संभाजी शाहजी भोंसले (Shanbhaji Shahaji Bhonsale) का इतिहास।

संभाजी शाहजी भोंसले का इतिहास और जीवनी (Shanbhaji Shahaji Bhonsale History In Hindi-

  • पूरा नाम Full Nane Of Shanbhaji Shahaji Bhonsale – संभाजी शाहजी राजे भोंसले।
  • जन्म- 1623 ईस्वी।
  • मृत्यु- 1658 ईस्वी।
  • माता का नाम- जीजाबाई भोंसले।
  • पिता का नाम- शाहजी राजे भोंसले।
  • भाई बहन- छत्रपति शिवाजी महाराज।

छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को सब लोग जानते हैं लेकिन उनके बड़े भाई संभाजी शाहजी भोंसले (Shanbhaji Shahaji Bhonsale) के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

इसकी मुख्य वजह यह है की बचपन से ही संभाजी अपने पिता शाहजी राजे भोंसले के साथ रहे और उनके कामकाज में हाथ बढ़ाया था।

महाराष्ट्र में रुकना इनका बहुत कम होता था। यह महाराष्ट्र के बाहर ज्यादातर अपने पिता के सहयोग हेतु रहते थे।

बड़े भाई होने के नाते छत्रपति शिवाजी महाराज को इनसे बहुत प्रेम था और यही वजह थी कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने पहले पुत्र का नाम भी संभाजी रखा था।

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इस तरह अपने बेटे का नामकरण बड़े भाई के नाम पर रखना भाई के प्रति छत्रपति शिवाजी महाराज का असीम प्रेम और स्नेह को दर्शाता है।

कम उम्र में Shanbhaji Shahaji Bhonsale मृत्यु हो जाने की वजह से इतिहासकारों ने संभाजी के इतिहास को बढ़ा चढ़ाकर नहीं दिखाया और इन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दी, लेकिन यह इसके हकदार थे।

पूरा महाराष्ट्र और मराठा समुदाय इस वीर और तेजस्वी राजकुमार से ज्यादा परिचित नहीं है।

इसकी मुख्य वजह इन्होंने अपना ज्यादातर समय कर्नाटक में अपने पिताजी के साथ बिताना रहा।

शाहजी राजे भोसले के दरबार में एक बहुत बड़े कवि थे इनका नाम “जयराम पिंडिये” था।

 "राधामाधव विलासचम्पू" नामक ग्रंथ जो कि जयराम द्वारा लिखा गया था, इस ग्रंथ में संभाजी राजे भोंसले का जिक्र युवराज संभाजी राजे भोंसले के रूप में किया गया है।

इतना ही नहीं अगर यह महाराष्ट्र में ही रहते तो आज पूरा इतिहास अलग होता और मराठा साम्राज्य के शासक भी संभाजी राजे भोंसले होते।

1658 ईस्वी में कनकगिरी का युद्ध हुआ इस युद्ध में आदिल शाह ने संभाजी शाहजी भोंसले (Shanbhaji Shahaji Bhonsale) को सहायता के लिए आश्वासन दिया लेकिन बाद में वह पलट गया।

सहायता नहीं मिल पाने की वजह से इस युद्ध में  यह वीर योद्धा संभाजी शाहजी भोंसले “कनकगिरी के युद्ध” में अपनी जान गवा बैठे थे।

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