्होंने अपनी परेशानी का कारण गुरु वशिष्ठ को बताया। गुरु वशिष्ठ ने राजा को एक उपाय बताया जिसके अनुसार ऋष्यश्रृंग को बुलाया गया, जिनके सानिध्य में अयोध्या में पुत्रेष्टि का आयोजन किया. यह राजा दशरथ की कहानी का अहम् पहलु हैं.

इस यज्ञ से प्रसन्न होकर “यज्ञ-पुरुष” प्रकट हुए और उन्होंने खीर से भरा हुआ एक प्याला राजा दशरथ के हाथ में थमाते हुए बोले यह खीर आप अपनी रानियों को खिला देना, निश्चित आपको पुत्र प्राप्ति होगी. यह आशीर्वाद पाकर राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने यह खीर अपनी तीनों रानियों कौशल्या, सुमित्रा और कैकई को खिला दी.

भगवान की कृपा से कुछ समय बाद माता कौशल्या के गर्भ से भगवान् श्रीराम का जन्म हुआ. माता कैकई के गर्भ से भरत जी का जन्म हुआ और माता सुमित्रा ने लक्ष्मण एवं शत्रुघन को जन्म दिया। चार पुत्र पाकर राजा दशरथ बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अयोध्या में बहुत बड़े उत्सव का आयोजन करवाया.

चारों पुत्रों का लालन-पालन बहुत प्यार से हुआ. राजा दशरथ को अपने सभी पुत्रों से विशेष प्रेम था लेकिन श्रीराम जी को वो एक पल के लिए भी अपनी आँखों से ओझल नहीं होने देना चाहते थे. जब विश्वामित्र जी यज्ञ  करवाने के लिए राम-लक्ष्मण को लेने आये तो बड़ी मुश्किल से राजा अपने पुत्रों को उनके साथ भेजा.

राजा दशरथ दयालु और कर्तव्यनिष्ठ थे. घर में एक साथ चार-चार पुत्रों के आने से राजा बहुत खुश रहने लगे थे. पुरे महल में दिन भर चहल-पहल रहने लगी.

राजा दशरथ की वृद्धावस्था और श्रीराम को राजा बनाने की चाह

धीरे-धीरे समय निकल रहा था राजा दशरथ पर उम्र हावी हो रही थी. वहीं दूसरी तरफ राजा अपने लाड़ले और बड़े बेटे को श्रीराम जी को अयोध्या का राज्य सौंपने की सोचने लगे. मन ही मन खुश राजा दशरथ ने यह बात अपनी रानियों को बताई.

जब मंथरा को इस बात की खबर लगी तो उसने कैकई को उकसाया और कहा कि महाराज को सिर्फ श्रीराम से प्रेम हैं. यही समय हैं जब आप अपने बेटे भरत को राज्य सिंहासन पर बैठा सकती हो. यहाँ से राजा दशरथ की कहानी में ट्विस्ट आता हैं.

मंथरा ने कैकई को बताया कि पूर्व में महाराज से आपके दो वचन या वरदान बाकि हैं, एक में आप अपने बेटे को राजगद्दी पर बैठाने का वर मांग लो जबकि दूसरे में श्रीराम को 14 वर्ष वनवास भेजने का.

रानी कैकई ने ऐसा ही किया और वह राजा दशरथ के पास गई और बोली हे राजन! पूर्व में आपसे मेरे दो वरदान बाकि हैं उनकी कामना करने के लिए मैं आपके पास आई हूँ. राजा दशरथ ने खुश होते हुए कहा बोलो क्या वरदान चाहिए?

रानी कैकई ने पहले वरदान में अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या कि राजगद्दी माँगी जबकि दूसरे वरदान के रूप में श्रीराम को 14 वर्ष तक वनवास भेजने का वर मांग लिया। यह शब्द सुनते ही अयोध्या नरेश राजा दशरथ के पैरों तले जमीन ख़िसक गई. उनके मुहँ से तो कोई शब्द नहीं निकला लेकिन लगातार आँशु बह रहे थे.

