प्राचीन भारतीय इतिहास में राजा पोरस (पुरूवास) का नाम एक ऐसे पराक्रमी शासक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने 326 ईसा पूर्व में यूनानी सम्राट सिकंदर महान की सेना को झेलम नदी (Hydaspes) के तट पर आगे बढ़ने से रोक दिया था।
यूनानी इतिहासकार एरियन (Arrian) और प्लूटार्क (Plutarch) के ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, पोरस का साम्राज्य उत्तर-पश्चिम भारत में झेलम और चेनाब नदी के बीच समृद्ध क्षेत्र में स्थित था।
इतिहास की अधिकांश आधी-अधूरी किताबों में सिकंदर के अभियानों का वर्णन तो विस्तृत रूप से किया गया है, लेकिन राजा पोरस का इतिहास और उनकी सैन्य रणनीति को वह स्थान नहीं दिया गया। पोरस की गज-सेना और अद्वितीय साहस ने सिकंदर को भारत से वापस लौटने पर मजबूर कर दिया था।
इस लेख में पुरातात्विक साक्ष्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरवा वंश की पृष्ठभूमि और पोरस सिकंदर युद्ध के पूरे सच को गहराई से जानते हैं।
राजा पोरस का जीवन परिचय
| विवरण | परिचय |
| नाम | राजा पोरस या पुरूवास (Raja Porus) |
| पिता का नाम | राजा बमनी |
| माता का नाम | अनसूया |
| राज्य | पुरूवास |
| शासनकाल | 340 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व |
| उपलब्धि | दुनियाँ जीतने वाले सिकंदर को हराया |
यूनानी आक्रांता अलेक्जेंडर (सिकंदर महान) पूरे विश्व को जीतने के इरादे से भारत की ओर बढ़ा था, लेकिन झेलम नदी के तट पर राजा पोरस (पुरूवास) के साथ हुए ऐतिहासिक आमने-सामने ने उसके भारत विजय के सपनों को चकनाचूर कर दिया।
यूनानी इतिहासकारों (एरियन और प्लूटार्क) के विवरणों से भी स्पष्ट होता है कि पोरस की विशाल गज-सेना और साहसी रणनीतियों के सामने सिकंदर की प्रशिक्षित सेना पूरी तरह से बैकपुट पर आ गई थी।
राजा पोरस का इतिहास इस बात का ऐतिहासिक प्रमाण है कि, विश्व विजेता कहे जाने वाले सिकंदर का भारतीय उपमहाद्वीप में वर्चस्व केवल पश्चिम ग्रंथों तक ही सीमित था।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सिकंदर महान था या उसको महान बनाया गया? इस सवाल का जवाब भी आपको इस लेख में आगे मिल जाएगा।
पोरस कौन था? राजा पोरस का इतिहास
340 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व. के बिच राजा पोरस पुरूवास का राजा था. पोरस के माता-पिता का नाम राजा बमनी और अनसूया था. इनका शासन क्षेत्र पंजाब की झेलम नदी से चेनाब नदी के आस-पास का क्षेत्र था. राजा पोरस और सिकंदर की लड़ाई हुई थी जिसमें इन्होंने सिकंदर को पराजित किया.
इस सन्दर्भ में एक सिक्का प्राप्त हुआ हैं जिसमें राजा पोरस हाथी के पीछे बांधकर सिकंदर को घसीटते हुए ले जा रहे है.
राजा पोरस की वंशावली
राजा पोरस पोरवा वंश के शासक थे. राजा पोरस की वंशावली की बात की जाए तो चंद्रवंशी राजा ययाति के पुत्र पुरु के वंशज पुरु, पौर, पौरवंशी, इस वंश के राजा मतिनार सूर्यवंशी सम्राट मान्धाता के नाना थे, महाराजा पुरु से एक शाखा कुरु वंश की चली, इनसे चन्द्रवंश की अन्य शाखाएँ भी चली, एक शाखा अब तक पुरु या पौरव वंशी कहलाती हैं.
पोरस और सिकंदर का युद्ध
सिकंदर दुनियाँ में कोहराम मचा रहा था उस पर दुनियाँ जीतने की धुन सवार थी. अपनी जीत का परचम फहराने के उद्देश्य से जब सिकंदर ने भारत में प्रवेश किया तो सबसे पहले उसका सामना पोरवा वंश के शासक राजा पोरस से हुआ. क्योंकि सिकंदर के पास भारत में घुसने का एक मात्र रास्ता था चेनम और झेलम नदी वाला भाग जहाँ पर पोरस का राज था. सिकंदर एक मजबूत शासक था लेकिन उसने यहाँ दुश्मन को हल्के में लेने की भूल कर दी.
जो भी शासक या राजा सिकंदर की अधीनता स्वीकार नहीं करते उन पर वह आक्रमण करके तहस-नहस कर देता था. राजा पोरस ने सिकंदर की अधीनता स्वीकार करने की बजाए युद्ध करना उचित समझा. जब यह समाचार सिकंदर के पास पहुंचा तो उसने पोरस के राज्य पर हमला कर दिया. सिकंदर की सेना में लगभग 50 हजार से अधिक सैनिक थे.
राजा पोरस और सिकंदर के बीच 326 ईसा पूर्व में युद्ध हुआ था.
