दुर्धरा का इतिहास || History Of Durdhara

दुर्धरा का इतिहास और जीवन परिचय जाने से पहले आपको बता दें कि दुर्धरा धनानन्द की पुत्री और मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी थी। शाही परिवार में जन्म लेने वाली दुर्धरा का बचपन बहुत ही रईसी में निकला। दुर्धरा चन्द्रगुप्त मौर्य जैसे प्रतापी राजा की पत्नी होने के साथ साथ बिन्दुसार की […]

चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी दुर्धरा की मृत्यु कैसे हुई?

क्या आप जानते हैं कि चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी दुर्धरा की मृत्यु कैसे हुई? चंद्रगुप्त मौर्य, मौर्य साम्राज्य के संस्थापक और प्रथम शासक थे जिन्होंने दुर्धरा से शादी की। चंद्रगुप्त मौर्य की पत्नी दुर्धरा की मृत्यु के पीछे एक रहस्य छुपा हुआ है। एक ऐसी घटना जिसने मौर्य साम्राज्य की स्थापना में अहम भूमिका निभाने

चाणक्य स्वयं राजा क्यों नहीं बनें?

चाणक्य स्वयं राजा क्यों नहीं बनें? यह प्रश्न सबके मन हैं लेकिन किंग और किंग मेकर में अंतर होता हैं और शायद यही कारण था कि एक बहुत बड़े किंगमेकर होने के कारण आचार्य चाणक्य स्वयं राजा नहीं बनें. चन्द्रगुप्त मौर्य को मगध जैसे विशाल साम्राज्य का राजा बनाने वाले चाणक्य चाहते तो स्वयं राजा

चाणक्य की मौत कैसे हुई?

चाणक्य की मौत कैसे हुई? यह भी एक रहस्य है। चाणक्य की मौत कैसे हुई इसको लेकर इतिहासकार दो तरह की बाते करते हैं। यह चाणक्य की बुद्धिमानी का ही परीणाम था कि एक सामान्य व्यक्ती मगध जैसे विशाल साम्राज्य का राजा बन गया, नाम था चन्द्रगुप्त मौर्य। आचार्य चाणक्य की नीति ने धनानंद जैसे

इतिहास का सबसे शांतिपूर्ण युद्ध कौनसा हैं?

इतिहास का सबसे शांतिपूर्ण युद्ध कौनसा हैं? और किन देशों के मध्य लड़ा गया,यह प्रश्न ही अपने आप में हैरत करने वाला है। विश्व इतिहास कई भयंकर और क्रुर युद्धों से भरा पड़ा है लेकीन क्या आप जानते हैं कि “विश्व का सबसे शांतिपूर्ण युद्ध” कौनसा है? अब आप सोच रहे होंगे कि भला युद्ध

ईसा पूर्व का मतलब क्या होता है? जानें ईसा पूर्व और ईस्वी में अन्तर

ईसा पूर्व का क्या मतलब होता हैं? या फिर ईसा पूर्व का अर्थ क्या हैं? जब भी हम इतिहास की बात करते हैं तो किसी निश्चित समयावधि का ज़िक्र जरूर होता हैं। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म 340 ईसा पूर्व हुआ था। अब मन में यह प्रश्न आना वाजिब

धनतेरस क्यों मनाते हैं? || Why celebrate Dhanteras?

धनतेरस क्यों मनाते हैं या धनतेरस मानने के पीछे क्या वजह है, यह जानने से पहले आपको बता दें कि प्रतिवर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व मनाया जाता हैं। धनतेरस दीपवाली से 2 दिन पूर्व आती है। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए

तुर्रम खान की कहानी || History Of Turram Khan

क्या आप जानते हैं कि तुर्रम खान कौन था? तुर्रम खान की कहानी क्या है? तुर्रम खान को लेकर कई स्लॉगन बोले जाते हैं जैसे कि “ज्यादा तुर्रम खां मत बनो” और “खुद को तुर्रम खां समझते हो?” इस तरह के कई डायलॉग आपने भी सुने होंगे. Turram Khan का असली नाम तुर्रेबाज खान था। तुर्रम

राणा सांगा और इब्राहिम लोदी के युद्ध

महाराणा सांगा और इब्राहीम लोदी के मध्य 2 युद्ध हुए थे। दोनों ही बार महाराणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को धूल चटाई थी. राणा सांगा और इब्राहिम लोदी का युद्ध जो कि खातोली का युद्ध नाम से भी जाना जाता हैं, इसमें राणा सांगा की अद्वितीय जीत हुई। वही दूसरी तरफ बाड़ीघाटी का युद्ध या बाड़ी

कण्व वंश का इतिहास || History Of Kanva Vansh

कण्व वंश भारत के अतिप्राचीन राजवंशों में शामिल हैं। इस वंश ने मगध पर राज्य किया था। कण्व वंश की स्थापना वासुदेव ने की थी, वासुदेव को ही Kanva Vansh का संस्थापक माना जाता हैं। शुंग वंश की समाप्ति के बाद कण्व वंश का उदय हुआ। कण्व वंश के प्रथम शासक वासुदेव ने शुंग वंश

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