Rani Ki Bavdi, रानी की बावड़ी का रहस्य।

Spread the love

22 जून 2014 को विश्व धरोहर में शामिल तथा भारतीय गवर्नमेंट द्वारा इस सीढ़ीनुमा Rani Ki Bavdi के फोटो  को आर. बी. आई. द्वारा 100 रुपये के नोट पर भी छापा गया था। यह लगभग 900 साल पुरानी हैं। यह बहुत ही रहस्यमयी हैं।

Rani Ki Bavdi / रानी की वाव कहाँ स्थित हैं (Rani ki bawadi kahan hai)-

Rani Ki Bavdi को रानी की वाव नाम से भी जाना जाता हैं। यह गुजरात के पाटन में स्थित है। इसका निर्माण

आज से लगभग 900 वर्ष पूर्व रानी उदयामति ने 1063 ईस्वी में करवाया था। रानी उदयामति सोलंकी राजवंश के राजा भीमसिंह की पत्नी थी। साथ ही रानी उदयामति के पिता का नाम खेंगार जो कि जूनागढ़ (चुड़ासमा ) के राजा थे।

Rani Ki Bavdi की विशेषता की बात की जाए तो 7 मंजिला होने के साथ ही यह 70 मीटर गहरी हैं। 64 मीटर लम्बाई के साथ ही यह 20 मीटर चौड़ी भी हैं।

इसकी दीवारों और खम्भों (स्तम्भ ) पर सुन्दर और आकर्षक नक्काशी देखने को मिलती हैं। इस बावड़ी की कलाकृतियों या मूर्तियों की बात की जाए तो यह भगवान विष्णु का ज्यादा महिमा मंडन किया गया हैं।

भगवान के जिन रूपों को इसमें दर्शया गया हैं उनमें प्रभु श्रीराम ,वामन अवतार ,नरसिम्हा ,कल्कि अवतार और महिषासुरमर्दिनि आदि हैं।

अगर Rani Ki Bavdi की शैली की बात की जाए तो यह मारु -गुर्जर वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना हैं।

इसके बारे में कहा जाता है की यह लगभग 700 सालों तक सरस्वती नदी की गोद में दबी हुए थी लेकिन भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसका पता लगाया। वर्तमान समय में यह बहुत बड़ा पर्यटन स्थल हैं।

Rani Ki Bavdi सीढ़ीनुमा बनी हुए है साथ ही इसके अंदर एक गेट बना हुआ हैं। इस गेट के अंदर से होकर 30 किलोमीटर लम्बी सुरंग निकलती हैं जो रानी की बावड़ी पाटन से लेकर सिद्धपुर पाटन में खुलती हैं। हालाँकि अभी यह सुरंग बंद पड़ी हैं।

इसके अंदर कचरा और कीचड़ होने की सम्भावना हैं।

पुराने समय में राजा महाराजा अपने महल और महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरंग का निर्माण अवश्य करते थे जिससे की दुश्मनों से बचने और संकट के समय खुद को सुरक्षित रख सके।

रानी की बावड़ी के बारे में रोचक तथ्य, Facts About Rani Ki Bavdi-

1. रानी की वाव या बावड़ी दुनिया की एकमात्र बावड़ी हैं जिसको अपनी बनावट और वास्तुकला की वजह से विश्व धरोहर में शामिल किया गया हैं।

2. रानी उदयामति ने इसका निर्माण अपने पति भीमसिंह की स्मृति में करवाया था। इसको रानी और राजा के प्रेम की निशानी माना जाता हैं। 

3. यह सरस्वती नदी के तट पर स्थित हैं। कई सालों से यह मलबे में दबी हुए थी लेकिन 1980 के दशक में भारतीय पुरतत्व विभाग ने इसको पुनः ढूंढा और साफ सफाई करवाई थी। 

4. 22 जून 2014 को इसको विश्व धरोहर में शामिल किया गया था। 

5. इस बावड़ी से भगवान श्री गणेश और ब्रह्मा की मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं। 

6. क्लीनेस्ट आइकोनिक प्लेस पुरस्कार से 2016 में दिल्ली में हुई इंडियन सेनिटेशन कॉन्फ्रेंस इसको नवाजा गया था। 

7. इस बावड़ी  चौथा तल सबसे गहरा हैं।

8. इस बावड़ी में पहले सीढ़यों की कतारों की संख्या 7 थी जबकि अब मात्र 5 रह गई हैं। 

9. यह लगभग 900 साल पुरानी हैं।

10. यह मारु – गुर्जर वस्तुकलां पर बनी हुई हैं।

यह भी पढ़ें :- चेतक घोड़ें ने महाराणा प्रताप की रक्षा कैसे की थी


Spread the love

1 thought on “Rani Ki Bavdi, रानी की बावड़ी का रहस्य।”

  1. Pingback: Asotra Brahma Temple विश्व का दूसरा ब्रह्मा मंदिर। - हिस्ट्री IN हिंदी

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *