छत्रपति शिवाजी द्वितीय (Shivaji II) का इतिहास

Last updated on April 29th, 2024 at 07:39 am

शिवाजी द्वितीय (Shivaji II) मात्र 4 वर्ष की आयु में मराठा साम्राज्य के चौथे छत्रपति बने। इनका कार्यकाल सन 1700 ई. लेकर 1707 ई. तक रहा।

मराठा शिवाजी द्वितीय (Shivaji II) का जीवन परिचय

  • पूरा नाम Full Name– छत्रपति शिवाजी भोंसले द्वितीय (शिवाजी राजाराम भोंसले).
  • जन्मतिथि Shivaji II date of birth– 6 जून 1696.
  • जन्म स्थान Shivaji II birth place– जिंजी।
  • मृत्यु तिथि Shivaji II Died– 14 मार्च 1726.
  • मृत्यु स्थान death place– रायगढ़ फोर्ट।
  • मृत्यु के समय आयु age– 29 वर्ष 10 माह।
  • मृत्यू की वजह– चेचक रोग।
  • पत्नी का नाम Shivaji II wife’s name– अज्ञात।
  • बच्चे children– राजाराम II.
  • राज्याभिषेक– 1700 ई.
  • शासन अवधि– 1700 से 1707.
  • इनसे पूर्ववर्ती छत्रपतिराजाराम प्रथम
  • साम्राज्य– मराठा साम्राज्य।
  • धर्म Religion– Hindu Sanatan हिंदू सनातन।

राजाराम प्रथम की मृत्यु के समय मराठा साम्राज्य पर घोर संकट छाया हुआ था। छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य के सपने को साकार करने और मराठा साम्राज्य के संरक्षण के लिए खुद रानी ताराबाई आगे आई। 1700 ई. में शिवाजी द्वितीय मराठा साम्राज्य के छत्रपति बने। इस समय इनकी आयु मात्र 4 वर्ष थी इसलिए इनकी माता ताराबाई इनकी संरक्षक बनी।

मराठा साम्राज्य के राजा या संरक्षक बनना ख़तरे से कम नहीं था क्योंकि इस समय मुग़ल बादशाह औरंगजेब हावी था। शिवाजी द्वितीय (Shivaji II) की संरक्षिका बनकर रानी ताराबाई ने 7 वर्षों तक मुगलों का डटकर मुकाबला किया। रानी ताराबाई की अगुवाई में मराठी सेना ने सिंहगढ़, पुरंदर और पेड़गांव जैसे महत्त्वपूर्ण गढ़ों को जीत लिया और मुगलों को दांतों तले चने चबा दिए।

1700 से 1707 तक ताराबाई मुगलों का सामना करती रही लेकिन ना किसी की हार हुई ना किसी की जीत। हालांकि विशाल मुग़ल सेना के सामने मराठे हमेशा ही बीस रहे। औरंगज़ब की मृत्यु के पश्चात बहादुर शाह प्रथम मुग़ल बादशाह बने।

बहादुर शाह प्रथम ने सत्ता संभालते ही शाहूजी महाराज को कैद से मुक्त कर दिया। 1707 ई. में शिवाजी द्वितीय को छत्रपति शाहूजी महाराज ( छत्रपति शाहूजी महाराज जो कि 17 वर्षों तक मुगलों की कैद में थे) ने चुनौती दी कि “छत्रपति” पद के लिए वह हकदार हैं।

रानी ताराबाई महत्वकांक्षी शाहू महाराज को रास्ते से हटाना चाहती थी, जबकि शाहूजी महाराज छत्रपति बनना चाहते थे। ऐसी परिस्थितियों में मराठों में आपसी संघर्ष की संभावना बढ़ गई। रानी ताराबाई ने धनाजी जाधव के नेतृत्व में सेना की एक टुकड़ी शाहूजी महाराज के ख़िलाफ़ भेजी।

दूसरी ओर शाहूजी महाराज ने भी नारोराम को धनाजी जाधव को रोकने और बातचीत का तरीका निकालने के लिए भेजा। धनाजी जाधव अपनी टुकड़ी के साथ शाहूजी महाराज की तरफ़ मिल गए। शाहूजी महाराज की सेना में इन्हें सेनापति बनाया गया।

शिवाजी द्वितीय की गिरफ्तारी

शाहूजी महाराज को शिवाजी द्वितीय (Shivaji II) की माता ताराबाई ने कोल्हापुर की अदालत में चुनौती दी। लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। शाहूजी ने रानी ताराबाई और शिवाजी द्वितीय को गिरफ्तार कर लिया।

शिवाजी द्वितीय की मृत्यु (shivaji ii death)

शिवाजी द्वितीय 1710 से लेकर 1714 तक कोल्हापुर के राजा रहे। यहां पर भी इनकी सौतेली मां राजबाई ने इनको राजा के पद से हटा दिया। शिवाजी द्वितीय लंबे समय से चेचक नामक रोग से ग्रस्त थे। इसी बीमारी के चलते 14 मार्च 1726 में शिवाजी द्वितीय की मृत्यु हो गई।

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