महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण- महाराणा प्रताप द्वारा जारी किए गए ताम्रपत्र और जमीनों के पट्टे।

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(महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण) अकबर कभी जीता नहीं और महाराणा कभी हारे नहीं, अकबर की सेना में दम था लेकिन महाराणा के सीने में दम था। हम कैसे मान लें कि महाराणा प्रताप के नाम से कांपने वाला अकबर उन्हें युद्ध में हरा देगा।

1576 ईस्वी में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण (महाराणा प्रताप ताम्रपत्र) मौजूद हैं लेकिन एक भी ऐसा प्रमाण मौजूद नहीं है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि इस युद्ध में अकबर की जीत हुई थी। महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच में लड़े गए हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर हमेशा यह संशय रहा कि इस युद्ध में जीत किसकी हुई।

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हल्दीघाटी के मैदान में उस दिन क्या हुआ?

महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण देने से पहले आपको बताते हैं कि 18 जून 1576 ईस्वी का दिन था। मेवाड़ पर आई विपदा का सामना करने के लिए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सीना तान कर खड़े थे। जिस गति से अकबर की सेना हल्दीघाटी के युद्ध में बढ़ रही थी, उससे दोगुना जोश के साथ महाराणा प्रताप की सेना युद्ध भूमि में पहुंच रही थी।

महाराणा प्रताप की सेना का नेतृत्व हकीम खां सूरी कर रहे थे वहीं दूसरी ओर अकबर की मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह कर रहे थे। सूर्योदय की पहली किरण के साथ हल्दीघाटी के मैदान में महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ।

मातृभूमि की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार वीर मेवाड़ी सैनिक बिजली की तरह मुगल सेना पर टूट पड़े। मुगल सेना को अंदेशा नहीं था कि महाराणा प्रताप की सेना उन पर काल बनकर टूट पड़ेगी।

फिर क्या था मुगल सेना छिन्न-भिन्न हो गई, उनकी जान के लाले पड़ गए। जान बचाने का उनके पास कोई दूसरा चारा नहीं था। धीरे धीरे युद्ध मैदान छोड़कर मुगल सेना पीछे हटने लगी, यही वह समय था जब महाराणा प्रताप की जीत का इतिहास लिखा जा रहा था।

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महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण

महाराणा प्रताप द्वारा जारी किए गए ताम्रपत्र और जमीनों के पट्टे-

18 जून 1576 एक ऐसा ऐतिहासिक दिन था जब मुगलों ने कई किलोमीटर भागकर अपने आप को बचाया था और यही वह दिन था जब मेवाड़ी वीरों ने इतिहास रचाया था।

महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण के रूप में हाल ही में शोधकर्ता डॉ चंद्रशेखर शर्मा द्वारा किया गया शोध उपयोगी साबित हुआ है।
महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण (महाराणा प्रताप ताम्रपत्र) के रूप में इस शोध को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस शोध में सामने आया कि हल्दीघाटी के युद्ध के पश्चात महाराणा प्रताप ने जमीनों के पट्टे जारी किए थे।

महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण (महाराणा प्रताप ताम्रपत्र) देते इन ताम्रपत्रों से साबित होता है कि इस ऐतिहासिक युद्ध में महाराणा प्रताप की जीत हुई थी। महाराणा प्रताप द्वारा जारी किए गए जमीनों के पट्टो के संबंध में इन ताम्रपत्रों पर स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है।

अगर हल्दीघाटी के मैदान में अकबर की जीत होती तो आगामी वर्षों में जमीन के पट्टे मुगल प्रशासन या अकबर के नाम से जारी किए जाते हैं, ना कि महाराणा प्रताप के नाम से। इन दोनों तर्कपूर्ण तथ्यों को महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

इतिहास पढ़ने वाले ज्यादातर लोग बिना प्रमाण या साक्ष्य के किसी भी ऐतिहासिक तथ्य पर पूर्ण विश्वास नहीं करते हैं। यही वजह है कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की जीत को लेकर जो प्रमाण मिले हैं, उन्हें आप तक पहुंचाया जाए ताकि आप भी किसी के सामने महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण प्रस्तुत कर सकें।

महाराणा प्रताप की जीत के प्रमाण (महाराणा प्रताप द्वारा जारी किए गए ताम्रपत्र और जमीनों के पट्टे) पर आधारित यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो कमेंट करके अपनी राय दें, साथ ही इतिहास से संबंधित अच्छे लेख पढ़ने के लिए हमारे साथ जुड़ें।

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