गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी

गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी.

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गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी माता चामुण्डा हैं. इस वंश का इतिहास इस बात का गवाह हैं कि, माता की असीम कृपा से इस वंश के राजा युद्ध से पहले मां का आशीर्वाद लेकर युद्धभूमि में जाते थे. प्रतिहार वंश को ही गुर्जर प्रतिहार वंश के नाम से जाना जाता हैं.

दक्षिण पश्चिम राजस्थान और गुजरात में उत्पन्न यह वंश गुर्जरों की ही एक शाखा हैं. इस लेख में हम गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी चामुण्डा माता के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करेंगे.

गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी चामुण्डा माता का संक्षिप्त परिचय

गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी चामुण्डा माता, माता पार्वती का ही रूप हैं. दुर्गा सप्तशती में चामुण्डा माता के नाम की उत्पति को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित हैं जिसके अनुसार कई वर्षों पुर्व शुम्भ और निशुंभ नामक दो दैत्यों का राज़ था. ये दैत्य धरती और स्वर्ग दोनों ही जगह अत्याचार करते थे. इनके अत्याचारों से परेशान होकर धरतीवासी और स्वर्गवासी हिमालय की तलहटी में माता की उपासना की.

मान सरोवर में स्नान करने आई माता पार्वती ने जब यह देखा तो उन्होंने एक कन्या को प्रकट किया जो शुम्भ और निशुंभ को मार सके. माता पार्वती जी के द्वारा उत्पन्न किए जाने कि वजह से इस प्रकट हुई कन्या को “कोशिकी” के नाम से भी जाना जाता हैं.

जब “कोशिकी” पर शुंभ और निशुंभ के दूतों की नजर पड़ी तो उन्होंने जाकर कहा कि आप तीनों लोकों के राजा हैं ऐसी सुन्दर कन्या आपके दरबार में होनी चाहिए.

यह बात सुनकर शुंभ और निशुंभ ने अपने दूत को भेजा और उस सुन्दर कन्या को विवाह का प्रस्ताव दिया. तभी उस कन्या ने कहा कि जो भी मुझे युद्ध में पराजित करेगा मैं उसी से शादी करूंगी. जब यह बात शुंभ और निशुंभ को पता चली तो वह दोनों गुस्सा हो गए. उन्होंने 2 दूत चंड और मुंड को उस कन्या को लाने के लिए भेजा.

जब चंड और मुंड वहां पर पहुंचे तो उस कन्या ने मां कालिका का रूप धारण किया और दोनों का संहार कर दिया. चंड और मुंड को मारने वाली माता चामुण्डा के नाम से प्रसिद्ध हुई. गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी के रूप में मां चामुण्डा को पुजा जाता हैं.

गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी माता चामुण्डा का भव्य मंदिर राजस्थान के जोधपुर में स्थित हैं.

गुर्जर प्रतिहार वंश की उत्पत्ति- सम्पूर्ण जानकारी

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दोस्तों उम्मीद करते हैं “गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी” पर आधारित यह लेख आपको अच्छा लगा होगा धन्यवाद.


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