छत्रपति शिवाजी महाराज की पत्नियां

छत्रपति शिवाजी महाराज की कुल 8 पत्नियां थी. इनका जन्म 19 फरवरी 1630 ईस्वी में शिवनेरी किले में हुआ. प्रतिवर्ष 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मनाई जाती हैं. अपनी अद्भुद संगठन क्षमता और बहादुरी के किस्से विश्व प्रसिद्ध हैं लेकिन इस लेख में हम शिवाजी महाराज की पत्नियों के बारे में पढ़ेंगे. शिवाजी […]

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती 2025

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में हुआ था. प्रतिवर्ष 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मनाई जाती हैं. वर्ष 2025 में 19 फरवरी बुधवार के दिन छत्रपति शिवाजी महाराज की 395 वीं जयंती मनाई जाएगी. छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मराठा साम्राज्य में वर्ष 1630 ईस्वी में 19 फरवरी के दिन शिवनेरी किले में

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती हैं || Makar Sankranti

मकर संक्रांति मनाने का कारण और महत्त्व:- मकर संक्रांति मुख्य हिंदू त्यौहार है, जो हर साल सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता हैं. मकर सक्रांति का त्योहार ज्यादातर 14 जनवरी को ही मनाया जाता है लेकिन कभी-कभी तिथि के अनुसार इसमें एक आध दिन ऊपर नीचे हो सकता है.

दिवेर का युद्ध || Battle Of Diver

दिवेर का युद्ध विश्व विख्यात और ऐतिहासिक दिवेर का युद्ध अक्टूबर 1582 में महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था. विजयदशमी के दिन दिवेर का युद्ध दिवेर छापली नामक स्थान पर लड़ा गया, जिसमें मेवाड़ की सेना का शौर्य देखते ही बनता था. एक ऐसा युद्ध जिसने महाराणा प्रताप द्वारा हल्दीघाटी

भामाशाह का इतिहास || History Of Bhamashah

भारमल को राजस्थान का प्रथम भामाशाह कहा जाता हैं जो कि भामाशाह के पिता थे. भामाशाह का जन्म 28 जून 1547 ईस्वी में हुआ था. महाराणा प्रताप के आर्थिक रूप से मुख्य सहयोगी होने के कारण भामाशाह का नाम मेवाड़ में आज भी श्रद्धा और आदर के साथ लिया जाता है. भामाशाह ने महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप का इतिहास || History Of Maharana Pratap

प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का नाम सुनते ही हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के एकमात्र ऐसे योद्धा थे जिन्हें शीश कटाना मंजूर था लेकिन किसी के सामने झुकाना नहीं. चित्तौड़गढ़ के सिसोदिया वंश में जन्म लेने वाले महाराणा प्रताप का नाम इतिहास

कुँवर शक्तिसिंह का इतिहास || History Of Kunwar Shakti Singh

शक्तिसिंह का इतिहास ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. शक्ति सिंह को उनके द्वारा महाराणा प्रताप और मेवाड़ के साथ किए गए विश्वासघात के लिए याद किया जाता हैं लेकिन यह गलत है. शक्तिसिंह और महाराणा प्रताप के बीच अनबन जरूर थी लेकिन वह गद्दार नहीं थे. शक्तिसिंह के 17 पुत्र थे. शक्ति सिंह के पिता

महाराणा प्रताप के हाथी का नाम क्या था?

मेवाड़ के महाराणा प्रताप सिंह भारत के वीर पुत्र थे. उन्हें अपनी और देश के साथ साथ जानवरों से भी गहरा लगाव और प्रेम था. महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था यह सब जानते हैं लेकिन शायद ही कोई जनता होगा कि उनका एक हाथी भी था, जिससे महाराणा प्रताप बेहद प्रेम करते

महाराणा उदयसिंह द्वितीय || History Of Maharana Udai Singh II

महाराणा उदयसिंह महाराणा प्रताप के पिता थे. महाराणा उदयसिंह द्वितीय के पिता का नाम महाराणा सांगा अथवा महाराणा संग्राम सिंह था. 4 अगस्त 1522 ईस्वी को जन्मे महाराणा उदयसिंह द्वितीय महज 5 वर्ष के थे, तब उनके पिता महाराणा सांगा का निधन हो गया. जैसे तैसे इनकी माता रानी कर्णावती ने इनका पालन पोषण किया

रानी कर्णावती || History Of Rani Karnawati

रानी कर्णावती बूंदी के राव नरबद हाड़ा की बेटी थी. रानी कर्णावती का विवाह मेवाड़ के शासक महाराणा संग्राम सिंह अर्थात महाराणा सांगा के साथ हुआ था. मेवाड़ और चित्तौड़गढ़ के इतिहास में रानी कर्णावती का नाम बड़े ही गर्व के साथ लिया जाता है. मेवाड़ के सिसोदिया वंश में विवाह के पश्चात इन्होंने दो

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