अपने वचन के अनुसार ना चाहते हुए भी राजा दशरथ जी ने कैकई को दोनों वरदान दे दिए. राजा की तीसरी पत्नी कैकई की हठधर्मिता के कारण ही भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास काटना पड़ा.

श्रीराम का वनवास

अपनी तीसरी पत्नी कैकई को दोनों वचन देने के बाद राजा दशरथ को गहरा आघात लगा और वो बहुत उदास हो गए. जब श्रीराम जी को अपने पिता की उदासी का पता चला तो वह उनके पास गए और कारण जाना। निरन्तर बहते आंशुओं के बिच राजा ने श्रीरामजी को पूरी बात बताई।

भगवान् श्रीराम ने हँसते हुए अपने पिता से कहा , हे पिताश्री इतनी छोटी सी बात पर आप इतने उदास और दुःखी हो गए. मैं वनवास जाने के लिए तैयार हूँ. तभी वहाँ कैकई पुत्र भरत भी पहुँच जाता हैं और फूटफूट कर रोने लगता हैं कि हे पिताश्री मैं भैया श्रीराम के होते हुए इस गद्दी पर कदाभि नहीं बैठ सकता हूँ.

लेकिन श्री राम जी भरत को समझाते हैं कि पिताश्री के वचन को पूरा करने के लिए यह जरुरी हैं. भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास चले जाते हैं.

राजा दशरथ का देवलोक गमन

अयोध्या नरेश राजा दशरथ को अपने बड़े बेटे भगवान श्रीराम से विशेष प्रेम था. जब राजा के वचनों के अनुसार श्रीराम जी वनवास चले गए तब राजा पुत्र वियोग में लगातार आँशु बहाते रहे. राजा दशरथ की कहानी पढ़ने से ज्ञात  होता हैं कि पुत्र के प्रति प्रेम की अद्भुद मिशाल राजा दशरथ का इतिहास में नाम अमर हो गया और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए. राजा दशरथ की कहानी आज के समय में भी पिता-पुत्र के प्रेम की मिशाल हैं.

राजा दशरथ से सम्बंधित बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न-उत्तर

[1] राजा दशरथ की आयु कितनी थी?

उत्तर- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रीराम जी के जन्म के समय राजा दशरथ की आयु साठ हजार साल थी.

[2] राजा दशरथ किसके अवतार थे?

उत्तर- राजा दशरथ पूर्व जन्म में स्वयंभु मनु थे अतः दशरथ को मनु का अवतार माना जाता हैं.

[3] राजा दशरथ के कितने विवाह हुए थे?

उत्तर- राजा दशरथ के 3 विवाह हुए थे. उनका विवाह कौशल्या जी , सुमित्रा जी और कैकई जी के साथ हुआ था.

[4] राजा दशरथ के कितने पुत्र थे?

उत्तर- राजा दशरथ के चार पुत्र थे. जिनका नाम भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन था.

[5] राजा दशरथ की ससुराल कहाँ थी?

उत्तर- राजा दशरथ का ससुराल तीन अलग-अलग जगह पर था. राजा दशरथ का पहला विवाह मगध में हुआ था. मगध की राजकुमारी कौशल्या उनकी पहली पत्नी थी. अतः राजा दशरथ का पहला ससुराल मगध था. राजा दशरथ का दूसरा ससुराल कैकई देश था क्योंकि उन्होंने वहां की राजकुमारी कैकई से विवाह किया था. राजा दशरथ का तीसरा ससुराल काशी था, उन्होंने काशी की राजकुमारी सुमित्रा से विवाह किया था.

[6] राजा दशरथ के कितनी पत्नियाँ थी?

उत्तर- राजा दशरथ के तीन पत्नियाँ थी जिनका नाम कौशल्या, कैकई और सुमित्रा था.

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