शिशुनाग वंश का इतिहास || History Of Shishunaga Vansh

“शिशुनाग वंश” भारत के अत्यंत प्राचीन राजवंशों में से एक हैं। shishunaga dynasty के शासकों ने भारत में 413 ईसा पूर्व से 345 ईसा पूर्व तक शासन किया। हर्यक वंश के पतन के साथ ही शिशुनाग वंश अस्तित्व में आया। पुराणों का अध्ययन करने से पता चलता है कि शिशुनाग क्षत्रीय थे। शिशुनाग के बारे … Read more

सूर्यवंश का इतिहास || History Of Suryavansh

सूर्यवंश या सौर राजवंश आदिकाल से ही प्रथम और सबसे प्राचीन राजवंश और हमारे इतिहास का गौरव हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भी सूर्यवंश इतिहास का सबसे प्राचीन राजवंश हैं। इतिहास में सूर्यवंश क्षत्रीय राजवंशों के दो सबसे पुराने राजवंशों जिसमें सूर्यवंश और चंद्रवंश में शामिल हैं। सबसे पहले कश्यप नाम के व्यक्ती हुए जिनका … Read more

मोहर मंगरी (Mohar Magri) या चित्तौड़ी बुर्ज का इतिहास.

मोहर मंगरी (Mohar Magri) चित्तौड़गढ़ दुर्ग की दक्षिण दिशा में स्थित हैं। मोहर मंगरी का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है। सन 1568 ईस्वी में इसका निर्माण हुआ था। यह मिट्टी का एक बहुत बड़ा ढेर हैं। इसका निर्माण मजदूरों द्धारा किया गया और अंत में उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। मोहर मंगरी … Read more

भोजराज सिंह सिसोदिया का इतिहास || History Of Bhojraj

भोजराज सिंह सिसोदिया जिसे हम भोजराज के नाम से जानते हैं। भोजराज को उनकी पत्नी मीराबाई की वजह से जाना जाता हैं। इतना ही नहीं मेवाड़ के महानतम शासकों में शामिल महाराणा सांगा के बड़े पुत्र थे। महाराणा सांगा के जीवनकाल में ही इनकी मृत्यू हो गई थी, यही वजह रही कि ज्यादतर लोग इनके … Read more

बनवीर का इतिहास || History Of Banveer

बनवीर सिंह का सम्बन्ध मेवाड़ से हैं, जिन्हें वनवीर नाम से भी जाना जाता हैं। बनवीर सिंह मेवाड़ के महान शासक महाराणा सांगा के बड़े भाई पृथ्वीराज सिंह सिसोदिया के पुत्र थे, जिन्होंने एक दासी के गर्भ से जन्म लिया था। दासी पुत्र बनवीर सिंह सन 1536 ईस्वी से लेकर 1540 ईस्वी तक मेवाड़ के … Read more

महाराणा विक्रमादित्य का इतिहास || History Of Maharana Vikramaditya

महाराणा विक्रमादित्य सिंह, रतन सिंह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात मेवाड़ के उत्तराधिकारी थे। मेवाड़ के सरदारों और उमराव ने मिलकर रणथंभोर में रहने वाली हाड़ी कर्मवती को मेवाड़ में आमंत्रित किया, क्योंकि मेवाड़ के महाराणा रतन सिंह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात महाराणा विक्रमादित्य ही मेवाड़ के सच्चे उत्तराधिकारी थे। विक्रम संवत के अनुसार … Read more

संविधान दिवस कब और क्यों मनाया जाता हैं?

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ जबकि सन 2015 में मोदी सरकार द्धारा पहली बार 26 नवंबर 2015 को “संविधान दिवस” मनाया गया। डॉ. भीमराव अम्बेडकर के 125 वीं जयंती पर सम्पूर्ण भारत में पहली बार “संविधान दिवस” मनाने की शुरुआत की गई।इस तरह पहली बार भारत में संविधान दिवस 26 … Read more

महाराणा रतन सिंह द्वितीय का इतिहास || History Of Maharana Ratan Singh II

महाराणा रतन सिंह द्वितीय, महाराणा सांगा (संग्राम सिंह) के पुत्र थे। महाराणा सांगा के 7 पुत्र थे जिनमें से तीन पुत्रों की मृत्यु महाराणा सांगा के जीवित रहते ही हो गई। 30 January 1528 ईस्वी को महाराणा सांगा के पुत्र महाराणा रतन सिंह द्वितीय मेवाड़ के महाराणा बने क्योंकि जीवित बचे तीन भाइयों विक्रमादित्य, उदय … Read more

महाराणा सांगा की छतरी कहां है?

महाराणा सांगा की छतरी कहां स्थित हैं, यह जानने से पहले आपको बता दें कि जब खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा घायल हो गए, तब अपनी सेना के साथ वह मेवाड़ की तरफ़ लौट पड़े। खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा के शरीर पर 80 घाव लगे, जिसके चलते उन्होंने अपने साथियों से कहा … Read more

खानवा का युद्ध || History Of Khanwa War

खानवा का युद्ध बाबर और महाराणा सांगा के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध 16 मार्च 1527 के दिन आगरा से 35 किलोमीटर दूर खानवा नामक गांव में लड़ा गया था। महाराणा सांगा और बाबर के बीच लड़ा गया खानवा का युद्ध इतिहास के सबसे भीषण और भयानक युद्ध में शामिल हैं। इस युद्ध में … Read more