तराइन का मैदान कहाँ स्थित हैं ? तराइन का दूसरा युद्ध कब और क्यों हुआ,जानें परिणाम।

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तराइन के दूसरे युद्ध (तराइन का दूसरा युद्ध) को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि इस युद्ध में मोहम्मद गोरी की जीत हुई जबकि पृथ्वीराज रासो के अनुसार मोहम्मद गोरी पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर गजनी ले गया जहां पर पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को मार दिया।

तराइन का मैदान कहाँ स्थित हैं ?

तराइन का मैदान हरियाणा में स्थित हैं,जहाँ तराइन का दूसरा युद्ध और प्रथम युद्ध हुआ था। तराइन का मैदान हरियाणा के करनाल और सोमेश्वर (कुरुक्षेत्र ) के बिच में स्थित हैं। यह युद्ध क्षेत्र दिल्ली की उत्तर दिशा में 113 किलोमीटर दूर हैं।

तराइन दूसरा युद्ध कब और किसके बिच हुआ हुआ ?

तराइन का दूसरा युद्ध पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बिच हुआ था।

तराइन के दूसरे युद्ध के कारण

  • तराइन के प्रथम युद्ध में हुई हार का बदला लेने के लिए मोहम्मद गौरी आतुर था यही वजह थी की तराइन का दूसरा युद्ध लड़ा गया।
  • राजा जयचन्द की पृथ्वीराज चौहान से नाराजगी।
  • पृथ्वीराज चौहान की राज्य विस्तार की लालसा।
  • मोहम्मद गौरी की महत्वकांक्षा।
  • पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की शादी से नाराज राजपूत राजा।

तराइन का दूसरा युद्ध और परिणाम

तराइन का दूसरा युद्ध जोकि 1192 ईस्वी में लड़ा गया था। इस युद्ध के पीछे मुख्य कारण पृथ्वीराज चौहान से बदला लेना था। इसके लिए मोहम्मद गोरी ने अपनी सेना का पुनर्गठन किया और पूरी तैयारी के साथ युद्ध मैदान में आया।

दूसरी तरफ पृथ्वीराज चौहान के साथ गद्दारी हुई। राजा जयचंद जो कि अब तक भर्ती राज चौहान के साथ थे उन्होंने तराइन के दूसरे युद्ध में मोहम्मद गोरी का साथ दिया। इसकी मुख्य वजह उनकी बेटी संयोगिता थी, जो उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर पृथ्वीराज चौहान के साथ शादी की।

जब राजा जयचंद को यह बात पता चली कि मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज चौहान से अपनी पराजय का बदला लेना चाहते हैं, तो उन्हें अपने मन की मुराद मिल गई। उन्होंने मोहम्मद गोरी का साथ पाकर पृथ्वीराज चौहान को कुचलने की योजना बनाई क्योंकि अकेले वह पृथ्वीराज चौहान का सामना नहीं कर सकते थे।

जब पृथ्वीराज चौहान को इस बात की खबर मिली कि मोहम्मद गोरी बदला लेने के लिए आतुर है, तो इस बात से पृथ्वीराज चौहान को कोई फर्क नहीं पड़ा। लेकिन सबसे बड़ी बात देखने को मिली वह यह थी कि संयोगिता का हरण करने की वजह से बहुत से राजपूत राजा पृथ्वीराज चौहान का साथ नहीं दे रहे थे। 1192 ईस्वी का वह भीषण युद्ध जिसे इतिहास के पन्नों से कभी नहीं मिटाया जा सकता। एक ऐसा युद्ध जिसमें अपने ही अपनों के खिलाफ खड़े थे।

तराइन का दूसरा युद्ध प्रारंभ हुआ , तराइन के मैदान में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी की सेनाएं आमने-सामने थी। पृथ्वीराज चौहान की कल्पना के विपरीत मोहम्मद गोरी बहुत ही सुसंगठित सेना के साथ ही युद्ध मैदान में आया , दूसरा उसे राजा जयचंद का साथ मिल गया।

पृथ्वीराज चौहान की सेना में 3,00,000 सैनिक शामिल थे। जबकि मोहम्मद गोरी की सेना में 1,20,000 सैनिक थे लेकिन कहते हैं कि घुड़सवार जोकि तीरंदाजी में माहिर थे, वह मोहम्मद गौरी की सेना में अधिक थे। दूसरी तरफ उन्हें राजा जयचंद का साथ मिल गया और उनकी पूरी सेना मोहम्मद गौरी की तरफ से लड़ रही थी। इसी वजह से पृथ्वीराज चौहान की सेना का आक्रमण थोड़ा कमजोर हो गया और उन्हें इस युद्ध में हार का सामना करना पड़ा।

राजा जयचंद की बात की जाए तो इसी गद्दारी की वजह से उन्हें इतिहास में एक गद्दार के तौर पर याद किया जाता है। राजा जयचंद का साथ पाकर मोहम्मद गोरी और अधिक मजबूत हो गया। इस भीषण युद्ध में दोनों तरफ से बहुत मार काट हुई। अंततः पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया गया। मोहम्मद गौरी के अधीन उसे अजमेर का राजा बनाया लेकिन कुछ समय बाद ही मोहम्मद गोरी ने विद्रोह कर दिया, जिसके बाद मोहम्मद गोरी ने उन्हें बंदी बनाया और गजनी ले गए।

पृथ्वीराज रासो के अनुसार एक कैदी के रूप में पृथ्वीराज चौहान को जब गजनी ले जाया गया। तब वहां जाकर उनकी दोनों आंखें फोड़ दी और तरह-तरह की यातनाएं दी गई जो कि बहुत ही अमानवीय थी। तराइन का दूसरा युद्ध हमेशा गद्दारी और धोखे के लिए याद किया जाता हैं।

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