वीर सावरकर की माफी का सच जानने से पहले आपको बता दें कि वीर सावरकर एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे.

सावरकर ऐसे महान देशभक्त थे जिन्होंने भारत माता की स्तुति में 6000 कविताएँ जेल की दीवारों पर लिख दी थी

वीर सावरकर एक ऐसे क्रांतिवीर हुए हैं जिनकों अंग्रेजी हुकूमत ने 50 साल की कठोर काला पानी की सजा सुनाई

और अंडमान निकोबार की जेल में डाल दिया।

वीर सावरकर एक बात हमेशा कहते थे “माता भूमि पुत्रो अहम् पृथिव्याः” जिसका अर्थ हैं

“यह भारत भूमि ही मेरी माता हैं और मैं इसका पुत्र हूँ”. ऐसी सोच रखने वाले महापुरुषों के लिए मातृभूमि से बड़ा कोई नहीं हो सकता हैं.

वीर सावरकर ने एक किताब लिखी थी जिसका नाम था “1857 का स्वातंत्र्य समर”

लेकिन इस किताब को अंग्रेजों ने पब्लिश नहीं होने दिया और प्रतिबन्ध लगा दिया गया.

वीर सावरकर की माफी का सच 

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