त्रिम्बक राव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) का इतिहास।

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त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) मराठा साम्राज्य की सेना में जनरल थे। इनका इतिहास भी बहुत यादगार हैं, लेकिन इनको इनके माता-पिता ( उमाबाई दाभाड़े और खंडेराव दाभाड़े) की वजह से पहचान और नाम मिला।

त्रिंबकराव दाभाड़े कौन था? (Trimbak Rao Dabhade history in Hindi)-

पूरा नाम full name –  त्रिंबकराव दाभाड़े या Trimbak Rao Dabhade.

जन्म स्थान birth place – अभोन, नासिक महाराष्ट्र ( Abhone, Nasik)

मृत्यु तिथि death – 1 अप्रैल 1731.

मृत्यू स्थान – दभोई.

पिता का नाम Fathers nameखंडेराव दाभाड़े.

माता का नाम Mothers nameउमाबाई दाभाड़े.

पद – जनरल (सेनापति).

दाभाड़े परिवार का गुजरात में एक बहुत बड़ा कबीला था, इसी कबीले से निकले कई वीर और आक्रामक योद्धाओं ने मराठा साम्राज्य के लिए बहुत काम किया।

चाहे मराठा साम्राज्य के छत्रपति हो या फिर मराठा साम्राज्य के पेशवा इन दोनों ही महत्वपूर्ण पदों के संरक्षक के रूप में दाभाड़े परिवार ने हमेशा ही अद्वितीय योगदान दिया। इसी वजह से दाभाडे परिवार का नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) के माता और पिता दोनों ही मराठा साम्राज्य के सरसेनापति पद पर कार्यरत रहे। त्रिंबकराव दाभाड़े की माता उमाबाई दाभाड़े पहली ऐसी महिला थी, जिन्हें मराठा साम्राज्य में सेनापति बनाया गया।

त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) के पिता खंडेराव दाभाड़े ( khanderao Dabhade) ने एक कबीले के रूप में अपनी छोटी सी सेना के साथ मराठा साम्राज्य के लिए चौथ और सरदेशमुखी कर वसूल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

साथ ही कई क्षेत्रों पर अधिकार जमाने और आक्रमण करने के लिए मराठा साम्राज्य से इन्हें विशेषाधिकार प्राप्त हुए। 1729 ईस्वी में खंडेराव दाभाडे की मृत्यु हो गई यहां मराठा साम्राज्य के साथ-साथ त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) के लिए भी विशेष क्षति थी।

अल्पायु की वजह से त्रिंबक राव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) पूरी तरह से अपनी माता उमाबाई दाभाड़े पर आश्रित था। जिस परिवार में त्रिंबक राव दाभाड़े का पालन पोषण हुआ उनका इतिहास बयां करने की जरूरत नहीं है। यह बचपन से ही सौभाग्यशाली, वीर, साहसी, दूरदर्शी और एक आक्रामक व्यक्तित्व के रूप में प्रसिद्ध थे।

वीरता और आक्रामकता की वजह से त्रिंबक राव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) कम उम्र में ही मराठा साम्राज्य के बड़े पदों पर आसीन लोगों के मन में जगह बना चुके थे। गुजरात के क्षेत्र में मराठा साम्राज्य का मुख्य कार्य था कर वसूली करना। जिसमें छापा मारना, चौथ वसूली और सरदेशमुखी कर वसूल करना मुख्य था।

इन महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दाभाडे परिवार ने अद्वितीय योगदान दिया जो इतिहास के पन्नों में हमेशा अमिट रहेगा। Trimbakrao Dabhade से संबंधित जानकारी बहुत कम मौजूद है लेकिन इस आर्टिकल के माध्यम से आप तक अधिकतम जानकारी पहुंचाने की कोशिश की गई है।

जब 1729 ईस्वी में त्रिंबक राव दाभाडे को मराठा साम्राज्य में एक महत्वपूर्ण पद सौंपा गया, तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार किया और शपथ ली की मैं तन मन और धन से अपने माता पिता के समान मराठा साम्राज्य की सेवा करूंगा। इन्होंने मात्र 2 वर्ष तक जनरल के पद पर कार्य किया था। अगर इनके कार्यकाल की बात की जाए तो 1729 ईस्वी से लेकर  1731 ईस्वी तक रहा।

मराठा साम्राज्य के लिए कार्य –

जब छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा बाजीराव प्रथम ने गुजरात से कर वसूली की योजना बनाई तो दाभाड़े परिवार मराठों के खिलाफ़ हो गए।

जब तक आंशिक रूप से अपना हिस्सा ले रहे थे तब तक ठीक था लेकिन जैसे ही धन की कमी देखते हुए मराठों ने गुजरात से प्राप्त कर पर पूर्ण एकाधिकार की बात की तो त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) इनके खिलाफ हो गए।

त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) की मृत्यु –

1अप्रैल 1731 का दिन था, बाजीराव प्रथम ने त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) पर हमला कर दिया और दभोई के युद्ध में (Battle of Dabhoi) में उनकी मृत्यू हो गई।

Battle of Dabhoi बाजीराव प्रथम और त्रिंबकराव दाभाड़े (Trimbak Rao Dabhade) के बीच लड़ा गया था। अपने पुत्र की मृत्यु का बदला लेने ले लिए उमाबाई दाभाड़े आगे आई थी।

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