Vishva ki sabse krur Saja

व्लाद- दी इंपेलर (Vlad- The Impaler)- (Vishva ki sabse krur Saja)- रोमानिया का वो राजा जो देता था “विश्व की सबसे क्रूर सज़ा”.

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  Vishva ki sabse krur Saja रोमानिया के शासक व्लाद विश्व इतिहास में एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके द्वारा दी जाने वाली सज़ा आज भी विश्व की सबसे क्रूर सजा में शामिल हैं। जब आप इसके बारे में जानेंगे तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। व्लाद को इंपेलर भी कहा जाता हैं जिसका अर्थ होता हैं धकेलना या बल के साथ आगे बढ़ना। व्लाद एक ऐसे ही राजा थे (Vishva ki sabse krur Saja) जो अपने दुश्मनों को सजा देने के तरीके से विश्व इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने में कामयाब रहे।

व्लाद- दी इंपेलर (Vlad- The Impaler)- (Vishva ki sabse krur Saja)- रोमानिया का वो राजा जो देता था "विश्व की सबसे क्रूर सज़ा".
राजा व्लाद

विश्व की सबसे क्रूर राजा व्लाद- दी इंपेलर (Vishva ki sabse krur Saja)

व्लाद के पिता और बड़े भाई को तुर्कियों ने घर के गद्दारों के साथ मिलकर मार डाला। मृत्यु के बाद रोमानिया में अस्थिरता फैल गई। विपरीत राजनैतिक परिस्थितियां, गृह युद्ध जैसी परिस्थितियां और साथ ही तुर्कियों द्वारा बार बार आक्रमण से यहां के लोग परेशान थे।

व्लाद और उनके छोटे भाई को भी जेल में बंद कर दिया गया और तरह-तरह की यातनाएं दी गई। व्लाद का छोटा भाई यह सब सहन नहीं कर सका और इस्लाम को अपना लिया। लेकीन ज़िद्दी स्वभाव के व्लाद टस से मस ना हुए। एक दिन मौका पाकर व्लाद जेल से भाग निकले। जेल से बाहर आने के बाद व्लाद (Vishva ki sabse krur Saja) गुप्त रुप से युद्धकलां सीखते रहे।

व्लाद ने सन 1448 ईस्वी में रोमानिया के राजा बनने के साथ ही अपने दुश्मनों की तलाश शुरु कर दी क्योंकि तुर्कीयों ने इनके पिता को मार डाला था।
धीरे-धीरे व्लाद ने तुर्कियों से रोमानिया को मुक्त करवा दिया। अपने ज़िद्दीपन और यातनाओं को सहन करते करते व्लाद खुद बहुत क्रूर स्वभाव के व्यक्ती बन गए।

विश्व की सबसे क्रूर सजा (Vishva ki sabse krur Saja)

व्लाद को तुर्की बिलकुल भी पसंद नहीं थे। एक बार की बात है तुर्क शासक के राजदूत व्लाद से मिलने रोमानिया आए, उन्होंने पगड़ी पहन रखी थी। यह पहनावा व्लाद को अच्छा नहीं लगा, तत्काल ही उन्हें पगड़ी उतारने का आदेश दिया।

तुर्की दूतों ने यह कहकर पगड़ी उतारने से मना कर दिया कि यह हमारी संस्कृति और धार्मिक परम्परा है। इस तरह का तर्क व्लाद को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। व्लाद ने कहा कि अब आपके सर पर पगड़ी हमेशा रहेगी। व्लाद ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि इनके सर पर कीलें ठोंकी (Vishva ki sabse krur Saja) जाए।

व्लाद द्वारा दी जाने वाली सजा में अपने दुश्मनों को कड़ाही में उबलते हुए तेल में डालकर तड़पा तड़पा कर मौत के घाट उतार देना भी शामिल था।

व्लाद द्वारा दी जाने वाली सज़ा में शामिल यह तरीका भी बहुत बहुत क्रूर (Vishva ki sabse krur Saja) है। जिस इलाके में व्लाद के ज्यादा दुश्मन होते थे वहां के कुएं में विष मिला दिया जाता था ताकि उनके दुश्मन पानी पीते ही मर जाएं।

एक बार की बात है व्लाद की रणनीति के अनुसार कुछ सैनिक तुर्की सेना का भेष धारण करके तुर्की सेना पर आक्रमण कर दिया। तुर्कियों को कुछ समझ नहीं आया। कौन अपने, कौन दुश्मन यह पता लगाना मुश्किल हो। इसका नतीजा यह हुआ कि तुर्की की सेना आपस में लड़कर हजारों की तादाद में अपने सैनिक खो दिए।

व्लाद- दी इंपेलर की सबसे पसंदीदा सजा- (Vishva ki sabse krur Saja)

लकड़ी के स्तम्भ से शरीर को भेदना व्लाद द्वारा दी जाने वाली सबसे क्रूर (Vishva ki sabse krur Saja) सजा मानी जाती हैं,साथ ही यह उनकी सबसे पसंदीदा सजा भी थी। इसके अनुसार स्तम्भ को नुकीला किया जाता था। इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता था कि स्तम्भ का नुकीला शिरा शरीर के आंतरिक अंगों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकें जिससे कि व्यक्ती तड़प-तड़प कर मरे।

इस तरह दी जाने वाली सजा में व्यक्ति कुछ घंटों तक तड़पता था, जिससे राजा व्लाद को खुशी होती थी क्योंकि उसके परिवारजनों को भी इसी तरह मौत के घाट उतारा गया था। व्लाद का यह क्रूर रुप उस समय और भी उग्र हो जाता जब सामने गद्दार होते। एक बार की घटना है राजा व्लाद ने अपने सभी दुश्मनों को एक भोज में आमंत्रित किया, दुश्मनों के साथ साथ इस भोज में वह लोग भी शामिल थे जो भविष्य में खतरा पैदा कर सकते थे।

भोज पर आए सभी लोगों को राजा व्लाद ने नुकीले स्तंभों पर टांक दिया, कुछ ही समय पश्चात सभी लोगों की मृत्यु हो गई जिसे देखकर राजा व्लाद को बहुत खुशी हुई। इस तरह की कठोरतम सजा से रोमानिया का राजा आम जनता में भी यह संदेश पहुंचाता था कि जो भी राजा के खिलाफ जाएगा उसे इसी तरह की सजा दी जाएगी।

एक युद्ध में तुर्की सेना के 25000 सैनिकों को पराजित करने के पश्चात उन्हें नुकीले स्तंभों से सजा दी गई इस सजा में जीवित और अमृत दोनों तरह की सैनिक शामिल थे।

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