भीकाजी कामा का इतिहास || History Of Bhikaiji Cama

भीकाजी कामा को मदर ऑफ इंडियन रेवोलुशन कहा जाता हैं। भीकाजी कामा को भारतीय क्रांति की माता भी कहा जाता हैं। थोर पारसी सशस्त्र क्रांतिकारी महिला भीकाजी कामा का जन्म मुंबई में हुआ था। वैसे इनके पास भारत और फ्रांस दोनों जगह की नागरिकता थी। भीकाजी रुस्तम कामा अथवा मैडम कामा ने विदेश में रहते […]

महाराणा उदयसिंह प्रथम का इतिहास || History Of Maharana Udai Singh First

महाराणा उदयसिंह प्रथम को उदयकरण, उदाह और उदा नामों से भी जाना जाता हैं। महाराणा उदय सिंह प्रथम, महाराणा कुम्भा के पुत्र थे। महाराणा उदय सिंह प्रथम रघुवंशी राजपूत परिवार में जन्म लेने वाले और मेवाड़ के इतिहास में ऐसे राजा हुए जिन्होंने अपने माथे पर पिता की हत्या का टीका लगाया। 1468 ईस्वी में

कोठारी बंधु कौन थे? कोठारी बंधुओं की कहानी

कोठारी बंधुओं का इतिहास बहुत ही स्वर्णिम हैं। दो सगे भाई कोठारी बंधु अर्थात् रामकुमार कोठारी और शरद कोठारी जिन्होंने बाबरी मस्जिद पर पहली बार भगवा ध्वज फहराया, उन्हें कोठारी बंधुओं के नाम से जाना जाता हैं। अक्टूबर 1990 की बात हैं, कारसेवक अयोध्या पहुंचे। लक्ष्य था अवैध ढांचे को गिराकर कलंक को मिटाना। कोठारी

साइकिल का इतिहास और आविष्कार || History Of Cycle

साइकिल का इतिहास बहुत पुराना है। आज के समय में लोगों के पास कार, बाइक जैसे स्वचालित यंत्र आने की वजह से साइकिल के उपयोग में कमी आई है। लेकिन 20 वी सदी में पुनः लोग अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए साइकिल की तरफ लौट रहे हैं। साइकिल का इतिहास भी मनुष्य की

पेन का इतिहास क्या हैं? फाउंटेन पेन का आविष्कार किसने किया था?

क्या आप जानते हैं कि पेन का इतिहास क्या हैं? या फिर फाउंटेन पेन का आविष्कार किसने किया? या फिर यह कहे कि पेन का आविष्कार किसने किया? अगर आपका उत्तर हैं नहीं, तो यह लेख पुरा पढ़ें। पेन एक ऐसा उपकरण होता हैं, जो स्याही को पेपर पर उतारने का काम करता हैं। पेन

राणा कुम्भा महल चित्तौडग़ढ़ || History Of Rana Kumbha Mahal Chittorgarh

वीरान और खण्डहर पड़ा कुम्भा महल सदियों से महाराणा कुम्भा की गाथाएं सुना रहा हैं लेकीन सुनने वाला कोई नहीं। Rana Kumbha Mahal Chittorgarh अभी जर्जर हालत में हैं। चित्तौड़गढ़ के सुरवीर राजा महाराणा कुम्भा द्वारा इस भव्य महल का निर्माण 15वीं सदी में करवाया था। कुंभा महल के बारे में कहा जाता है कि

श्री स्वामीनारायण मंदिर भुज, गुजरात जानकरी

स्वामीनारायण मंदिर भुज, गुजरात का निर्माण स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा किया गया हैं। इसे नीलकंठ वर्णी या स्वामीनारायण मंदिर के नाम से जाना जाता हैं। यह स्वामीनारायण मन्दिर भुज गुजरात की बात की जाए तो यह पुरा संगमरमर से बना हुआ हैं साथ ही इसमें सोने की कारीगरी भी की गई हैं। इस मंदिर की चमक

स्वामीनारायण मन्दिर छपिया की जानकारी

भगवान स्वामीनारायण का मन्दिर छपिया में स्थित हैं,यह वहीं जगह हैं जहां श्री स्वामीनारायण का जन्म हुआ था। सन 1781 ईस्वी में उत्तरप्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडेे के रुप में जन्म लेने वाले भगवान स्वामीनारायण आगे चलकर नीलकंठ वर्णी नाम से प्रसिद्ध हुए। स्वामीनारायण का बहुत ही भव्य मन्दिर छपिया में बना हुआ हैं

नीलकंठ वर्णी की मृत्यु कैसे हुई ?

नीलकंठ वर्णी की मृत्यु अर्थात् भगवान स्वामीनारायण की मृत्यु 1 जून 1831 को हुई थी। मृत्यु एक शाश्वत सत्य है, जिसने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु अवश्य होगी। यह विधि का विधान है, और इसे कोई नहीं बदल सकता है। नीलकंठ वर्णी अर्थात् भगवान स्वामीनारायण ने मनुष्य रुप में जन्म लिया था। इसी वजह

स्वामीनारायण संप्रदाय का इतिहास || History Of swaminarayan sampraday

स्वामीनारायण सम्प्रदाय का इतिहास बहुत पुराना हैं। इस सम्प्रदाय को पहले उद्धव संप्रदाय के नाम से जाना जाता था। स्वामीनारायण या नीलकंठ वर्णी को स्वामीनारायण संप्रदाय का जनक या संस्थापक माना जाता हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रवर्तक नीलकंठ वर्णी या सहजानंद जी का जन्म उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले के छपिया नामक गाँव में हुआ था। वर्तमान

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