राजा पोरस और सिकंदर का युद्ध “Battle Of The Hydaspes” के नाम से जाना जाता हैं. आम्भी नामक राजा ने इस युद्ध में सिकंदर की मदद की जिसके परिणामस्वरूप सिकंदर भारत में प्रवेश करने में कामयाब रहा. जेलम नदी पार करते ही सिकंदर का सामना राजा पोरस से हुई. राजा पोरस के पास विशाल संख्या में हाथी की सेना थी.
इतिहासकार कहते हैं कि पोरस यवन सेना को घुटनों पर ले आया. जबकि राजा पोरस की सेना में मात्र 20 हजार सैनिक थे लेकिन बहादुरी में सिकंदर की सेना उनके सामने कुछ नहीं थी. सिकंदर के पास सेना थी तो पास साहस. सिकंदर के अंगरक्षक उसे युद्ध मैदान से बाहर ले गए जिससे उसकी जान बच पाई. लेकिन ऐसे वीर पोरस को इतिहास में वो स्थान नहीं मिला जिसका वो हक़दार थे.
एक यूनानी इतिहासकार लिखता हैं-"राजा पोरस और सिकंदर की यूनानी सेना में लगभग 8 घण्टे तक लड़ाई होती रही लेकिन सिकन्दर को जीत नहीं मिली".
राजा पोरस की सेना हाथियों पर सवार थी यही वजह थी कि सिकंदर की सेना के पास उनका कोई तोड़ नहीं था. सिकंदर के घोड़े का नाम “बुकीफाईलस” था जिसे राजा पोरस के भाई अमर ने एक भाले के वार से उसे मार गिराया.
इस युद्ध में सिकंदर भी घायल हो गया था. सिकंदर को निहत्था देखकर राजा पोरस ने उसे जान से नहीं मारा, नहीं तो इस दिन सिकंदर का नामोनिशान मिट सकता था. पोरस और सिकंदर का युद्ध आज भी बहुत बड़ी ऐतिहासिक घटना मानी जाती हैं.
पोरस की बहादुरी से प्रभावित हुआ सिकंदर
पोरस और सिकंदर का युद्ध समाप्त होने के बाद सिकंदर पोरस का लोहा मान गया. राजा पोरस ने सिकंदर को जोरदार झटका दिया था. पोरस की बहादुरी देख कर वह अचंभित था, इससे पहले ऐसे वीर और शक्तिशाली राजा का सामना उसने कभी नहीं किया था. बड़ी संख्या में सिकंदर के सैनिक मारे गए और बड़ी तादाद में घायल भी हुए, यह मंजर सिकंदर ने कभी नहीं देखा था. इस पराजय से सिकंदर समझ गया की उसके लिए भारत जीतना संभव नहीं हैं.
ऐतिहासिक साक्ष्य की अनुपलब्ध्ता के कारण राजा पोरस का इतिहास में उल्लेख बहुत कम हुआ हैं.
क्या सिकंदर और पोरस की दोस्ती हुई थी?
पोरस ने युद्ध में सिकंदर को धूल चटाई या युद्ध में किसी की जीत नहीं हुई कई जगह यह भी देखने को मिलता हैं. जब युद्ध समाप्त हुआ तो पोरस को बंदी बना लिया गया. बंदी बनाकर पोरस से सिकंदर ने पूछा की बोल तुम्हारे साथ क्या सलूक किया जाए? इस प्रश्न के जवाब में पोरस ने उत्तर दिया ” जो एक राजा का दूसरे राजा के साथ किया जाना चाहिए”.
यह जवाब सुनकर सिकंदर सन्न रह गया और उसने पोरस से दोस्ती कर ली.
लेकिन इस ऐतिहासिक घटना पर विश्वास कम ही होता हैं क्योंकि भारतीय राजा-महाराजाओं की तरह जो ज़िंदा नहीं छोड़ते थे. कुलमिलाकर राजा पोरस का इतिहास हमारे लिए गर्व का विषय हैं क्योंकि उसने सिकंदर को घुटनों पर ला दिया था.
राजा पोरस की मृत्यु कैसे हुई?
राजा पोरस की मृत्यु को लेकर इतिहासकारों का एक तबका यह मंटा हैं की 323 ईसा पूर्व में सिकंदर की मृत्यु के पश्चात् पोरस के एक जनरल ने उनकी हत्या करवा दी. जबकि कुछ इतिहासकार यह बताते हैं की सिकंदर को भारत में मदद करने वाले राजा आम्भी ने पोरस की हत्या करवाई.
पोरस की मृत्यु को लेकर कोई भी प्रामाणिक प्रमाण नहीं मिलता हैं लेकिन ऐसा कह सकते हैं कि 321 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व के मध्य पोरस की मृत्यु हुई होगी.
FAQ
[1] पोरस की पत्नी का नाम क्या था?
उत्तर- सुहानी ढाँकी.
[2] राजा पोरस कौनसे वंश के थे?
उत्तर- पोरवा वंश.
[3] क्या पोरस ने सिकंदर को हराया था?
उत्तर- हाँ, 326 ईसा पूर्व में झेलम नदी के तट पर हुए युद्ध में पोरस ने सिकंदर को हराया था.
[4] पोरस के पुत्र कौन थे?
उत्तर- मल्यकेतु.
[5] राजा पोरस की मृत्यु कब हुई?
उत्तर- 321 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व के मध्य पोरस की मृत्यु हुई होगी.