दिवेर का युद्ध || Battle Of Diver

दिवेर का युद्ध विश्व विख्यात और ऐतिहासिक दिवेर का युद्ध अक्टूबर 1582 में महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था. विजयदशमी के दिन दिवेर का युद्ध दिवेर छापली नामक स्थान पर लड़ा गया, जिसमें मेवाड़ की सेना का शौर्य देखते ही बनता था. एक ऐसा युद्ध जिसने महाराणा प्रताप द्वारा हल्दीघाटी … Read more

भामाशाह का इतिहास || History Of Bhamashah

भारमल को राजस्थान का प्रथम भामाशाह कहा जाता हैं जो कि भामाशाह के पिता थे. भामाशाह का जन्म 28 जून 1547 ईस्वी में हुआ था. महाराणा प्रताप के आर्थिक रूप से मुख्य सहयोगी होने के कारण भामाशाह का नाम मेवाड़ में आज भी श्रद्धा और आदर के साथ लिया जाता है. भामाशाह ने महाराणा प्रताप … Read more

महाराणा प्रताप का इतिहास || History Of Maharana Pratap

प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का नाम सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के एकमात्र ऐसे योद्धा थे जिन्हें शीश कटाना मंजूर था लेकिन किसी के सामने झुकाना नहीं. चित्तौड़गढ़ के सिसोदिया वंश में जन्म लेने वाले महाराणा प्रताप का नाम इतिहास … Read more

कुँवर शक्तिसिंह का इतिहास || History Of Kunwar Shakti Singh

शक्तिसिंह का इतिहास ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. शक्ति सिंह को उनके द्वारा महाराणा प्रताप और मेवाड़ के साथ किए गए विश्वासघात के लिए याद किया जाता हैं लेकिन यह गलत है. शक्तिसिंह और महाराणा प्रताप के बीच अनबन जरूर थी लेकिन वह गद्दार नहीं थे. शक्तिसिंह के 17 पुत्र थे. शक्ति सिंह के पिता … Read more

महाराणा प्रताप के हाथी का नाम क्या था?

मेवाड़ के महाराणा प्रताप सिंह भारत के वीर पुत्र थे. उन्हें अपनी और देश के साथ साथ जानवरों से भी गहरा लगाव और प्रेम था. महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था यह सब जानते हैं लेकिन शायद ही कोई जनता होगा कि उनका एक हाथी भी था, जिससे महाराणा प्रताप बेहद प्रेम करते … Read more

महाराणा उदयसिंह द्वितीय || History Of Maharana Udai Singh II

महाराणा उदयसिंह महाराणा प्रताप के पिता थे. महाराणा उदयसिंह द्वितीय के पिता का नाम महाराणा सांगा अथवा महाराणा संग्राम सिंह था. 4 अगस्त 1522 ईस्वी को जन्मे महाराणा उदयसिंह द्वितीय महज 5 वर्ष के थे, तब उनके पिता महाराणा सांगा का निधन हो गया. जैसे तैसे इनकी माता रानी कर्णावती ने इनका पालन पोषण किया … Read more

रानी कर्णावती || History Of Rani Karnawati

रानी कर्णावती बूंदी के राव नरबद हाड़ा की बेटी थी. रानी कर्णावती का विवाह मेवाड़ के शासक महाराणा संग्राम सिंह अर्थात महाराणा सांगा के साथ हुआ था. मेवाड़ और चित्तौड़गढ़ के इतिहास में रानी कर्णावती का नाम बड़े ही गर्व के साथ लिया जाता है. मेवाड़ के सिसोदिया वंश में विवाह के पश्चात इन्होंने दो … Read more

विजय स्तंभ चित्तौड़गढ़ निर्माण और इतिहास

विजय स्तंभ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक इमारत है. जिसका निर्माण 1440 ईस्वी से लेकर 1448 ईस्वी के मध्य मेवाड़ के राजा महाराणा कुंभा ने करवाया था. विजय स्तंभ के निर्माण के पीछे मुख्य वजह थी मेवाड़ की ऐतिहासिक जीत. भगवान विष्णु को समर्पित विजय स्तंभ 9 मंजिला है. विजय स्तंभ को … Read more

तनोट माता मंदिर इतिहास || History Of Tanot Mata

तनोट माता मंदिर राजस्थान के जैसलमेर जिले में तनोट नामक गांव में स्थित हैं. तनोट माता के मंदिर को “तनोट राय मातेश्वरी” के नाम से भी जाना जाता हैं. तनोट माता का इतिहास बताता है कि मामडिया नामक चारण की बेटी “देवी आवड़ जी” की तनोट माता के रूप में पूजा अर्चना की जाती हैं. … Read more

नाना साहेब का इतिहास || History Of Nana Saheb

नाना साहेब महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रभावशाली मराठा शासक थे. स्वतंत्रता सेनानी नाना साहब 1857 की क्रांति में अपने अभूतपूर्व योगदान की बदौलत विश्व विख्यात हैं. नाना साहब को नाना धुंधुपंत के नाम से भी जाना जाता हैं. महान मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के बाद नाना साहेब का नाम संपूर्ण भारतवर्ष में … Read more