महाराणा मोकल का इतिहास || History Of Maharana Mokal

जब भी मेवाड़ के इतिहास की बात की जाती है, महाराणा मोकल का नाम दृष्टि पटल पर जरूर आता है। राणा मोकल के पिता का नाम राणा लाखा तथा राणा मोकल की माता का नाम रानी हँसाबाई था। अल्पायु में ही इनके पिता का देहांत (1421ईस्वी) हो गया। राणा लाखा की मृत्यु के पश्चात रानी […]

मीराबाई चानू का जीवन परिचय.

साइखोम मीराबाई चानू का जीवन परिचय और कहानी बहुत प्रेरणात्मक है। मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) की चर्चा भारोत्तोलन खेल में मिली सफलता की वजह से हैं। एक छोटे गांव से सम्बंध रखने वाली और गरीबी में पलने वाली मीराबाई चानू ने विश्वभर में अपनी पहचान बनाई है। 48 किलोग्राम प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली

14 सुप्रसिद्ध मीराबाई के भजन लिरिक्स के साथ.

मीराबाई के भजन राजस्थानी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। हम उन मुख्य 14 भजनों की बात करेंगे जो सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं। इस लेख के द्वारा आप मीराबाई के भजन हिंदी में लिरिक्स , मीराबाई के भजनों की राजस्थानी में लिरिक्स समेत जानकरी प्राप्त कर सकते हैं। मीराबाई के मुख्य और सर्वाधिक प्रसिद्ध

"तराइन का दूसरा युद्ध" (Second battle of tarain)- कारण और परिणाम

तराइन के दूसरे युद्ध (तराइन का दूसरा युद्ध) को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि इस युद्ध में मोहम्मद गोरी की जीत हुई जबकि पृथ्वीराज रासो के अनुसार मोहम्मद गोरी पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाकर गजनी ले गया जहां पर पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को मार दिया। तराइन का

"तराइन का प्रथम युद्ध" (first battle of tarain) कारण और परिणाम

तराइन का प्रथम युद्ध पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी केमध्य लड़ा गया था। तराइन का प्रथम युद्ध 1192 ईस्वी में लड़ा गया था। तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई। 1186 ईस्वी में गजनवी वंश के अंतिम शासक को पराजित कर मोहम्मद गोरी ने लाहौर पर कब्जा कर लिया। धीरे-धीरे वह हिंदू

पृथ्वीराज रासो क्या हैं? पृथ्वीराज रासो प्रमाणिकता

पृथ्वीराज रासो, पृथ्वीराज चौहान के जीवन और चरित्र का वर्णन करता हिंदी भाषा में लिखित एक बहुत ही सुन्दर महाकाव्य हैं। इस महाकाव्य की रचना पृथ्वीराज चौहान के बचपन के प्रिय मित्र और राज कवि चंदबरदाई द्वारा की गई हैं। इसमें लगभग 2500 पृष्ठ हैं। वीर रस की कविताओं से भरा यह ग्रन्थ पृथ्वीराज चौहान

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेम कहानी और विवाह

ऐतिहासिक प्रेम कहानियों की बात की जाए तो सबसे पहला नाम आता है, पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेम कहानी का।भारतवर्ष में जिस तरह बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी और सम्राट अशोक की प्रेम कहानी अमर हैं, वैसे ही पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेम कहानी भी अमर हैं। साथ ही इसे प्रेम का पर्याय

पृथ्वीराज चौहान की कहानी || Story Of Prithviraj Chauhan

पृथ्वीराज चौहान की कहानी बहुत दिलचस्प और ऐतिहासिक हैं। पृथ्वीराज चौहान की कहानी एक ऐसे वीर की जो बाल्यावस्था में राजा बना और बड़े-बड़े बादशाहों को झुका दिया। शब्दभेदी बाण का अभ्यास इन्होंने बचपन से ही शुरू कर दिया। ये चौहान वंश के अंतिम सम्राट थे। इनके पश्चात् कोई ऐसा हिन्दू राजा इस साम्राज्य में

पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता का क्या हुआ?

भारत के स्वर्णिम इतिहास में शामिल पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के पश्चात पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता का क्या हुआ की कहानी आज विलुप्त हैं। पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता का प्रेम विवाह हुआ। संयोगिता राजा जयचंद की पुत्री थी और पृथ्वीराज चौहान, चौहान वंश के हिंदू क्षत्रिय राजा थे जो दिल्ली और अजयमेरु पर राज्य

पृथ्वीराज चौहान का सच और प्रमाण

पृथ्वीराज चौहान का सच जानकर आपको आश्चर्य होगा कि हमारे इतिहासकारों ने हमें किस हद तक भ्रमित कर रखा था।इतिहासकारों द्वारा फैलाया गया भ्रम और पृथ्वीराज चौहान का सच जानना हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ी को वीर पृथ्वीराज चौहान का सच पता लग सके। पृथ्वीराज चौहान जैसे शौर्यशाली राजा महाराजाओं

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