सिंह शब्द का इतिहास- जानें सिंह शब्द की उत्पति कैसे हुई?

सिंह शब्द का इतिहास जानने से पहले जानते हैं इसका अर्थ। सिंह शब्द का अर्थ होता हैं शेर के समान। सिंह शब्द संस्कृत का शब्द हैं। सिंह शब्द का इतिहास देखा जाए तो सिंह शब्द उत्पति 2500 साल पहले हुई है। आज के समय में कई जाती और समुदाय सिंह शब्द को अपने नाम के पीछे लगाने लगे हैं।

यह शब्द कई जातियों के लिए मध्य नाम के रूप में प्रयोग किया जाता हैं जबकि कुछ जातियों में सरनेम के रूप में प्रयोग होता हैं। लेकिन यह जानना जरूरी है कि क्या वाकई में यह जातिवाचक शब्द हैं? इतिहास में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता जिससे यह साबित हो सके कि यह जाति विशेष या जातिवचक शब्द हो।

हां, यह बात अलग हैं कि कुछ जातियों ने इसे अपनी पहचान बना ली है। अब इस लेख के माध्यम से आप जान पायेंगे कि सिंह शब्द की उत्पति कैसे हुई? और सिंह शब्द का इतिहास क्या रहा?

सिंह शब्द का इतिहास
सिंह शब्द का इतिहास

पहली बार “सिंह शब्द” का प्रयोग कहां मिला?

भगवान बुद्ध का नाम आप सबने ने सुना है। उनका पुरा नाम गौतम बुद्ध शाक्यसिंह था। इनके पिता का नाम शुद्धोदन था जो कि शाक्यवंशी थे। उस समय उन्हें शाक्यवंशी कहा जाता था, क्योंकि वो क्षत्रियों में सर्वश्रेष्ठ थे। सिंह शब्द का इतिहास उठाकर देखा जाए तो यह श्रेष्ठ और शक्तिशाली व्यक्तित्व का पूरक माना जाता हैं। गौतम बुद्ध  श्रेष्ठ थे तो उनके नाम के पीछे सिंह शब्द लिखा गया। धीरे धीरे इस शब्द का प्रयोग बढ़ता ही गया।

इसके अलावा कुछ शब्द ऐसे भी हैं जो सिंह शब्द के समानार्थी माने जाते हैं। जिनमें शार्दुल, क्षत्रिय और पुंगव आदि।
ईसा से 57 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रम के नवरत्नों में शामिल “अमरसिंह” के नाम के पीछे सिंह शब्द देखने को मिला था।

मेवाड़ में सिंह शब्द का इतिहास

धीरे धीरे सिंह शब्द को क्षत्रिय राजपूत वंशों ने अपनाना शुरू कर दिया 11वी शताब्दी में इसका प्रसार मेवाड़ में भी बहुत तेजी के साथ बढ़ा। मेवाड़ का गुहिल वंश जो कि बाद में सिसोदिया वंश के नाम से जाना जाने लगा ने भी अपने नाम के पीछे सिंह शब्द को जोड़ना शुरू कर दिया।

अरीसिंह, विजय सिंह और बैरीसिंह जैसे मेवाड़ी शासकों के नाम के अंत में सिंह शब्द लिखा जाने लगा था। धीरे धीरे सिंह शब्द का अर्थ बहादूर हो गया।

सिख समुदाय में सिंह शब्द का इतिहास और प्रचलन

सिख समुदाय में सिंह शब्द का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है।आपने सिख समुदाय के 10 वें गुरु गोविंदसिंह का नाम सुना होगा। उन्होंने अपने नाम के पीछे सिंह शब्द का उपयोग किया। साथ ही अपने समुदाय के लोगों के लिए इसको अनिवार्य कर दिया।

आज प्रत्येक सिख के नाम के पीछे सिंह शब्द का प्रयोग किया जाता हैं। सिख सम्प्रदाय से संबंधित चाहे कोई भी जाति क्यों ना हो इसका प्रयोग करते हैं जैसे राजपूत, कलाल और हरिजन भी। सिंह शब्द जातिवाचक नहीं हैं।

समय के साथ बदलता गया “सिंह शब्द का इतिहास”

समय के साथ-साथ सिंह शब्द का अर्थ और प्रयोग करने की वजह बदलते गए। जैसा कि अभी आपने ऊपर पढा, भगवान बुद्ध के समय में सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग हुआ था या फिर यह कहें कि बुद्ध के समय सिंह शब्द की उत्पति हुई थी, उसके बाद सातवीं शताब्दी तक अर्थात गुप्त कालीन युग तक सिंह शब्द को एक उपाधि के तौर पर माना जाता था।

सातवीं शताब्दी से लेकर दसवी शताब्दी तक सिंह शब्द  लुप्त हो गया था। अर्थात् भारत के इतिहास में ज्यादा प्रमाण नहीं मिले।
10वीं शताब्दी से लेकर 15वीं शताब्दी तक इस शब्द का प्रयोग वीरता और शौर्यता के रूप में होता रहा हैं। अर्थात् जो राजा तेज, वीर और युद्ध कला में निपुण थे उनके नाम के पीछे सिंह शब्द लगाया जाता रहा हैं।

15 वीं शताब्दी के बाद सिंह शब्द पर क्षत्रिय राजपूत समाज ने एकाधिकार कर लिया और सिंह शब्द को नाम के पीछे उपयोग करने वाले को ही राजपूत समझा जाने लगा। इस तरह धीरे-धीरे एक उपाधि से शुरू हुआ यह शब्द जातिसूचक बनकर रह गया। 
अगर बात वर्तमान की हो तो आजकल हर जाति समुदाय अपने नाम के पीछे सिंह शब्द का प्रयोग करने लग गए है। चाहे वह ब्राह्मण, यादव, चौधरी और राजपूत सब लोग इसको नाम के पीछे सरनेम की तरह उपयोग कर रहे हैं।

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इस तरह आपने सिंह शब्द की उत्पति से लेकर सिंह शब्द का इतिहास तक पढ़ा कि कैसे एक उपाधि से शुरू हुआ यह शब्द आज सरनेम के रूप में प्रयोग किया जाने लगा हैं।