मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) चर्चा में क्यों है? जानें मीराबाई चानू की प्रेरणात्मक कहानी और जीवन परिचय।

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साइखोम मीराबाई चानू का जीवन परिचय और कहानी बहुत प्रेरणात्मक है। मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) की चर्चा भारोत्तोलन खेल में मिली सफलता की वजह से हैं। एक छोटे गांव से सम्बंध रखने वाली और गरीबी में पलने वाली मीराबाई चानू ने विश्वभर में अपनी पहचान बनाई है। 48 किलोग्राम प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली मीराबाई चानू को “पद्म श्री” और “राजीव गांधी खेल रत्न” से सम्मानित किया जा चुका हैं।मीराबाई चानू वेट लिफ्टिंग नामक खेल से संबंध रखती है।

आइए राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में पदक विजेता मीराबाई चानू की कहानी और जीवन परिचय की चर्चा करते हैं।

saikhom meerbai chanu biography हिंदी में जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
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साइखोम मीराबाई चानू का जीवन परिचय और प्रेरणात्मक कहानी saikhom meerbai chanu Biography hindi

  • पुरा नाम- साइखोम मीराबाई चानू।
  • जन्म दिनांक- 8 अगस्त 1994.
  • जन्म स्थान- इम्फाल, मणिपुर (भारत).
  • पिता का नाम- साइखोम कृति मितेई।
  • माता का नाम- साइखोम ओंगबी तोंबी लीमा।
  • भाई-बहिन- सैखोम सांतोंबा मितेई (भाई) और सैकोम रंगीता शाया (कुल 6 भाई बहन हैं).
  • हाइट-1.5 मीटर (4 फीट 11 इंच).
  • वजन- 48 किलो.आंखों का रंग – काला।
  • खेल- भारोत्तोलन (वेट लिफ्टिंग).
  • कोच- कुंजरानी देवी.(शुरुआती) और विजय शर्मा (अभी).
  • धर्म- हिन्दू।
  • खाना- नॉन वेज।
  • हॉबीज– ट्रैवलिंग और म्यूजिक।
  • पदक- स्वर्ण (अनाहाईम, गोल्ड कोस्ट) और रजत पदक (ग्लास्गो).
  • सम्मान- “पद्म श्री” और “राजीव गांधी खेल रत्न”।

मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) का बचपन बहुत कठिनाइयों भरा रहा। मीराबाई चानू की संघर्ष भरी कहानी जानकर टिप्पणी करने के लिए आपके पास शब्द नहीं बचेंगे। नोंगपोक काकचिंग नामक गाँव में रहने वाली मीराबाई चानू के 5 भाई बहन है। जब मीराबाई चानू महज 9-10 वर्ष की थी, तब वह अपने भाई सैखोम सांतोंबा मितेई के साथ लकड़ियां लेने के लिए पहाड़ी क्षेत्र में जाया करती थी।

लकड़ियां बीनने के बाद उस भारी लकड़ियों के गट्ठर को उनका भाई नहीं उठा पा रहा था। तभी मीराबाई चानू अपने भाई की मदद करने के लिए उनके पास गई और उस गट्ठर को आसानी से उठाकर सर पर रख लिया। उसका भाई आश्चर्यचकित था। मीराबाई चानू उस गट्ठर को उठाकर लगभग 1 किलोमीटर दूर अपने घर तक लेकर आई।शाम का समय था उसके आसपास रहने वाले सब लोग आश्चर्य कर रहे थे और इसी बात की चर्चा चल रही थी कि आखिर वह बच्ची इतना बड़ा गट्ठर कैसे उठाकर ले आई?

मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) की माता ने कहा “अगर हमारे पास बैलगाड़ी होती तो यह गट्ठर सर पर उठाकर नहीं लाना पड़ता”। मीराबाई चानु ने अपनी माता से पूछा कि बेलगाड़ी कितने रुपए में आती है? तब माता ने कहा बहुत महंगी आती है, हम नहीं खरीद सकते हैं। मीराबाई चानू ने मन बना लिया की उसे जीवन में कुछ करना है। उनके गांव में ही रहने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि बेटी यदि तुम इतना वजन उठा सकती हो तो वेटलिफ्टिंग करनी चाहिए, जिससे तुम्हें पैसे भी मिल जाएंगे और तुम्हारी मां को बैलगाड़ी भी।

लेकिन उनके गांव के आसपास वेटलिफ्टिंग के लिए कोई कॉन्प्लेक्स नहीं था इसलिए प्रतिदिन ट्रेन से 60 किलोमीटर सफर करके इंफाल जाती थी। उनकी शुरुआती ट्रेनिंग इंफाल के खुमान लंपक स्पोर्ट्स कंपलेक्स से हुई। 1 दिन की बात है ट्रेनिंग में ज्यादा समय लगने की वजह से मीरबाई चानू लेट हो गई और उनकी ट्रेन निकल गई। पास में एक मंदिर था, वहां पर वह गई और पुजारी जी से प्रार्थना की कि आज रात रुकने के लिए मुझे यहां पर जगह मिल सकती हैं? पुजारी जी ने कहा बेटा यहां पर एक ही कमरा है, जिस पर छत है। उसमें मैं सोता हूं, दूसरा कमरा अभी निर्माणाधीन है, जिसके ऊपर छत भी नहीं है तो तुम यहां नहीं रुक सकती हो।

मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) ने बिना छत के कमरे में रहने के लिए आग्रह किया तो पुजारी जी ने कहा बेटा जैसी तुम्हारी मर्जी तुम यहां रुक सकती हो।
ऐसा कहा जाता है कि उस रात हल्की बारिश की वजह से मीराबाई चानू को थोड़ी परेशानी हुई। उन्होंने वहां पर उपलब्ध सामान से उस कमरे के ऊपर लकड़ी और त्रिपाल से छत बना दी।

सुबह जब पुजारी जी ने यह देखा तो उन्हें बहुत खुशी हुई और उस लड़की की हिम्मत देखकर उन्होंने उसे वहां रहने के लिए कहा। साथ ही उसके लिए खाना बनाकर भी पुजारी जी देने लगे, इस तरह मीराबाई चानू का शुरुआती समय बहुत ही संघर्ष भरा था। बाद में पुजारी जी ने उनके लिए कमरे को गाय के गोबर, पीली मिट्टी और अन्य लकड़ियों से बहुत अच्छा बना दिया।

महज 11 वर्ष की आयु में मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) वेटलिफ्टिंग में अंडर-15 चैंपियन बनी। जब उनकी आयु 17 वर्ष थी तब उन्होंने जूनियर चैंपियन का खिताब जीत लिया।

लड़की का हौसला और उत्साह देखकर पुजारी जी ने उनकी मुलाकात मणिपुर की महिला वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी से करवाई जोकि भारत की तरफ से एथेंस में ओलंपिक खेल चुकी थी। साइखोम मीराबाई चानू की कोच शुरु से ही कुंजरानी देवी ही रही। कुंजरानी देवी से उन्होंने प्रेरणा ली और विश्व चैंपियन बनने का सपना देखने लगी। सन 2016 की बात है 112 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने अपनी कोच कुंजरानी देवी का 12 सालपुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।

सन 2017 में विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप ( weightlifting) में भाग लेने के लिए मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) अनाहाईम केलिफोर्निया (अमेरिका) गई।
रात्रि भोज के समय उनकी मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति से हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने देखा कि मीराबाई चानू साधारण चावल खा रही थी। उन्होंने इसकी वजह जानना चाहा, तो मीराबाई चानू ने उन्हें जवाब दिया कि वह जिस भी देश में जाती है, अपने ही देश के चावल का प्रयोग करती है।

इतना देश प्रेम देखकर अमेरिका के राष्ट्रपति बहुत प्रभावित हुए और कहा कि मैं एक बार आपके गांव में जरूर आऊंगा। तभी मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) ने कहा कि गांव भी मेरे साथ हैं, उन्होंने एक पोटली निकाली अंदर अपने गांव की मिट्टी थी जो सबसे पहले उन्होंने अपने सिर पर लगाई और फिर राष्ट्रपति के हाथ में वह पोटली थमा दी। इतना देश प्रेम देखकर अमेरिका के राष्ट्रपति बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कल गोल्ड मेडल तुम ही जीतोगी।

कहते हैं कि बीबीसी न्यूज़ ने पहले ही मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu की जीत की रिपोर्ट बना ली थी, भारतीय मीडिया को इसके बारे में खबर तक नहीं थी। हुआ भी वही भारत का नाम रोशन करते हुए वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।

मीराबाई चानू ने 196 किलोग्राम वजन उठाया जिसमें 86 किलो स्क्रैच में तथा 110 किलो क्लीन एंड जर्क में था। 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली मीराबाई चानू ही थी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्णिम प्रदर्शन के लिए साइखोम मीराबाई चानू को 15,00,000 रुपए नगद पुरस्कार दिया।

साइखोम मीराबाई चानू के नाम रिकॉर्ड्स saikhom meerbai chanu records

जोश, जज्बा, जुनून और हौसला जिनके पास हो,जो परिस्थितियों का सामना करने से ना डरे, जो संघर्ष को अपनी आदत बना ले वह इस दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया महज 24 वर्षीय वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने।

1. साल 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो) में 48 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।
2. साल 2016 में गुवाहाटी में संपन्न 12वें साउथ एशियन गेम्स में saikhom meerbai chanu ने गोल्ड मेडल जीता था।
3. साल 2017 में वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता।
4. साल 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर saikhom meerbai chanu ने भारत का नाम रोशन किया जोकि महिला वर्ग की 48 किलोग्राम वेट लिफ्टिंग में था।
5. साल 2016 में संपन्न रियो ओलंपिक में भी saikhom meerbai chanu चयन हुआ था, लेकिन इसमें इनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा।

साइखोम मीराबाई चानू को मिले सम्मान

साइखोम मीराबाई चानू (saikhom meerbai chanu) को भारत सरकार द्वारा “पदम श्री” से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भी इन्हें दिया गया। इन्होंने मणिपुर के साथ-साथ पूरे भारत का नाम विश्व भर में रोशन किया।

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